काशीपुर। एमपी चौक पर सिख समाज का उफान ऐसा देखने को मिला कि नारे, भीड़ और विरोध की आवाजें पूरी तरह हावी रहीं। अचानक ही शहर के इस प्रमुख चौक पर जुटे विशाल समुदाय ने कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के खिलाफ खुलकर आक्रोश व्यक्त किया। कई लोगों के हाथों में प्लेकार्ड थे, कहीं ढोल बज रहे थे, तो कहीं रोष से भरे स्वर लगातार उठते दिख रहे थे। सिख समुदाय इस बात को लेकर बेहद नाराज दिखाई दिया कि बीते दिन हरक सिंह रावत द्वारा दिए गए एक बयान ने धार्मिक संवेदनाओं को ठेस पहुंचाई है, और इसी के विरोध में पूरे समुदाय ने सड़कों पर उतरने का फैसला लिया।
इन्हीं नाराज आवाजों के बीच एमपी चौक पर खड़े लोगों ने पुतला दहन की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू किया। पेट्रोल छिड़कते, चप्पलों से पुतले को पीटते और गुस्से से भरे नारे लगाते हुए सिख समाज का आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। मौके पर काशीपुर के महापौर दीपक बाली, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता गुरविंदर सिंह चंडोक और स्थानीय नेतृत्व से जुड़े कई प्रमुख चेहरे उपस्थित थे। भीड़ के बीच कई बुजुर्ग, युवा और महिलाएं भी अपने-अपने तरीके से नाराजगी दर्ज कर रही थीं। पुतले को जैसे ही आग के हवाले किया गया, पूरा चौक नारों से गूंज उठाकृ“माफी मांगो”, “हरक सिंह रावत मुर्दाबाद”, “धर्म के अपमान पर खामोशी कबूल नहीं”कृऐसी आवाजें लगातार उठती रहीं। आसमान में उठता धुआं और लोगों के आक्रोश से भरे चेहरे यह बता रहे थे कि मामला अब सिर्फ बयान का नहीं, बल्कि समुदाय की प्रतिष्ठा से जुड़ चुका है।

विरोध के बीच जब कैमरा विभिन्न लोगों की तरफ घूमा, तो वहां मौजूद प्रमुख प्रतिनिधियों ने बेहद तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया व्यक्त की। कई समाजजनों का कहना था कि सिख समुदाय ने भारतीय इतिहास में जो योगदान दिया है, वह किसी परिचय का मोहताज नहीं। गुरुओं की परंपरा, बलिदान और सामाजिक संदेशों को लेकर देशभर में सम्मान की भावना है, ऐसे में किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता द्वारा इस प्रकार का बयान देना अस्वीकार्य है। वहां उपस्थित लोगों में से कई ने कहा कि यह बयान न केवल गलत है, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों और मूल्यदृव्यवस्था को चोट पहुंचाने वाली टिप्पणी है। भीड़ में मौजूद कई लोग इतिहास का जिक्र करते हुए मुगल काल की घटनाओं, गुरुओं के बलिदान और सिख परंपरा की दृढ़ता को सामने रख रहे थे। उन्होंने कहा कि यह वही समाज है जिसने मुसीबत के समय देश को सहारा दिया, और आज उसी समाज के प्रति अपमानजनक भाषा का उपयोग करना किसी भी लोकतांत्रिक नेता को शोभा नहीं देता।
काशीपुर के विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने भी कड़े शब्दों में विरोध जताया और कहा कि जब तक हरक सिंह रावत सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगेंगे, तब तक काशीपुर की धरती पर उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उनके मुताबिक यह बयान किसी व्यक्तिगत मत का हिस्सा नहीं बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास है, जिसे यहां का समाज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका कहना था कि अगर भविष्य में हरक सिंह रावत काशीपुर आएंगे, तो भाजपा कार्यकर्ता और सिख समाज दोनों ही इस विरोध को और मजबूत रूप में दर्ज कराएंगे। भीड़ में मौजूद कई युवाओं ने कहा कि यह सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का मसला है, और ऐसे मामलों में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज पाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सिख समाज ने हमेशा देश की एकता, सुरक्षा और संस्कृति के लिए जिस तरह योगदान दिया है, वह अनमोल है। उनका मानना था कि कांग्रेस नेता का बयान न केवल गलत है बल्कि समाज को बांटने वाला भी है। उन्होंने कहा कि इस वक्त उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य नई दिशा की ओर बढ़ रहा है, जबकि कांग्रेस के कुछ नेता माहौल बिगाड़ने वाली भाषा का उपयोग कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि इस बयान को लेकर पार्टी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है जब तक हरक सिंह रावत माफीनामा जारी नहीं करते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
