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अल्मोड़ा के सरकारी स्कूल में भारी विस्फोटक बरामदगी से पूरे उत्तराखंड में सनसनी फैल गई

विद्यालय परिसर से छिपाकर रखी गई जिलेटिन स्टिकों की बड़ी खेप मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क, जांच टीमों ने विस्फोटक पहुँचाने वाले नेटवर्क की तलाश में कई संभावित सुराग खंगालने शुरू किए

अल्मोड़ा। जनपद से उठी सनसनी ने पूरे राज्य को चौंका दिया है, क्योंकि शांत माने जाने वाले सलत क्षेत्र में स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डबरा के परिसर से जिस मात्रा में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है, उसने सुरक्षा तंत्र को गहरी चिंता में डाल दिया है। विद्यालय जैसी जगह, जिसे बच्चों की सुरक्षाभर सुनिश्चित उपस्थिति का केंद्र माना जाता है, वहाँ झाड़ियों में छिपाकर रखी गई एक सौ इकसठ जिलेटिन स्टिक का मिलना स्वयं में बेहद गंभीर मामला है। शुरुआती जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों के बीच दहशत फैलना स्वाभाविक था और उसके बाद से प्रशासन से लेकर पुलिस तक हर स्तर पर हलचल बढ़ गई है। यह बरामदगी किसी सामान्य अनियमितता का मामला नहीं बल्कि ऐसे संकेतों का हिस्सा प्रतीत हो रही है, जो उत्तराखंड के सुरक्षित माने जाने वाले पहाड़ी इलाकों पर किसी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है।

उम्मीद के बिल्कुल विपरीत यह घटना उस समय सामने आई जब विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य सुभाष सिंह ने सुबह परिसर का नियमित निरीक्षण किया और उनकी नज़र झाड़ियों में आधे छिपे कुछ संदिग्ध पैकेटों पर जा टिकी। पहले तो उन्हें किसी सामान्य सामान का भ्रम हुआ, लेकिन पास जाकर पैकेटों के आकार और वजन को देखकर मामला तुरंत गंभीर लगने लगा। उन्होंने बिना देर किए पुलिस को सूचना दी, जिससे यह तय हो गया कि किसी अनहोनी की आशंका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। विद्यालय के भीतर बच्चों की आवाजाही और सुबह की दिनचर्या को देखते हुए स्थिति की भयावहता आसानी से समझी जा सकती है। इस तरह के खतरे का खुले स्कूल परिसर में मौजूद रहना यह सोचने को मजबूर करता है कि यदि इन विस्फोटकों को गलत समय पर सक्रिय कर दिया जाता, तो नुकसान कितना गहरा होता।

सूचना मिलते ही सलत थाना टीम के नेतृत्व में अपर उपनिरीक्षक दीवान सिंह बिष्ट और लोमेश कुमार सबसे पहले मौके पर पहुँचे और पूरे क्षेत्र की तत्काल घेराबंदी कर दी। प्रारंभिक जाँच के बाद मामला इतना संवेदनशील पाया गया कि स्थानीय दस्ता ही पर्याप्त नहीं समझा गया। इसलिए अल्मोड़ा के साथ-साथ उधम सिंह नगर और नैनीताल से भी बम निष्क्रिय करने वाली विशेष टीमें मौके पर भेजी गईं। मौली और रेम्बो नामक प्रशिक्षित पुलिस कुत्तों की मदद से कई घंटों तक तलाशी अभियान चलता रहा। इस बीच सुरक्षा घेरे को सख़्त किया गया ताकि किसी भी प्रकार की मानवीय चूक जांच को प्रभावित न करे। कई घंटों की गहन तलाश में विस्फोटक सामग्री का बड़ा जखीरा सामने आने के बाद स्थिति पूरे रूप में स्पष्ट हुई कि यह कोई साधारण छुपाव नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से रखी गई सामग्री है।

