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मालधन की जनता एकजुट होकर स्वास्थ्य सुविधाओं और नशे के खिलाफ आंदोलन की गूंज उठी

महिलाओं की अगुवाई में शिक्षण संस्थान बैंक और बाजार बंद कर जनता ने दिखाया दमदार विरोध स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली और नशामुक्त समाज की पुकार।

रामनगर/मालधन। क्षेत्र में सोमवार 18 अगस्त को ‘नशा नहीं इलाज दो’ अभियान के तहत होने वाले बंद को लेकर माहौल गर्म होता जा रहा है और यहां की जनता ने इसे आंदोलन का रूप दे दिया है। सुबह से ही शिक्षण संस्थानों और बैंकों के साथ-साथ बाजार पूरी तरह से बंद रखने की तैयारी दिखाई दी है। दुकानदारों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, सभी इस आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आ रहे हैं। बंद को व्यापक समर्थन मिलने की वजह से मालधन में अब यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनता की ताकत और अधिकारों की आवाज बन चुका है। इस मुहिम को लेकर इलाके के नागरिक खासे उत्साहित दिखाई दे रहे हैं और उनका कहना है कि अब समय आ गया है जब स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ नशे के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। महिलाओं ने भी बंद को कामयाब बनाने के लिए कमर कस ली है और वे इसे जनांदोलन का रूप देने के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।

महिला एकता मंच की मालधन संयोजक विनीता टम्टा ने घोषणा की है कि सोमवार की सुबह सात बजे से ही महिलाएं बंद को सफल बनाने के लिए सड़क पर उतरेंगी। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल एक विरोध नहीं बल्कि समाज की जरूरत और आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी बदलाव की पुकार है। विनीता टम्टा ने बताया कि सुबह से लेकर शाम तक महिलाएं लोगों को जागरूक करेंगी और 10 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुलूस निकाला जाएगा। इस जुलूस का उद्देश्य मानकों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करवाना और साथ ही नशे की जड़ें उखाड़ फेंकना होगा। महिलाओं की इस एकजुटता ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है और लोगों में भरोसा जगा है कि सामूहिक ताकत से ही समस्याओं का समाधान निकलेगा। उनके अनुसार यह अभियान मालधन क्षेत्र के हर घर और हर परिवार की आवाज बन चुका है।

सरस्वती जोशी ने आंदोलन को मजबूती देते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने मालधन की जनता के साथ अन्याय किया है। उनके अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं को बंद कर देना या कमजोर करना मालधन की चालीस हजार आबादी के जीवन पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि संविधान ने हर नागरिक को स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिकार दिया है और जब इस अधिकार को छीना जा रहा है तो यह कुठाराघात बर्दाश्त करना नामुमकिन है। सरस्वती जोशी ने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं का मसला नहीं बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। उनका कहना था कि सरकार को जनता की पीड़ा समझनी चाहिए और क्षेत्र के लोगों की जीवन रेखा बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उसकी पूरी क्षमता के साथ चलाना चाहिए। उन्होंने इस आंदोलन को जनता की सामूहिक शक्ति बताते हुए सभी से एकजुट रहने की अपील भी की।

जन संपर्क अभियान के दौरान ममता ने नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करते हुए साफ कहा कि मालधन की जनता को स्वास्थ्य केंद्र से प्रसव, ऑपरेशन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और बच्चों के डॉक्टर की सुविधा तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि यह सुविधाएं नहीं मिलतीं तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। ममता ने लोगों से यह भी अपील की कि अगर वास्तव में चाहते हैं कि डॉक्टर प्रशांत कौशिक और डॉक्टर अर्चना का तबादला रद्द हो और यहां स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह काम करे, तो हर नागरिक को मालधन बंद का सहयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि जनता की ताकत से बड़ा कोई शासन नहीं और जब जनता एकजुट होकर अपनी आवाज उठाती है तो उसे अनदेखा करना नामुमकिन हो जाता है।

इस अभियान की खास बात यह रही कि महिलाओं की बड़ी संख्या इसमें सक्रिय रूप से शामिल हुई। रजनी, ममता, पुष्पा, रेखा, विनीता, सरला, सोनी, कौशल्या, भगवती और सरिता जैसी महिलाएं लगातार जन संपर्क कार्यक्रमों में मौजूद रहीं। इनकी मौजूदगी ने न केवल अभियान को मजबूती दी बल्कि यह भी दिखाया कि समाज की आधी आबादी जब किसी मुद्दे पर डट जाती है तो बदलाव अवश्य होता है। महिलाओं ने नुक्कड़ सभाओं और बैठकों में साफ कहा कि अब समय आ गया है जब स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली और नशे के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ी जाए। उनकी यह एकजुटता इलाके के हर परिवार में जोश भर रही है और आंदोलन को नई ऊर्जा मिल रही है।

मालधन में होने वाला यह बंद अब केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक बन चुका है। जनता का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल करना और नशे के खिलाफ कदम उठाना उनकी प्राथमिक जरूरत है और इसके लिए चाहे जितना संघर्ष करना पड़े, पीछे नहीं हटेंगे। बाजार, बैंक, शिक्षण संस्थान और अन्य संस्थाओं का बंद रहना इस बात का संकेत है कि यह आंदोलन अब पूरे क्षेत्र का आंदोलन बन गया है। लोगों का विश्वास है कि सामूहिक प्रयास और जनशक्ति से ही सरकार को झुकने पर मजबूर किया जा सकता है और मालधन की जनता अपने अधिकार वापस लेने में सफल होगी। इस प्रकार सोमवार का दिन मालधन की जनता की ताकत और उनकी एकजुटता का सजीव उदाहरण बनने जा रहा है।

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