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एक्यूप्रेशर प्रशिक्षण शिविर ने जगाई नई उम्मीदें, प्राकृतिक स्वास्थ्य आंदोलन तेज हुआ

5 दिवसीय नि:शुल्क एक्यूप्रेशर प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में लोग जुटे, जहां विशेषज्ञों ने बिना दवा के उपचार की वैज्ञानिक तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया और वैश्य महासम्मेलन ने इसे सामाजिक स्वास्थ्य सेवा का रूप दिया।

काशीपुर। समाज में स्वास्थ्य चेतना को नई दिशा देते हुए काशीपुर ने एक बार फिर प्राकृतिक उपचार पर आधारित ज्ञान की मशाल जलाई है। गांधी आश्रम रोड स्थित नवचेतना भवन में अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन की जिला इकाई द्वारा प्रारंभ किया गया 15 दिवसीय निःशुल्क एक्यूप्रेशर चिकित्सा शिविर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उद्घाटन समारोह में के.वी.एस. इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक और प्रतिष्ठित उद्योगपति देवेन्द्र कुमार अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित करके शिविर को शुभारंभ की औपचारिकता प्रदान की। स्वागत समारोह में मुख्य अतिथि तथा मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्ट व्यक्तियों का फूलमालाओं और बुके भेंटकर अभिनंदन किया गया, जिससे पूरा माहौल सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यह शिविर केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि वैश्य समाज द्वारा जनकल्याण के उद्देश्य से किया गया एक व्यापक सामाजिक प्रयास है जिसका लाभ शहर के हर वर्ग को मिलने वाला है।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से विशेष रूप से आमंत्रित एक्यूप्रेशर संस्थान के निदेशक डा. ए. पी. चंद्रवंशी ने उपस्थित लोगों को एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का गहन, वैज्ञानिक और अत्यंत रोचक परिचय दिया। उन्होंने शुरुआत में बताया कि आज पूरी दुनिया पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की ओर तेज़ी से लौट रही है और बिना दवा वाले उपचारों में एक्यूप्रेशर सबसे तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह उपचार केवल दर्द मिटाने की तकनीक नहीं, बल्कि शरीर की जीवन ऊर्जा को संतुलित करने वाली अत्यंत सटीक और प्रभावशाली विधि है, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के कई बीमारियों में चमत्कारिक लाभ देती है। डा. चंद्रवंशी ने बताया कि मानव शरीर में सैकड़ों महत्वपूर्ण एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जो सीधा शरीर के अंगों और ऊर्जा-प्रवाह प्रणाली से जुड़े होते हैं। इन बिंदुओं पर उचित दबाव देने से न केवल राहत मिलती है, बल्कि कई गंभीर समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान भी संभव है। उन्होंने विस्तार से समझाया कि उचित प्रेशर तकनीक अपनाने पर ब्लड प्रेशर नियंत्रण, डायबिटीज में सुधार, थायराइड संतुलन, पाचन तंत्र की मजबूती, सर्वाइकल का दर्द, घुटनों और कंधों की पीड़ा, कमर दर्द, हाथ–पैरों की जकड़न, एसिडिटी और मूत्र संबंधी विकारों में उल्लेखनीय लाभ होता है।

