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काशीपुर में पुलिस प्रशासन का जागरूकता अभियान छात्रों को साइबर सुरक्षा और नशा मुक्ति का संदेश

युवाओं को प्रेरित करने के लिए अधिकारियों ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग, साइबर ठगी और नशे के खतरों पर दी गहन जानकारी, सुरक्षित और अनुशासित जीवन जीने का दिया संदेश

काशीपुर। गुरुवार को मानपुर रोड स्थित उदयराज हिन्दू इंटर कॉलेज के प्रेक्षा गृह का माहौल बेहद गंभीर और शिक्षाप्रद हो गया जब पुलिस प्रशासन की ओर से साइबर जनजागरूकता और नशा उन्मूलन पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं को न केवल साइबर अपराधों से बचने के उपाय बताए गए बल्कि नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहने की भी प्रेरणा दी गई। पूरे आयोजन के दौरान बच्चों ने अधिकारियों की बातों को गहन रुचि से सुना और कई विषयों पर प्रश्न भी पूछे। पुलिस अधिकारियों ने इस कार्यक्रम को एक अवसर बनाकर आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने का संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि आज के समय में जहां इंटरनेट और सोशल मीडिया युवाओं की दिनचर्या का बड़ा हिस्सा बन चुका है, वहीं इसके खतरों से सचेत रहना भी उतना ही जरूरी है।

इस ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी आयोजन में एचटीयू प्रभारी निरीक्षक बसंती आर्या ने अपने संवेदनशील संबोधन में छात्रों के सामने ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसी वीभत्स सामाजिक बुराई की भयावह तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने बेहद प्रभावशाली शब्दों में बताया कि यह अपराध केवल किसी एक व्यक्ति की आज़ादी और भविष्य को निगल नहीं जाता, बल्कि पूरे समाज की जड़ों को खोखला कर देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मासूम बच्चों और युवाओं को झूठे लालच, धोखे और मजबूरियों के सहारे अपराधी कैसे अपने जाल में फंसाते हैं और उनका जीवन किस तरह अंधकार में धकेल दिया जाता है। निरीक्षक ने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल खुद ही सतर्क न रहें, बल्कि आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखें और तुरंत सूचना दें, क्योंकि एक छोटी-सी सतर्कता अनगिनत जीवन बचा सकती है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि सजगता और साहस ही इस अमानवीय अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है, जिससे समाज सुरक्षित और सशक्त बन सकता है।

इसी क्रम में उधमसिंह नगर से आई रीता चौहान ने छात्रों को संबोधित करते हुए डिजिटल युग के खतरनाक पहलुओं पर गहन चर्चा की और विशेष रूप से सोशल मीडिया के दुरुपयोग, क्यूआर कोड धोखाधड़ी तथा ऑनलाइन गेमिंग की लत से होने वाले विनाशकारी परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बड़े ही प्रभावशाली ढंग से समझाया कि इंटरनेट की आभासी दुनिया जितनी असीम संभावनाओं का द्वार खोलती है, उतना ही गहरे जोखिम भी अपने साथ लेकर आती है। आकर्षक विज्ञापन, फर्जी लिंक और ऑनलाइन लालच किस तरह युवाओं को जाल में फंसाकर उनके व्यक्तिगत डाटा और आर्थिक सुरक्षा पर प्रहार करते हैं, इसका उन्होंने विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए सजगता और विवेक ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, क्योंकि लापरवाही उन्हें ऐसी खाई में धकेल सकती है, जहां से बाहर निकलना कठिन हो जाता है। रीता चौहान ने विद्यार्थियों को दृढ़ता से चेताया कि सतर्क रहकर ही डिजिटल युग को वरदान बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान यातायात निरीक्षक जितेंद्र पाठक ने छात्रों को संबोधित करते हुए सड़क सुरक्षा के महत्व और यातायात नियमों के पालन पर अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रकाश डाला। उन्होंने बेहद गंभीर शब्दों में कहा कि सड़क हादसों के पीछे सबसे बड़ी वजह लोगों की लापरवाही, जल्दबाजी और अनुशासनहीनता है, जबकि इन घटनाओं से बचना उतना ही सरल है जितना नियमों का पालन करना। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट की अनदेखी करना, तेज रफ्तार में वाहन चलाना और मोबाइल पर बात करना सड़क पर मौत को दावत देने जैसा है। जितेंद्र पाठक ने छात्रों को चेताया कि सड़क पर अनुशासन और धैर्य ही जीवन की ढाल हैं, क्योंकि नियम केवल कानून नहीं बल्कि जीवन की सुरक्षा की गारंटी होते हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे स्वयं सुरक्षित ड्राइविंग की आदत डालें और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करें, ताकि एक सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त समाज का निर्माण हो सके।