तलाशी के दौरान विस्फोटक के प्रकार की पुष्टि होते ही पूरा ध्यान जिलेटिन की प्रकृति और उसके संभावित उपयोग पर केंद्रित हुआ। जिलेटिन एक अधिकृत विस्फोटक है जिसे आमतौर पर बड़ी चट्टानों को काटने, खनन कार्यों, सुरंग निर्माण और सड़क परियोजनाओं में उपयोग किया जाता है। यह बेलनाकार छड़ों के रूप में तैयार किया जाता है और डिटोनेटर या ब्लास्टिंग कैप के साथ सक्रिय होने पर बेहद शक्तिशाली धमाका कर सकता है। इसमें नाइट्रोग्लिसरीन आधारित मिश्रण होता है, जो इसे स्थिर लेकिन अत्यंत प्रभावी विस्फोटक बनाता है। यह बिना सक्रिय किए नहीं फटता, परंतु गलत हाथों में पहुँच जाने पर अत्यधिक नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि विद्यालय परिसर जैसे खुले और संवेदनशील स्थान पर इतनी बड़ी मात्रा में इसका मिलना बेहद गंभीर सुरक्षा चूक के रूप में देखा जा रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 161 जिलेटिन स्टिक का उपयोग यदि किसी अस्थायी विस्फोटक उपकरण—आईईडी—के निर्माण के लिए किया जाए, तो उससे 40 से अधिक शक्तिशाली बम तैयार किए जा सकते हैं। इतना बड़ा विस्फोटक संग्रह बिना किसी लाइसेंस, रिकॉर्ड या आधिकारिक निगरानी के मिलना सीधे तौर पर अवैध गतिविधि की ओर इशारा करता है। इसी बीच, तलाशी में एक स्थान पर पैकेट मिलने के बाद लगभग 15–20 फीट आगे दूसरी जगह भी एक और बड़ा समूह बरामद हुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सामग्री एकाधिक जगहों पर छुपाई गई थी। बम निरोधक दस्ते ने सभी छड़ों को सुरक्षित तरीके से एकत्र कर सील किया और पूरे ऑपरेशन को विशेष रिकॉर्डिंग प्रणाली में दर्ज भी किया। घटना स्थल पर बरामदगी की फर्द मौके पर ही तैयार की गई, ताकि जांच आगे किसी भी दिशा में मोड़ी जा सके।

पुलिस ने इस मामले में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के अंतर्गत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है। अब जांच टीमों के सामने तीन प्रमुख सवाल खड़े हैं—पहला, इतनी बड़ी मात्रा वाला विस्फोटक विद्यालय परिसर तक किस मार्ग से पहुँचा; दूसरा, इसे यहाँ छुपाने वाला कौन था; और तीसरा, इसका अंतिम उद्देश्य क्या था। इन सवालों के जवाब मिलना जरूरी है क्योंकि घटनाक्रम यह संकेत देता है कि इसके पीछे एक या एक से अधिक व्यक्तियों का सुविचारित प्रयास शामिल हो सकता है। स्थानीय पुलिस से लेकर जिलास्तरीय सुरक्षा एजेंसियाँ तक अब इस मामले को गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में देख रही हैं।

इस बीच अल्मोड़ा के एसपी देवेंद्र पिचा का आधिकारिक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने पुष्टि की कि डबरा गांव के समीप झाड़ियों में छिपाकर रखे गए जिलेटिन की छड़ों को बरामद किया गया है। उनके अनुसार घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ता तुरंत सक्रिय कर दिया गया था। आसपास का पूरा क्षेत्र खंगाला गया और बरामद सामग्री की विधिवत जांच की गई। उन्होंने कहा कि सामान्यतः जिलेटिन का उपयोग सड़क निर्माण जैसे कार्यों में होता है, लेकिन विद्यालय परिसर में इसकी उपस्थिति असामान्य और अत्यंत संदिग्ध है। इसी वजह से विस्तृत जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं, जो अब विभिन्न कोणों से इस मामले की तह तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं।

एक और पहलू जो इस घटना को और गंभीर बनाता है, वह है कि पिछले कुछ महीनों में देश के कई बड़े शहरों में संदिग्ध बम प्लांट और धमाकों से जुड़े मामले सामने आए हैं। दिल्ली से लेकर अन्य महानगरों तक सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े गए नेटवर्क यह संकेत देते हैं कि विभिन्न राज्यों के बीच विस्फोटक की अवैध आवाजाही बढ़ी है। ऐसे में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इस तरह की सामग्री का मिलना कहीं किसी बड़े नेटवर्क की सक्रियता का संकेत तो नहीं, यह सवाल अब ज़ोर पकड़ चुका है। क्या कोई स्थानीय व्यक्ति बाहरी तत्वों के साथ मिलकर कुछ बड़ा करने की तैयारी में था, या फिर यह सामग्री किसी और स्थान तक पहुँचाई जानी थी—इन सभी संभावनाओं को जांच टीमें गंभीरता से परख रही हैं।

स्थिति जितनी गम्भीर दिखती है, उतनी ही व्यापक जांच की आवश्यकता है। यह घटना केवल एक स्कूल परिसर से विस्फोटक मिलने की खबर नहीं, बल्कि यह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की कठोर परीक्षा है। ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में न केवल पुलिस की त्वरित कार्रवाई बल्कि जांच एजेंसियों की गहन पड़ताल देश की सुरक्षा की कसौटी बन चुकी है। जनता भी अब यह समझने लगी है कि सजगता और जागरूकता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक सुरक्षा का हिस्सा है। ऐसे में आवश्यक है कि लोगों तक इस प्रकार की रिपोर्टें लगातार पहुँचती रहें ताकि समाज सतर्क रहे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की खबर समय रहते सामने लाई जा सके।

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