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सचिव दीपक कुमार ने पिथौरागढ़ में कार्यक्रम समीक्षा बैठक और संस्कृत ग्राम ऊर्ग का निरीक्षण किया

सचिव दीपक कुमार ने अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति पर मार्गदर्शन दिया और ग्रामीणों को संस्कृत शिक्षा में सुधार एवं प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया

पिथौरागढ़।उत्तराखंड शासन के सचिव संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग दीपक कुमार ने पिथौरागढ़ जनपद का एक दिवसीय दौरा कर विभिन्न अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की। विकास भवन सभागार में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं सचिव दीपक कुमार ने की। बैठक का उद्देश्य जिला स्तरीय अधिकारियों को योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति से अवगत कराना और उनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों को समझना था। जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने सचिव महोदय का स्वागत करते हुए उन्हें एक पौधा भेंट किया, जो इस आयोजन को और भी गरिमापूर्ण बनाता है। इस अवसर पर सचिव ने अधिकारियों से संवाद करते हुए सभी विभागों की गतिविधियों का विस्तृत अवलोकन किया और सुनिश्चित किया कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन हो।

बैठक के दौरान सचिव दीपक कुमार ने माननीय मुख्यमंत्री की घोषणाओं की विभागवार समीक्षा को गंभीरता से लिया। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी निरंजन प्रसाद ने जानकारी दी कि अब तक कुल 642 घोषणाओं में से 222 पूर्ण हो चुकी हैं, 189 पर कार्य प्रगति पर है, 130 शासन/निदेशालय स्तर पर लंबित हैं, 90 जनपद स्तर पर प्रगति में हैं और 11 घोषणाओं को विलोपित कर दिया गया है। सचिव ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि सभी योजनाओं को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ताकि आम जनता को इसका लाभ तुरंत मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में जनता के द्वार कार्यक्रम, अनुशासित प्रदेश और भय मुक्त समाज योजना मुख्य आधार हैं, जिनकी समय-समय पर समीक्षा मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।

सचिव ने अधिकारियों से संवाद करते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का बारीकी से विश्लेषण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को प्रभावी रूप से लागू करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है। पिथौरागढ़ के पर्यटन क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पर्यटन विभाग को निर्देश दिए कि दक्षिण भारत की तरह एक दिन या आधे दिन के लिए पर्यटकों को टूरिस्ट व्हीकल उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही उन्होंने लखपति दीदी योजना के अंतर्गत शीर्ष दस और अंतिम दस समूहों को चिन्हित कर प्रोत्साहित करने और होटल व्यवसायियों को समय पर ब्याज सब्सिडी उपलब्ध कराने के लिए उद्योग विभाग को विशेष दिशा-निर्देश भी दिए।

सुबह 9:30 बजे सचिव दीपक कुमार ने आदर्श संस्कृत ग्राम ऊर्ग का भ्रमण किया और ग्रामवासियों को संबोधित किया। ग्रामवासियों को उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके बच्चे, बुजुर्ग और मातृशक्ति संस्कृत भाषा सीख सकते हैं, जिसके लिए प्रशिक्षक नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों की संख्या बढ़ती है तो भविष्य में संस्कृत ग्राम में प्राथमिक विद्यालय खोला जाएगा। ग्रामीणों ने सचिव महोदय को ग्राम की समस्याओं और राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति से अवगत कराया तथा ज्ञापन सौंपा। सचिव ने आश्वासन दिया कि जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। इस दौरान ग्रामीणों में हर्ष का माहौल था और मातृशक्ति को संस्कृत सीखने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके बाद सचिव दीपक कुमार ने श्री मां कामाख्या नर्मदेश्वर उत्तर मध्यमा संस्कृत विद्यालय कैलाश आश्रम सुवाकोट का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रधानाचार्य से बच्चों, स्टाफ और विद्यालय की समस्याओं की जानकारी ली। इस निरीक्षण में मुख्य शिक्षा अधिकारी हरक राम कोहली, सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा, बीडीओ मुनाकोट, बिन, तहसीलदार पिथौरागढ़ सहित ग्राम प्रधान और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सचिव ने बच्चों और स्टाफ के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है कि जनपद की सांस्कृतिक और शैक्षिक पहचान को मजबूत किया जाए।

सचिव दीपक कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों और महिलाओं को संस्कृत शिक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण समय दिया जाए, ताकि सभी वर्ग इसके लाभ से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की पहल से न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि जनपद की सांस्कृतिक विरासत भी सुदृढ़ होगी। अधिकारियों और ग्रामवासियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता हमेशा जनकल्याण और समाज के विकास पर केंद्रित रहेगी। इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों और ग्रामीणों ने सचिव महोदय के मार्गदर्शन और प्रयासों की सराहना की।

पूरा भ्रमण और समीक्षा बैठक इस बात का प्रमाण था कि सचिव दीपक कुमार न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन पर निगरानी रखते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों और शिक्षण संस्थानों की समस्याओं को सीधे जानने और सुधारने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका यह प्रयास ग्रामीण शिक्षा, संस्कृत प्रचार और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करता है। अधिकारियों और ग्रामीणों ने इस आयोजन को प्रेरणादायक बताते हुए बताया कि इससे आने वाले समय में जनपद की शैक्षिक और सांस्कृतिक स्थिति में सुधार होगा।

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