इसके पश्चात् एसपी निहारिका तोमर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डिजिटल अपराधों की भयावह सच्चाई को बड़े सटीक और प्रखर अंदाज में सामने रखा। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार साइबर अपराधी “डिजिटल अरेस्ट” जैसी नई चालों, “ई-सिम फ्रॉड” के षड्यंत्रों, “ऑनलाइन चालान ठगी” के झांसे, संदिग्ध “एपीके फाइल्स” और नकली शॉपिंग वेबसाइट्स के माध्यम से भोले-भाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। निहारिका तोमर ने छात्रों को चेतावनी दी कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना, संदिग्ध कॉल उठाना या बिना सोचे-समझे किसी संदेश पर भरोसा करना खुद को खतरे में डालने जैसा है। उन्होंने कहा कि तकनीक जितनी तेजी से जीवन आसान बना रही है, उतनी ही तेज चालाकी से अपराधी इसका दुरुपयोग कर रहे हैं और खासकर युवा वर्ग उनकी पहली पसंद बन चुका है। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय हर कदम पर सतर्क रहें और साइबर सुरक्षा को जीवन का अहम हिस्सा बनाएं।

इसी कड़ी में सीओ दीपक सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए नशे के खतरनाक दुष्परिणामों पर गहन प्रकाश डाला और अपने शब्दों से ऐसा चेतावनी संदेश दिया जिसने विद्यार्थियों को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि नशा केवल शरीर को ही खोखला नहीं करता बल्कि धीरे-धीरे इंसान की सोचने-समझने की क्षमता, निर्णय लेने की ताकत और जीवन में आगे बढ़ने का जज़्बा भी छीन लेता है। दीपक सिंह ने विद्यार्थियों को समझाया कि क्षणिक सुख और झूठी तसल्ली देने वाले यह नशे, लंबे समय में केवल बर्बादी का रास्ता दिखाते हैं और भविष्य की सारी संभावनाओं को नष्ट कर देते हैं। उन्होंने प्रेरणादायक अंदाज में कहा कि जीवन में सफलता पाने का एकमात्र रास्ता आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम है, न कि किसी नशे की गिरफ्त में आकर खुद को खो देना। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे खुद भी नशे से दूर रहें और अपने मित्रों व परिवार को भी इस घातक जाल से बचाने की जिम्मेदारी निभाएं।

वहीं, एएनटीएफ प्रभारी निरीक्षक राजेश पांडे ने कार्यक्रम के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए ड्रग्स की रोकथाम और उसके भयावह सामाजिक दुष्परिणामों पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने अपने विचारों से यह स्पष्ट किया कि नशे की गिरफ्त में आने वाला युवा केवल अपनी जिंदगी ही नहीं बिगाड़ता बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी गहरे संकट में धकेल देता है। राजेश पांडे ने कहा कि नशा इंसान की महत्वाकांक्षाओं, सपनों और भविष्य को निगल जाने वाला ऐसा जहर है जो धीरे-धीरे जीवन की रफ्तार को थाम लेता है। उन्होंने छात्रों से भावुक अपील की कि वे खुद को इस जाल से बचाएं और अपने साथियों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करें। पांडे ने यह भी कहा कि यदि युवा वर्ग नशे के खिलाफ जागरूक होकर खड़ा हो जाए तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की एक नई लहर उठ सकती है, जो राष्ट्र को मजबूत और प्रगतिशील दिशा में आगे बढ़ा सकती है।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक पल तब सामने आया जब एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने छात्रों को बड़े ही आत्मीय अंदाज में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे यहां पुलिसिंग या कानून की कठोर बातें करने नहीं आए हैं, बल्कि एक बड़े भाई के रूप में बच्चों को समझाने और सही रास्ता दिखाने आए हैं। उन्होंने बताया कि यातायात नियमों का पालन करना, नशे से बचना, ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खतरों को समझना और सोशल मीडिया पर होने वाली ठगी से सावधान रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही आदर्श चुनना सबसे अहम है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरी नहीं कि जिसे आप अपना आदर्श मानते हैं, वह वास्तव में योग्य हो। इसलिए सोच-समझकर और बड़ों की सलाह लेकर ही अपने जीवन की राह चुनें और ऐसा काम करें जिससे समाज में सम्मान और पहचान दोनों मिले।

अंत में, एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि आज जो जानकारी उन्हें यहां मिली है, उसे अपने परिवार और दोस्तों तक जरूर पहुंचाएं ताकि पूरे समाज को जागरूक किया जा सके। इस विशेष कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य वीके गुप्ता, मेजर मुनीश कांत शर्मा, मनोज कुमार विश्नोई, कौशलेश गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। यह अवसर न केवल छात्रों के लिए एक ज्ञानवर्धक अनुभव बना बल्कि उनके जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी देता नजर आया।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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