काशीपुर। विधानसभा का विशेष सत्र इस बार उत्तराखंड की राजनीतिक और विकास यात्रा के लिए ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ, क्योंकि पूरे राज्य से आए जनप्रतिनिधियों ने न सिर्फ अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सामने रखा बल्कि भविष्य की दिशा में ठोस दृष्टिकोण भी साझा किया। इन्हीं वक्तव्यों में से सबसे अधिक चर्चा में रहा काशीपुर के विधायक त्रिलोक सिंह चीमा का संबोधन, जिसने पूरे सदन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। लंबे समय से जनता के मन में यह उत्सुकता थी कि आखिर अपने क्षेत्र के मुद्दों पर वे इस बार क्या रुख अपनाएंगे। जैसे ही उन्होंने अपना वक्तव्य रखा, विधानसभा में काशीपुर का नाम गूंज उठा। उनके शब्दों में आत्मविश्वास और अपने क्षेत्र के प्रति गहरा जुड़ाव झलक रहा था। चीमा ने यह स्पष्ट किया कि काशीपुर के विकास को अब उन्होंने उत्तराखंड की दीर्घकालिक सोच से जोड़ दिया है, और यह वक्त राज्य के विज़न को अगले स्तर तक पहुंचाने का है।
अपने वक्तव्य की शुरुआत करते हुए विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने गर्व के साथ कहा कि वे उस धरती का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां हर नागरिक परिश्रमी, ईमानदार और अपने प्रदेश की तरक्की के प्रति समर्पित है। उन्होंने विधानसभा में दृढ़ स्वर में कहा कि काशीपुर और कुमाऊं क्षेत्र में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएँ स्वीकृत और प्रारंभ हो चुकी हैं, जो आने वाले वर्षों में राज्य की प्रगति को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज यहां के किसान, व्यापारी और युवा केवल सपने नहीं देख रहे, बल्कि अपने क्षेत्र को एक विकसित मॉडल बनाने की दिशा में सक्रियता से काम कर रहे हैं। चीमा ने यह दावा भी किया कि काशीपुर अब विकासोन्मुख सोच रखने वाले प्रदेश समूहों में अग्रणी बन चुका है और यह वास्तविक प्रमाण है कि जनता परिवर्तन को अब व्यवहारिक रूप में देखना चाहती है।
विधानसभा में रखे गए अपने संबोधन में त्रिलोक सिंह चीमा ने बीते पच्चीस वर्षों की राज्य यात्रा को सराहते हुए कहा कि अब उत्तराखंड को अगले पच्चीस वर्षों के लिए नई प्रतिज्ञाओं और नए विज़न की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने शासन की पारदर्शी शैली और सुशासन के मॉडल से पूरे देश में मिसाल पेश की है। यह विश्वास और आत्मबल अब हर नागरिक के चेहरे पर दिखाई देता है। चीमा का कहना था कि यह रफ्तार अब थमनी नहीं चाहिए, बल्कि और तीव्र गति से आगे बढ़नी चाहिए ताकि राज्य के हर हिस्से में अवसरों का विस्तार हो सके। उन्होंने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि अब समय है कि उत्तराखंड मॉडल स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन के ठोस परिणामों को धरातल पर दिखाए। उन्होंने कहा कि युवाओं के कौशल विकास और स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन की दिशा में केंद्रित कदम उठाने होंगे, ताकि पलायन की मजबूरी समाप्त हो और राज्य के भीतर ही संभावनाएँ विकसित हों।
अपने वक्तव्य के दौरान विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने ग्रामीण और पर्वतीय इलाकों की चुनौतियों को भी बेहद संवेदनशीलता के साथ रखा। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड को एक पूर्ण विकसित राज्य बनाना है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करनी होगी। उनके अनुसार, गांवों तक आधुनिक सेवाओं की सुगम उपलब्धता ही समान विकास की बुनियाद तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है क्योंकि पूरी दुनिया आज स्थायित्व और पर्यावरणीय सुरक्षा की चिंता में है। चीमा ने कहा कि यदि उत्तराखंड ‘ग्रीन मॉडल स्टेट’ के रूप में उभरता है, तो यह न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक उदाहरण बनेगा। उन्होंने आगे कहा कि राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और संसाधन उसकी पहचान हैं और इन्हें संरक्षित करते हुए विकास की नई परिभाषा तैयार करनी होगी।
विधानसभा के इस महत्वपूर्ण सत्र के अंतिम हिस्से में त्रिलोक सिंह चीमा ने अपने वक्तव्य को समापन की ओर ले जाते हुए कहा कि उत्तराखंड की अब तक की उपलब्धियाँ किसी एक नीति या किसी एक सरकार का परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह पूरे राज्य की जनता की निरंतर मेहनत और विश्वास का संयुक्त प्रतिफल हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, उद्योग और उभरते नए क्षेत्रों में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज देश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। चीमा ने गर्व के साथ कहा कि उन्हें इस बात का सम्मान है कि वे ऐसे प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जिसकी दिशा, गति और कार्यशैली अब भारत के विकास मानचित्र पर एक नई पहचान बना रही है। उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखंड की विकास गाथा और अधिक सशक्त रूप से राष्ट्रीय परिदृश्य पर उभरेगी। उनके इस वक्तव्य ने विधानसभा के वातावरण को उत्साह और आशा से भर दिया, मानो एक नई शुरुआत की घोषणा हो चुकी हो।
त्रिलोक सिंह चीमा का यह संबोधन न केवल विधानसभा के भीतर गूंजा बल्कि बाहर भी चर्चा का विषय बन गया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इसे उत्तराखंड की विकास यात्रा के लिए एक सकारात्मक दिशा संकेत बताया। यह भाषण केवल काशीपुर या कुमाऊं की बात नहीं थी, बल्कि यह पूरे राज्य के भविष्य की रूपरेखा का संकेत था। चीमा ने यह साबित कर दिया कि वे अपने क्षेत्र के साथ-साथ पूरे प्रदेश के दीर्घकालिक विकास विज़न को लेकर गंभीर हैं। उनका यह संदेश स्पष्ट था—उत्तराखंड की असली ताकत उसकी जनता है, और जब जनता और सरकार एक दिशा में सोचें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। उनका यह वक्तव्य आने वाले वर्षों में राज्य की नीतिगत प्राथमिकताओं को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें केवल राजनीति नहीं, बल्कि विकास की वास्तविक भावना और आत्मविश्वास का स्वर गूंज रहा था।