प्रदेश स्तर के नेताओं ने भी भीड़ के बीच खड़े होकर कहा कि यदि कांग्रेस ऐसे बयान देने वाले नेताओं को दूर नहीं करती, तो आने वाले दिनों में प्रदेशभर में और अधिक आक्रोश देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की हर कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा। काशीपुर, जसपुर, बाजपुर और आसपास के क्षेत्रों के नेता भी यहां पहुंचे और कहा कि इस घटना ने पूरे इलाके में गहरी नाराजगी पैदा की है। सिख समाज के योगदान का उल्लेख करते हुए नेताओं ने कहा कि यह वह समुदाय है जिसने देश के सम्मान के लिए खून बहाया, और आज उसी समाज के प्रति असम्मानजनक भाषा किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जाएगी।
उधर भाजपा के जिला स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। भाजपा आवास विकास नगर मंडल के कार्यकर्ताओं ने भी काशीपुर के छत्तीस चौहारा पर अलग से प्रदर्शन आयोजित कर हरक सिंह रावत का पुतला फूंका और उनके बयान की तीव्र निंदा की। इन प्रदर्शनों में युवाओं की भारी भागीदारी रही, और माहौल लगातार गरम बना रहा। पूरे घटनाक्रम में यह साफ़ दिखा कि सिख समाज इस बार किसी भी प्रकार का हल्का बयान या औपचारिक सफाई सुनने के मूड में नहीं है। काशीपुर में जिस तीखे अंदाज़ में नाराजगी सामने आई, उसने पूरे क्षेत्र की राजनीति को हिला दिया। मौजूद लोग लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहे कि धार्मिक सम्मान के मुद्दे पर किसी भी नेता को रियायत नहीं मिल सकती। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस मामले को लेकर राज्यव्यापी विरोध भी संभव है यदि जल्द ही हरक सिंह रावत माफी नहीं मांगते। सिख समाज के कई वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं क्योंकि यह सिर्फ़ काशीपुर की बात नहीं रही, बल्कि पूरे प्रदेश के सम्मान का प्रश्न बन चुकी है।
उधर भाजपा के जिला स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। भाजपा आवास विकास नगर मंडल के कार्यकर्ताओं ने भी काशीपुर के छत्तीस चौहारा पर अलग से प्रदर्शन आयोजित कर हरक सिंह रावत का पुतला फूंका और उनके बयान की तीव्र निंदा की। इन प्रदर्शनों में युवाओं की भारी भागीदारी रही, और माहौल लगातार गरम बना रहा। पूरे घटनाक्रम में यह साफ़ दिखा कि सिख समाज इस बार किसी भी प्रकार का हल्का बयान या औपचारिक सफाई सुनने के मूड में नहीं है। काशीपुर में जिस तीखे अंदाज़ में नाराजगी सामने आई, उसने पूरे क्षेत्र की राजनीति को हिला दिया। मौजूद लोग लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहे कि धार्मिक सम्मान के मुद्दे पर किसी भी नेता को रियायत नहीं मिल सकती। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस मामले को लेकर राज्यव्यापी विरोध भी संभव है यदि जल्द ही हरक सिंह रावत माफी नहीं मांगते। सिख समाज के कई वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं क्योंकि यह सिर्फ़ काशीपुर की बात नहीं रही, बल्कि पूरे प्रदेश के सम्मान का प्रश्न बन चुकी है।

पूरे घटनाक्रम का सार यही है कि काशीपुर में सिख समुदाय का गुस्सा अभी थमा नहीं है। एमपी चौक पर हुआ पुतला दहन, नारों की गूंज, नेताओं की प्रतिक्रियाएं और भीड़ का उफान बता रहा था कि मामला बहुत गंभीर है और आने वाले दिनों में इसका प्रभाव प्रदेश की राजनीति में भी दिख सकता है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी विरोध जारी रखेंगे और मांग करेंगे कि हरक सिंह रावत सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करें। जनता की भावनाएं किस हद तक आहत हुई हैं, यह एमपी चौक के दृश्य देखकर ही साफ झलक रहा था।



