काशीपुर।त्यौहारों की रौनक से सजे प्रदेश के बाजारों में इस समय एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है, क्योंकि रक्षाबंधन के पावन अवसर से एक दिन पहले बहनों की खुशियों और तैयारियों ने हर गली, हर चौक को जीवंत कर दिया है। ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में राखियों से सजे बाजारों की चकाचौंध देखते ही बन रही है। रंग-बिरंगी रोशनियों में नहाए दुकानों के बाहर बहनों का उत्साह और भी बढ़ जाता है। दोपहर से लेकर देर शाम तक महिलाओं और युवतियों का मेला-सा जुटना इस बात का सबूत है कि भाई-बहन के इस अटूट रिश्ते के लिए लोग किसी भी मौसम या परिस्थिति की परवाह नहीं करते। इस मौके पर परंपरागत से लेकर आधुनिक डिजाइनों वाली देशी राखियां खासतौर पर महिलाओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, जिनकी मांग इतनी बढ़ गई है कि कई दुकानदारों को अतिरिक्त स्टॉक मंगवाना पड़ा है।
काशीपुर की गलियों में इस समय मिठाइयों की महक और राखियों की चमक का संगम, रक्षाबंधन की तैयारी को और भी खास बना रहा है। दुकानों पर ऐसी राखियों का संग्रह है जिनमें न केवल सुंदरता है बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव भी छिपा है। बहनों के लिए यह पर्व केवल राखी बांधने का नहीं बल्कि अपने भाई के प्रति प्रेम, स्नेह और आशीर्वाद प्रकट करने का अवसर होता है। इस दिन का इंतजार पूरे वर्ष भर रहता है और भाई चाहे देश के किसी भी कोने में हों, इस दिन बहन के पास पहुंचकर उस पवित्र रिश्ते को निभाने का प्रयास करते हैं। मिठाई की दुकानों पर भी भीड़ का आलम कुछ ऐसा है कि लोगों को अपनी पसंदीदा मिठाई लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। खासकर बंगाली मिठाई और देशी स्वाद वाली मिठाइयों की मांग इस बार सबसे अधिक देखी जा रही है, जो रक्षाबंधन के स्वाद को और भी मीठा बना रही हैं।
बीते कुछ वर्षों में राखियों का स्वरूप और डिज़ाइन समय के साथ काफी बदल चुका है। काशीपुर में इस बार भीड़ के बीच जिन राखियों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, उनमें रुद्राक्ष वाली राखी, बेनटेन राखी, म्यूजिक वाली राखी, नग वाली राखी, क्रिस्टल राखी, चंदन राखी, लेडी जूड़ा, मोली कलावा जैसी आकर्षक राखियां शामिल हैं। ये न केवल अपने डिज़ाइन के कारण पसंद की जा रही हैं बल्कि इनमें छिपी आध्यात्मिकता और परंपरा भी लोगों को अपनी ओर खींच रही है। छोटे बच्चों के बीच मोटू पतलू, शिनचेन और छोटा भीम जैसी कार्टून राखियां खासा लोकप्रिय हो रही हैं, जिन्हें देखकर उनके चेहरे खिल उठते हैं। पिछले तीन-चार दिनों से हो रही लगातार बारिश के बावजूद बहनों का उत्साह कम नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने दिनभर जमकर खरीदारी की और अपनी पसंदीदा राखियों को घर ले जाने में देर नहीं की।
त्यौहार की तैयारियों में मिठाइयों का महत्व भी किसी से कम नहीं है। इस अवसर पर काशीपुर की मिठाई की दुकानों में ग्राहकों की भीड़ दिनभर बनी रही। दुकानदारों ने अपने काउंटर पर विविध प्रकार की मिठाइयां सजाकर रखी थीं, ताकि ग्राहकों को पसंद की मिठाई आसानी से मिल सके। रसगुल्ला, गुलाब जामुन, बर्फी से लेकर खास बंगाली मिठाइयों तक, हर मिठाई का अपना अलग ही आकर्षण है। मिठाई विक्रेताओं के मुताबिक, रक्षाबंधन पर मिठाइयों की बिक्री साल के बाकी दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है और इस बार भी वही नजारा देखने को मिला। वहीं, कई बहनों ने पहले से ही अपने दूर रहने वाले भाइयों को डाक या कूरियर के जरिए राखियां भेज दी थीं, जिससे वे समय पर पहुंच सकें और भाई-बहन का यह अटूट बंधन दूरी के बावजूद भी कायम रहे।
रक्षाबंधन केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का ऐसा जीवंत प्रतीक है जो रिश्तों में विश्वास, त्याग और अपनापन भर देता है। काशीपुर और ऊधम सिंह नगर के बाजारों में उमड़ी भीड़ यह साबित करती है कि बदलते दौर और भागदौड़ भरी जिंदगी के बावजूद भावनाओं की गहराई आज भी पहले जैसी है। यहां तक कि मौसम की बेरुखी भी लोगों की तैयारियों को रोक नहीं पाई। चाहे बारिश हो या धूप, बहनों का अपने भाई के लिए राखी खरीदने का उत्साह और भाइयों का अपनी बहन के पास पहुंचने का संकल्प इस रिश्ते को और भी मजबूत बनाता है। यही कारण है कि रक्षाबंधन हर साल केवल एक पर्व के रूप में नहीं, बल्कि परिवार और संबंधों को जोड़ने वाले एक महापर्व के रूप में मनाया जाता है, जो हर दिल में स्नेह की अमर कहानी लिख जाता है।



