काशीपुर। शहर में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। गुरुवार शाम एक ऐसा ही मामला उस समय सामने आया जब शहजाद पुत्र शमशाद, निवासी कबर कोर्ट रोड कीर को पुलिस ने ट्रैफिक नियमों के गंभीर उल्लंघन में पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार, महज़ 12 वर्षीय बच्चा एक स्कूटी (न्ज्ञ04त्-0313) को तेज़ गति से चला रहा था। बताया गया कि स्कूटी में उसके साथ तीन सवारियां और भी मौजूद थीं। यह घटना शाम लगभग चार बजे 19 पी चौकी क्षेत्र में हुई, जब ट्रैफिक पुलिस नियमित जांच के दौरान वाहनों की जांच कर रही थी। बालक को बिना लाइसेंस वाहन चलाते देख पुलिस ने तत्काल स्कूटी को जब्त कर लिया और उसके अभिभावक पर भारी जुर्माना लगाया गया।
ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पकड़ी गई स्कूटी के स्वामी श्री विकास बताए जा रहे हैं, जो रामनगर रोड, वार्ड नंबर 15, पाक कंपाउंड क्षेत्र के निवासी हैं। यह वाहन नाबालिग बच्चे को सौंपा गया था, जो कि मोटर व्हीकल एक्ट 1994 के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। विभाग ने इस मामले में 25,000 रुपये का भारी जुर्माना निर्धारित किया है। ट्रैफिक पुलिस ने इसे लापरवाही का चरम उदाहरण बताया है और चेतावनी दी है कि नाबालिग को वाहन देने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सड़क पर एक छोटी सी गलती बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए अभिभावकों को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।
घटनास्थल पर मौजूद ट्रैफिक इंस्पेक्टर जसवंत रावत ने बताया कि पुलिस टीम नियमित चेकिंग अभियान चला रही थी, तभी यह स्कूटी तेज़ रफ्तार में आती दिखाई दी। उन्होंने कहा, “जब हमने वाहन रोका तो यह देखकर हैरानी हुई कि चालक महज़ 12 साल का बच्चा है और उसके साथ तीन अन्य बच्चे भी बैठे थे। यह बेहद खतरनाक स्थिति थी। हमने तुरंत वाहन को सीज़ किया और बच्चे के अभिभावक को थाने बुलाकर नियमों की जानकारी दी।” रावत ने आगे कहा कि यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अब ऐसे मामलों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
ट्रैफिक विभाग के अनुसार, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की घटनाएं शहर में तेजी से बढ़ रही हैं, और इसके पीछे अभिभावकों की लापरवाही बड़ी वजह बन रही है। कई बार माता-पिता बच्चों को महज़ कुछ मिनटों के लिए स्कूटी या बाइक थमा देते हैं, लेकिन यही लापरवाही सड़क हादसों को न्योता देती है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए स्कूलों और कॉलोनियों में विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। ट्रैफिक नियमों की जानकारी देने के साथ-साथ यह भी समझाया जाएगा कि नाबालिग द्वारा वाहन चलाने पर वाहन स्वामी को ही सज़ा भुगतनी पड़ती है।
ट्रैफिक इंस्पेक्टर जसवंत रावत ने यह भी बताया कि विभाग लगातार सख्ती बरत रहा है और अब तक कई नाबालिग चालकों पर कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि लोगों को सचेत करना है कि सड़क सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को सड़क पर वाहन चलाने की अनुमति न दें। यह उनकी सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी कदम है।” रावत ने यह भी कहा कि इस तरह की लापरवाही से न सिर्फ बच्चों की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उक्त मामला अब ट्रैफिक कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा और जुर्माने की पूरी राशि वहीं जमा की जाएगी। 25,000 रुपये का जुर्माना केवल चेतावनी नहीं, बल्कि यह संदेश है कि शहर में ट्रैफिक नियमों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकें और खुद भी सभी नियमों का पालन करें। विभाग ने यह भी कहा कि आने वाले हफ्तों में बड़े पैमाने पर स्पेशल ट्रैफिक ड्राइव चलाई जाएगी, जिसमें बिना लाइसेंस, बिना हेलमेट और नाबालिग चालकों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शहरवासियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ कानून नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा का वादा है। शहजाद के इस मामले ने साबित कर दिया कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कितनी खतरनाक हो सकती है। पुलिस की इस कार्रवाई ने एक सख्त संदेश दिया है कि अब किसी भी हालत में नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, और नियमों को तोड़ने वालों पर कानून का शिकंजा और कड़ा होगा।



