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रामनगर काशीपुर एनएच 309 पर खानापूर्ति का खेल गड्ढों में समा रही सड़क की सच्चाई

रामनगर से काशीपुर के बीच एनएच 309 पर मरम्मत के नाम पर चल रहा टल्लों का खेल जनता के सब्र की परीक्षा बन गया है, जिम्मेदार फिर भी मौन हैं।

रामनगर(सुनील कोठारी)। रामनगर से काशीपुर तक एनएच 309 की हालत इन दिनों बदहाली की मिसाल बन चुकी है। जिस सड़क पर रोजाना उत्तराखंड का बड़ा यातायात गुजरता है, वहीं अब उसकी सूरत ऐसी हो गई है कि वाहन चालक हर कदम पर गड्ढों से जूझ रहे हैं। जहां सड़क का निर्माण होना चाहिए, वहां सिर्फ खानापूर्ति के नाम पर गड्ढों पर टल्ले लगाने का खेल चल रहा है। पेंचवर्क का आलम यह है कि लगते ही उखड़ने लगता है, जिससे यात्रियों की परेशानी दोगुनी हो गई है। यह वही मार्ग है जो देहरादून, हल्द्वानी, काशीपुर और पहाड़ों को जोड़ता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी, विधायक और सांसद आंखें मूंदे बैठे हैं। कुछ दिन पहले इस मार्ग को लेकर ‘सहर प्रजातंत्र’ ने इस मार्गा के खस्ता हाल पर समाचार प्रकाशीत किया था, समाचार प्रकाशीत होने के बाद सुधार के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है, जबकि सड़क की असली मरम्मत की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती।

प्रतापपुर से आगे के हिस्से में सड़क की हालत और भी दयनीय दिखी। मौके पर जाकर देखा गया कि एनएच 309 के किनारे पर “लिटिल” नामक बोर्ड लगा है, और उसके आसपास जिस तरह टल्ले लगाए जा रहे हैं, वह अपने आप में सरकारी उदासीनता का उदाहरण बन गया है। सड़क की मरम्मत के नाम पर जो बजरी डाली जा रही है, उसमें न कोई समानता है और न गुणवत्ता। देखने वालों को साफ समझ आ जाता है कि यह काम सिर्फ दिखावे के लिए किया जा रहा है। भारी यातायात वाले इस मार्ग पर इस तरह की मरम्मत कितने दिन टिक पाएगी, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। एनएच विभाग के अधिकारी मौके पर तो दिखे, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि सड़क का पूरा निर्माण कब होगा, तो उन्होंने साफ कहा कि इसका प्रस्ताव बनने में अभी चार से पांच महीने लग सकते हैं। ऐसे में खानापूर्ति के ये टल्ले कब तक सड़क को संभाल पाएंगे, यह सवाल अब आम जनता के मन में गूंज रहा है।

स्थानीय नागरिकों में इस घटिया काम को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रकाश भारती नामक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि वह खुद कई बार इस मार्ग से गुजरते हैं और उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि सड़क पर सिर्फ टल्ली डालकर खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि यहां पर सड़क की मरम्मत के नाम पर कोई ठोस काम नहीं हो रहा, सिर्फ ऊपर से बजी डाल दी जाती है और रोलर से दबाकर आगे बढ़ जाते हैं। एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने गुस्से में कहा कि यह काम महीने भर भी नहीं टिकेगा, क्योंकि इसमें तारकोल और बजी का संतुलन ही नहीं है। उन्होंने कहा कि समझ नहीं आता कि ये काम कौन कर रहा है, कहां से ये ठेकेदार आते हैं, और किस तरह का कमीशन खेल यहां चल रहा है। जनता की मेहनत का पैसा सड़कों पर इस तरह बर्बाद किया जा रहा है, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है।

क्षेत्रीय जनता का मानना है कि इस पूरी स्थिति की जवाबदेही क्षेत्र के विधायक और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग दोनों की है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि जब रोजाना हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, तब यह सरकार और विभाग दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि सड़क दुरुस्त रखी जाए। इसके बावजूद जिस तरह यहां खानापूर्ति का खेल चल रहा है, वह सीधे तौर पर लापरवाही का सबूत है। लोगों का कहना है कि जब प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है और केंद्र तथा राज्य दोनों जगह एक ही दल की सत्ता है, तब ऐसी स्थिति में भी सड़क निर्माण में देरी होना जनता के विश्वास पर सवाल उठाता है।

एनएच 309 सिर्फ रामनगर और काशीपुर को ही नहीं जोड़ती, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर दिल्ली, देहरादून और अन्य बड़े शहरों तक हजारों वाहनों की आवाजाही का मुख्य मार्ग है। यही वजह है कि इस सड़क की हालत का असर पूरे राज्य के यातायात पर पड़ रहा है। भारी ट्रक, बसें और निजी वाहन हर दिन इन गड्ढों से गुजरते हुए जोखिम उठा रहे हैं। सड़क की सतह कई जगह से उखड़ चुकी है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि जब अधिकारी खुद इस मार्ग से गुजरते हैं, तब उन्हें यह हालत दिखाई क्यों नहीं देती। जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक इस तरह के टल्ले और खानापूर्ति के कामों से सड़क सुधार का मजाक बनाया जाएगा।

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क साफ झलकता है। अधिकारी जहां कागजों में मरम्मत कार्य दिखा रहे हैं, वहीं मौके पर सिर्फ असमान बजरी और उखड़े हुए टल्ले दिखाई देते हैं। जनता की शिकायतें बार-बार संबंधित विभाग तक पहुंचाई गई हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती रही है। यह सड़क न केवल स्थानीय लोगों के लिए जीवनरेखा है, बल्कि पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। फिर भी इस पर ध्यान न दिया जाना सरकारी तंत्र की निष्क्रियता को उजागर करता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब इस सड़क का स्थायी समाधान किया जाएगा। क्या सरकार और विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगे? रामनगर से काशीपुर तक एनएच 309 की हालत अब जनता के सब्र की सीमा लांघ चुकी है। लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द इस सड़क का नया निर्माण कार्य शुरू किया जाए, क्योंकि अब अस्थायी मरम्मत और खानापूर्ति का दौर जनता को मंजूर नहीं। अगर शासन और विभाग ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरना तय है। एनएच 309 की यह बदहाली केवल सड़क की नहीं, बल्कि सिस्टम की भी पोल खोल रही है।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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