काशीपुर। काशीपुर का ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब सोमवार की रात एक अद्भुत, दिव्य और आध्यात्मिक आलोक से जगमगा उठा। अवसर था सिख धर्म के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देव जी महाराज के प्रकाश पर्व का, जिसे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाने के लिए हजारों श्रद्धालु गुरुद्वारे के प्रांगण में एकत्र हुए। जैसे ही संध्या का समय हुआ, पूरा परिसर दीपमालाओं, रंगीन रोशनी और फूलों की मालाओं से सज गया। हर ओर से आती हुई “वाहे गुरु” की मधुर आवाज़ और श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। इस आयोजन का विशेष संयोजन खालसा फाउंडेशन द्वारा किया गया, जिसने इस वर्ष प्रकाश पर्व को अद्वितीय भव्यता देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। दीपों की जगमगाहट, आतिशबाजी की चमक और श्रद्धा से भरे चेहरों ने इस पर्व को एक यादगार अध्याय बना दिया।
गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब का पूरा परिक्षेत्र इस अवसर पर किसी स्वर्गिक दृश्य से कम नहीं दिख रहा था। रंग-बिरंगी रोशनियों से सजा परिसर, दीवारों पर झिलमिलाती लाइटों की लड़ियाँ और आसमान में चमकती आतिशबाजी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे में पहुंचकर दीप जलाए, अरदास की और गुरु नानक देव जी महाराज के चरणों में अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित किए। हर व्यक्ति के चेहरे पर एक अलौकिक खुशी थी — जैसे भीतर का अंधकार भी इन दीपों की रोशनी में विलीन हो गया हो। इस अवसर पर सभी धर्मों के लोग उपस्थित रहे — हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी ने मिलकर भाईचारे का एक अनूठा उदाहरण पेश किया। पूरा नगर एकता, प्रेम और प्रकाश के इस पर्व में डूब गया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। हर ओर से संगत उमड़ रही थी, बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं — सभी दीप और मोमबत्तियां लेकर गुरु चरणों में नतमस्तक हो रहे थे। आतिशबाजी का सिलसिला देर रात तक चलता रहा और हर बार आसमान रोशनी से नहा उठता। लोगों के मोबाइल कैमरे इन पलों को कैद करने में व्यस्त थे, हर कोई इस दृश्य को अपनी यादों में सहेज लेना चाहता था। इस अवसर पर मौजूद श्रद्धालुओं ने कहा कि यह नजारा किसी पर्व से कम नहीं बल्कि आत्मिक शांति और आस्था का अद्भुत संगम है।
मौके पर मौजूद अनुपम शर्मा ने कहा कि गुरुपुरब केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि मानवता, एकता और सद्भाव का संदेश देने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि आज यहां जो दृश्य देखने को मिला, वह यही बताता है कि गुरु नानक देव जी महाराज के उपदेश आज भी समाज के हर व्यक्ति के भीतर जीवित हैं। शर्मा ने कहा कि जब हर धर्म, हर समुदाय के लोग एक साथ इस पर्व में शामिल होते हैं तो यह दर्शाता है कि सिख धर्म का मूल भाव “सबका साथ, सबका भला” सचमुच हमारे समाज की आत्मा में बसता है। उन्होंने शहरवासियों से आग्रह किया कि वे इस एकता, प्रेम और प्रकाश के संदेश को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
इस मौके पर खालसा फाउंडेशन के प्रमुख सदस्य जगमोहन बंटी ने कहा कि यह आयोजन पूरी संगत की सेवा भावना और सहयोग का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दीपमाला को और अधिक भव्य रूप दिया गया है, ताकि हर श्रद्धालु को प्रकाश पर्व की पवित्रता और उल्लास का अनुभव हो सके। उन्होंने कहा — “वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह” के उद्घोष के साथ पूरे परिसर में जो उत्साह दिखा, वह केवल रोशनी का नहीं बल्कि आत्मिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हर वर्ष समाज के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है, क्योंकि इसमें हर धर्म और हर वर्ग का व्यक्ति शामिल होकर मानवता का सच्चा संदेश देता है।
गुरुद्वारे की सजावट भी अपने आप में एक आकर्षण का केंद्र रही। दीवारों पर चमकती लाइटें, फर्श पर सजे दीपक, हवा में घुली अगरबत्तियों की सुगंध और शबद-कीर्तन की मधुर ध्वनि ने एक ऐसा वातावरण निर्मित किया जिसमें हर कोई आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस कर रहा था। श्रद्धालु एक-दूसरे को “गुरुपुरब दी लख लख वधाई” कहकर बधाई दे रहे थे। वहीं कई श्रद्धालु बाहर खड़े होकर आतिशबाजी के मनमोहक दृश्य को निहारते रहे। पूरा आसमान उस समय जैसे रोशनी और भक्ति से झिलमिला उठा।
इस आयोजन की कवरेज के दौरान कई श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन काशीपुर की पहचान हैं, जहां धर्म, समाज और संस्कृति का संगम देखने को मिलता है। कुछ श्रद्धालुओं ने कहा कि यह केवल प्रकाश पर्व नहीं बल्कि आत्मा के भीतर प्रकाश जलाने का अवसर है। जहां एक ओर रोशनी दीपों में है, वहीं दूसरी ओर यह रोशनी मानवता के हृदय में भी जगती है।
गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब, जो काशीपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है, ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि श्रद्धा और एकता से बड़ा कोई पर्व नहीं होता। कार्यक्रम के अंत में सभी ने गुरु नानक देव जी के प्रति नतमस्तक होकर प्रार्थना की — कि यह प्रकाश पर्व सबके जीवन में शांति, समृद्धि और सच्चे मार्ग का उजाला लेकर आए। काशीपुर की इस रात ने यह साबित कर दिया कि जब दीप जलते हैं, तो केवल घर नहीं बल्कि दिल भी रोशन हो जाते हैं — और यही है गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाश पर्व की सबसे बड़ी पहचान।



