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तेज रफ्तार बस ने छीनी दो शिक्षकों की जान रामनगर में बरपा मातम

रामनगर। बरसात का मौसम हमेशा से पहाड़ी इलाकों में चुनौतियों के साथ आता है, लेकिन सोमवार की सुबह नैनीताल जिले के रामनगर से करीब 22 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-309 पर जो हुआ, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। धनगढ़ी नाले के पास लगातार हो रही बारिश के कारण बरसाती पानी का बहाव तेज और स्तर ऊंचा हो गया था। इसके चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई थीं। लोग धैर्यपूर्वक खड़े थे, आंखों में इस उम्मीद के साथ कि पानी का बहाव थोड़ी देर में कम होगा और उनका सफर आगे बढ़ सकेगा। इन्हीं में छह लोग भी सड़क किनारे खड़े थे, जो अपने-अपने गंतव्य की ओर निकलने का मौका तलाश रहे थे। लेकिन अचानक पीछे से तेज रफ्तार में आती एक बस ने नियंत्रण खो दिया और पलक झपकते ही वहां खड़े लोगों को रौंद डाला। टक्कर इतनी भयानक थी कि दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि चार गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर तड़पने लगे। चंद सेकंड में खुशियों से भरी सुबह मातम में बदल गई और वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल में दहशत और सन्नाटा पसर गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने या भागने का मौका ही नहीं मिला। लोगों के मुताबिक, बस के अचानक ब्रेक फेल हो जाने से यह दर्दनाक घटना हुई, हालांकि पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएगा। जैसे ही चीख-पुकार गूंजी, आसपास खड़े लोग और वाहन चालक घायलों को बचाने के लिए दौड़ पड़े। इस अफरा-तफरी के बीच स्थानीय लोग और प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं और घायलों को तत्काल रामनगर संयुक्त चिकित्सालय भेजा गया। पुलिस ने बस को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह हादसा न केवल सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बरसात के मौसम में इस मार्ग पर खतरा हमेशा मंडराता रहता है और समय रहते उचित कदम न उठाने के गंभीर नतीजे कितने भयावह हो सकते हैं।

इस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले दोनों व्यक्ति शिक्षक थे, जो शिक्षा को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानकर प्रतिदिन बच्चों तक ज्ञान पहुंचाने के लिए सफर तय करते थे। मृतकों में 53 वर्षीय सुरेंद्र सिंह पंवार, पुत्र बिशन सिंह पंवार, निवासी गंगोत्री विहार कनियां, रामनगर शामिल हैं। वे हरणा में अध्यापक के पद पर कार्यरत थे और रोजाना इस मार्ग से गुजरते थे। दूसरे मृतक 42 वर्षीय वीरेंद्र शर्मा, पुत्र देवीदत्त शर्मा, निवासी मानिला विहार चोरपानी, रामनगर थे, जो हरणा में शिक्षक के रूप में तैनात थे। सोमवार की सुबह भी वे अपने घर से हरणा सल्ट पढ़ाने के लिए निकले थे, लेकिन नियति ने उन्हें मंजिल तक पहुंचने का अवसर नहीं दिया। इस घटना ने दोनों परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है और पूरे शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

घायलों की सूची भी इस हादसे की भयावहता बयान करती है। चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से तीन शिक्षक हैं। ललित पांडे, जो मोहान स्थित इंडियन मेडिसिन फार्मास्यूटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) में कार्यरत हैं, इस दुर्घटना में घायल हो गए। अन्य घायलों में सत्य प्रकाश, निवासी जसपुर, दीपक शाह, निवासी मालधन, और सुनील राज शामिल हैं। ये सभी शिक्षक पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा क्षेत्र में पढ़ाने के लिए जा रहे थे। हादसे के बाद स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से घायलों को तुरंत रामनगर संयुक्त चिकित्सालय लाया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि सभी घायलों की हालत गंभीर है और उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। उनके उपचार के लिए पूरी मेडिकल टीम जुटी हुई है और किसी भी तरह की लापरवाही से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

इस घटना की खबर जैसे ही आसपास के गांवों और कस्बों में फैली, मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन किसी तरह अपने आंसू थामने की कोशिश करते, लेकिन अपार दुख के आगे कोई भी शब्द बेअसर साबित हो रहा था। पड़ोसी, रिश्तेदार और परिचित बड़ी संख्या में शोक व्यक्त करने के लिए घरों पर पहुंचने लगे। इस दर्दनाक दृश्य ने हर उस व्यक्ति को विचलित कर दिया जो किसी शिक्षक या आम इंसान की मेहनत और संघर्ष की कद्र करता है। वहीं, स्थानीय लोगों में भी इस घटना के बाद भारी गुस्सा और नाराजगी है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में धनगढ़ी नाले का जलस्तर बढ़ने की समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। लोगों ने मांग की है कि इस नाले पर स्थायी पुल या सुरक्षित मार्ग का निर्माण कराया जाए, जिससे भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला तत्काल सक्रिय हो गया और राहत-बचाव कार्य में जुट गया। मौके पर पहुंची तहसील प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल भिजवाया, जहां चिकित्सकों ने गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों को हायर सेंटर रेफर कर दिया। इस हृदयविदारक घटना में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक और स्तब्धता का माहौल है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना अचानक हुआ कि यात्रियों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। प्रारंभिक जांच में बस के ब्रेक फेल होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वास्तविक कारण विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा। तहसीलदार रामनगर मनीषा मारखान ने बताया कि प्रशासन पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि प्राकृतिक आपदाओं और तकनीकी खामियों से बचने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है। बारिश और तेज बहाव वाले इलाकों में ट्रैफिक को नियंत्रित करने, वाहनों की तकनीकी जांच सुनिश्चित करने और वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। प्रशासन और जनता दोनों को मिलकर ऐसे कदम उठाने होंगे, जिससे किसी की जान यूं सड़क पर न जाए और न ही किसी परिवार को अपनों को इस तरह खोने का दर्द सहना पड़े। सोमवार का यह काला दिन हमेशा याद दिलाएगा कि लापरवाही और इंतजामों की कमी किस तरह जिंदगी को एक पल में खत्म कर सकती है।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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