काशीपुर। उत्तराखंड राज्य गठन की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर राज्य निर्माण के सच्चे सेनानियों ने एक बार फिर न्याय और सम्मान की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। ऊधमसिंह नगर में सक्रिय राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद और राज्य निर्माण सक्रिय संघर्ष मोर्चा काशीपुर से जुड़े आंदोलनकारियों ने संोमवार को उपजिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष सांकेतिक धरना देकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि राज्य निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों का शीघ्र सत्यापन, चिन्हांकन और सम्मान सुनिश्चित किया जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जो आंदोलनकारी राज्य निर्माण की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में रहे, वे आज भी अपने हक और पहचान के लिए संघर्षरत हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
ज्ञापन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन से आग्रह किया कि राज्य की स्थापना के लिए जिन्होंने अपने युवाकाल का त्याग किया, जेलें भरीं, लाठियां खाईं और सड़कों पर उतरकर आंदोलन को धार दी कृ उन सभी को अब तक वह मान-सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे अधिकारी हैं। ज्ञापन में कहा गया कि यह दुर्भाग्य की बात है कि राज्य निर्माण की नींव रखने वाले कई आंदोलनकारी आज भी पहचान के लिए भटक रहे हैं। इस अवसर पर राज्य निर्माण सक्रिय आंदोलनकारी समिति के नेतृत्व में उपस्थित आंदोलनकारियों ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया कि चिन्हित एवं पात्र आंदोलनकारियों को “राज्य आंदोलनकारी” का दर्जा देकर सम्मानित किया जाए।
ज्ञापन देने के दौरान नरपत सिंह राजपूत ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि हजारों युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम नागरिकों के बलिदान का परिणाम था। उन्होंने कहा कि शासन को उन सच्चे आंदोलनकारियों को सम्मानित करना चाहिए, जिन्होंने उत्तराखंड के अस्तित्व की लड़ाई में अपना सब कुछ न्योछावर किया। राजपूत ने यह भी कहा कि यह विडंबना है कि कई सक्रिय आंदोलनकारी आज भी सत्यापन और सम्मान की सूची से बाहर हैं, जबकि कुछ ऐसे नाम भी शामिल कर लिए गए जो आंदोलन के दौरान कहीं दिखाई ही नहीं दिए। उन्होंने कहा कि यह अन्याय जल्द खत्म होना चाहिए और हर वास्तविक आंदोलनकारी को उसका हक मिलना चाहिए।
इस दौरान राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि राज्य के गौरव और सम्मान की रक्षा के लिए आंदोलनकारियों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। वक्ताओं ने कहा कि राज्य निर्माण का सपना केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका मकसद था समानता, न्याय और सम्मान से भरा उत्तराखंड। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन युवाओं ने अपनी जानें जोखिम में डालीं, वे आज भी सम्मान की प्रतीक्षा में हैं। धरना स्थल पर उपस्थित सभी आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि सरकार को इस दिशा में तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।
ज्ञापन में शामिल आंदोलनकारियों ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि राज्य निर्माण की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर भी कई आंदोलनकारियों को सरकारी सूची में स्थान नहीं मिला है। युगल किशोर सिंघल, विनय कुमार विसोई, अमित कुमार, सुगल किशोर, अर्चना लोहनी, मीनू गुप्ता, रामानंद जोशी, मोहन विष्ट, अतुल गुप्ता, मदन सिंह, गौरव रस्तोगी, बीरेन्द्र शर्मा, प्रदीप कुमार, भूपेन्द्र कुमार, मनीष शर्मा, रीप्रक सिधवानी, चन्द्रभूषण डोभाल, अनुराग मार्सवत, सुरेश गौड़, धर्मेन्द्र मित्तल, विद्यार्थी भैया, जगदीश पनेरू, अजय टंडन, आशुतोष गुप्ता, अशोक टंडन, कृष्णा चन्द्र पपनै सहित दर्जनों आंदोलनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वे राज्य निर्माण के लिए वर्षों तक संघर्षरत रहे और आज भी पहचान के लिए प्रयास कर रहे हैं।
ज्ञापन के दौरान उपस्थित राज्य निर्माण संघर्ष मोर्चा काशीपुर के प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य निर्माण की लड़ाई केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आज भी यह अस्मिता और हक की लड़ाई बन चुकी है। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार को ऐसे लोगों की सूची पुनः तैयार करनी चाहिए जिनके नाम सत्यापन से वंचित रह गए हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार निष्पक्ष समिति बनाकर ऐसे सभी आंदोलनकारियों को चिन्हित करे जिन्होंने वास्तविक रूप से आंदोलन में भाग लिया था। आंदोलनकारियों ने कहा कि यह न केवल सम्मान का विषय है बल्कि उत्तराखंड के गौरव का प्रश्न भी है।
इस मौके पर वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्यवाही नहीं की तो आंदोलनकारी पुनः सड़कों पर उतरेंगे और बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे। उन्होंने कहा कि हम कोई राजनीतिक लाभ नहीं चाहते, बस अपने त्याग और बलिदान का उचित सम्मान चाहते हैं। आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद और संयुक्त संघर्ष मोर्चा काशीपुर अब संयुक्त रूप से प्रदेशभर में सम्मान यात्रा निकालेगा और उन वास्तविक आंदोलनकारियों की सूची सरकार के सामने प्रस्तुत करेगा, जो अब तक उपेक्षा के शिकार हैं।
धरने के अंत में सभी आंदोलनकारियों ने संकल्प लिया कि जब तक हर पात्र राज्य आंदोलनकारी को उसका दर्जा और मान-सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की आत्मा उन बलिदानियों में बसती है जिन्होंने इस राज्य के लिए अपना खून बहाया। अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन उन वीरों को उनका हक दे, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ यह जान सकें कि उत्तराखंड किस कीमत पर बना था। धरना शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन आंदोलनकारियों की आंखों में अब भी न्याय की लौ जलती दिखाई दी कृ एक ऐसी लौ, जो उत्तराखंड की असली पहचान बन चुकी है।