अपने लाइव प्रैक्टिकल सत्र में डा. चंद्रवंशी ने बोर्ड पर पूरे मानव शरीर का विस्तृत चार्ट बनाकर उपस्थित लोगों को वास्तविक उदाहरणों के साथ बताया कि कौन–सा पॉइंट शरीर के किस हिस्से से संबंधित है और किस बीमारी में कौन–सा बिंदु सबसे अधिक प्रभावकारी होता है। उन्होंने एक–एक पॉइंट को चिन्हित करते हुए यह भी समझाया कि गलत तरीके से दबाव देने पर कोई लाभ नहीं मिलता, इसलिए तकनीक को सही ढंग से सीखना सबसे महत्वपूर्ण है। व्याख्यान के दौरान उन्होंने हाथ, पैर, सिर, गर्दन, पीठ और पेट के प्रमुख प्रेशर पॉइंट्स को प्रदर्शित किया। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से सही बिंदुओं पर दबाव देने से शरीर का एनर्जी फ्लो सक्रिय होता है और कई सालों से चल रही पुरानी समस्याओं में भी आराम मिलता है। डा. चंद्रवंशी ने यह भी कहा कि यदि आम लोग इन पॉइंट्स का सही ज्ञान प्राप्त कर लें, तो वे घर बैठे ही कई बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं और दवाओं पर निर्भरता कम कर सकते हैं। उनके इस अत्यंत ज्ञानवर्धक, वैज्ञानिक और प्रैक्टिकल प्रस्तुतीकरण को लोगों ने बड़े ध्यान और उत्साह के साथ सुना। व्याख्यान के बाद दर्शकों ने उनसे कई सवाल पूछे और एक्यूप्रेशर की तकनीक सीखने में गहरी रुचि दिखाई।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि देवेंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा पद्धति की जड़ें भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा में ही निहित हैं। यहाँ से अनेक चिकित्सादृविज्ञान, उपचारदृविधियाँ और शोध की नींव विश्व के विभिन्न देशों तक पहुँचीं और समय के साथ पुनः अलग-अलग माध्यमों से भारत वापस भी लौटीं। उन्होंने कहा कि यह जानना महत्वपूर्ण नहीं है कि कौन-सी पद्धति कहाँ से गई और कहाँ वापस आई, बल्कि यह अधिक आवश्यक है कि हमारे पास जो गहरा चिकित्सादृज्ञान है, उसे हम समाज में यथासंभव प्रसारित करें। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार, समाज और मित्रों के बीच इस ज्ञान का प्रचार करेगा, तो जीवन में अनेक रोगों से बचाव और उपचार में सहज ही लाभ मिलेगा।

अग्रवाल ने कहा कि यह शिविर केवल स्वास्थ्य-जागरूकता का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि प्राकृतिक चिकित्सा को सरल रूप में समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। किसी भी चिकित्सा पद्धति का मूल उद्देश्य मानव-सेवा है, इसलिए उसका मूलभूत ज्ञान सभी के लिए आवश्यक है। कई बार अज्ञानता के कारण लोग उपचार के सही मार्ग से भटक जाते हैं, जबकि सही जानकारी उन्हें रोगों से बचा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि यदि हम इस शिविर से उपयोगी ज्ञान प्राप्त कर उसे जीवन में लागू करें, तो यह न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य सुधार में मदद करेगा, बल्कि सशक्त भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। भारत जैसे राष्ट्र की शक्ति उसके प्रत्येक नागरिक से आती है। जब तक हर इकाईकृहर व्यक्तिकृसशक्त और स्वस्थ नहीं होगा, राष्ट्र की शक्ति पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचार, स्वच्छ मन और स्वस्थ शरीर एक समृद्ध समाज का आधार हैं। इस अवसर पर उन्होंने आयोजकों और प्रशिक्षकों को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यहाँ प्राप्त ज्ञान आगे भी समाज के कल्याण में उपयोगी सिद्ध होगा।

डॉ. संजीव गुप्ता ने हिंदी दैनिक ‘सहर प्रजातंत्र’ से बातचीत में बताया कि अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन द्वारा काशीपुर में आयोजित यह एक्यूप्रेशर शिविर केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सीखने और आगे बढ़ाने की भावना से जुड़ा एक व्यापक प्रशिक्षण अभियान है। उन्होंने कहा कि समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से नई समिति का गठन किया गया है और इस समिति का यह पहला बड़ा आयोजन है। उनका मानना है कि स्वस्थ शरीर ही सामाजिक कार्यों और जनसेवा का वास्तविक आधार होता है, इसलिए ऐसे स्वास्थ्य शिविर समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आमतौर पर स्वास्थ्य शिविरों में मरीज उपचार लेकर लौट जाते हैं, लेकिन यहां विशेष बात यह है कि डॉ. ए. पी. चंद्रवंशी लोगों को उपचार के साथ-साथ एक्यूप्रेशर की संपूर्ण तकनीक सिखा भी रहे हैं, ताकि प्रतिभागी इस विद्या को आगे समाज में प्रसारित कर सकें। इस प्रशिक्षण मॉडल से न केवल व्यक्ति स्वयं स्वस्थ रह सकेगा, बल्कि दूसरों की भी सहायता कर सकेगा।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि एक्यूप्रेशर कोई नई चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें भारतीय आयुर्वेद में वर्णित प्राचीन मर्म चिकित्सा से जुड़ी हैं, जिसमें शरीर के 114 महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख मिलता है। एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर और आधुनिक थैरेपी की कई विधाएं इसी मूल विज्ञान की शाखाएं हैं। स्वरूप और तकनीक समय के साथ बदलते रहते हैं, परंतु सिद्धांत सदैव वही रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब हम इन सिद्धांतों का पालन करते हैं, तो निश्चित रूप से इसका गहरा और प्रभावी लाभ मिलता है। अंत में उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा पद्धति विशेष है क्योंकि इसमें न दवाइयों का खर्च है, न किसी उपकरण का बोझ। व्यक्ति स्वयं अपनी और दूसरों की चिकित्सा करने में सक्षम हो सकता है।

प्रदेश उपाध्यक्ष कौशलेश गुप्ता ने हिंदी दैनिक ‘सहर प्रजातंत्र’ से बातचीत में बताया कि अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के तत्वावधान में आयोजित यह 15 दिवसीय एक्यूप्रेशर प्रशिक्षण शिविर काशीपुर नगर के स्वास्थ्य उत्थान के उद्देश्य से विशेष रूप से स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि वैश्य महासम्मेलन एक सामाजिक संगठन है और समाज के प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। पिछले एक महीने से शहर के विभिन्न इलाकों में छोटे–बड़े शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, और उसी निरंतरता में अब यह विस्तारित प्रशिक्षण शिविर नवचेतना भवन में शुरू किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रयागराज से पधारे डॉ. ए. पी. चंद्रवंशी ने संस्था से संपर्क कर यह आग्रह किया कि एक्यूप्रेशर जैसी सरल, प्रभावी और प्राचीन तकनीक को शहर में व्यापक रूप से फैलाया जाए। इस प्रस्ताव को संस्था ने जनहित में स्वीकार किया और पूरी जिम्मेदारी के साथ इस शिविर के संचालन की कमान संभाली। इसी श्रृंखला में आज केवीएस इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक श्री देवेन्द्र प्रकाश अग्रवाल द्वारा शिविर का विधिवत उद्घाटन किया गया। उद्घाटन के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि शहर इस प्रकार की प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली को लेकर बेहद जागरूक और उत्साहित है। कौशलेश गुप्ता ने यह भी कहा कि इस शिविर की खासियत यह है कि यह न केवल निःशुल्क है, बल्कि पूर्णतः प्रशिक्षण आधारित है। प्रतिभागियों को शरीर के विभिन्न बिंदुओं—विशेषकर हाथों के प्रमुख प्वाइंट्स—के माध्यम से रोग निवारण की जानकारी दी जा रही है। यहां आने वाले लोगों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल रहा है और कई लाभार्थियों ने पहले ही अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव महसूस करने की सूचना दी है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचें, सीखें और स्वयं के साथ-साथ दूसरों को भी इस प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ दिलाएं। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि वैश्य महासम्मेलन भविष्य में भी ऐसे आयोजन लगातार करता रहेगा, ताकि समाज का हर व्यक्ति स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर बन सके।

शिविर के समापन की ओर बढ़ते हुए अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष सुरेश गोयल ने सभी अतिथियों, सहयोगियों, चिकित्सकों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल सामाजिक सरोकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कारों के प्रसार को भी प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि 15 दिनों तक चलने वाले इस चिकित्सकीय शिविर का अधिक से अधिक लोग लाभ उठाएं और प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व को समझें। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष कौशलेश गुप्ता ने बेहद सहज और प्रभावशाली शैली में किया।

समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें संरक्षक एस.पी. गुप्ता, अग्रवाल सभा अध्यक्ष मनोज कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष महेंद्र गुप्ता लोहिया, नकुल अग्रवाल, अशोक कुमार गुप्ता, जिला महामंत्री डा. संजीव गुप्ता, जिला कोषाध्यक्ष नवनीत कुमार विश्नोई, महानगर अध्यक्ष पीयूष अग्रवाल, नागलिया अनिल कुमार अग्रवाल, विश्नोई सभा सचिव योगेश विश्नोई, जे.पी. अग्रवाल, बी.के. गुप्ता, अभिषेक गोयल, जी.के. अग्रवाल, सतीश गोयल, शेष कुमार सितारा, राजीव अग्रवाल, विमल गुड़िया, अशोक धीमान, डा. आर.सी. शर्मा, अमित गुप्ता, रजत गुप्ता, मयंक गोयल, डा. आदित्य सिंह, सौरभ गुप्ता, पूजा सिंह, मधुबाला गुप्ता, पूजा गुप्ता, संध्या अग्रवाल, मंजू गुप्ता, आयुषी गुप्ता सहित अनेक वैश्य बंधु और अतिथि मौजूद रहे। उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में इस चिकित्सा शिविर की उपयोगिता की सराहना की और इसे समाज के लिए अत्यंत लाभकारी पहल बताया।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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