रामनगर। एक ओर क्षेत्र पंचायत सदस्य पूरे घटनाक्रम से किनारा करते हुए भूमिगत दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मालधन चौड़ की नवनिर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य बसंती आर्य ने अपने कर्तव्य बोध और जनसेवा की मिसाल पेश कर दी। सोमवार को तड़के सुबह से ही जलभराव की विकराल समस्या से जूझ रहे नागरिकों की पीड़ा सुनते हुए बसंती आर्य पूरे दिन मैदान में डटी रहीं। वह सुबह पांच बजे से लेकर देर शाम छह बजे तक लगातार जनता के साथ रहकर समस्या का समाधान कराने में जुटी रहीं। जनप्रतिनिधि होने की जिम्मेदारी को उन्होंने न केवल स्वीकारा बल्कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन इस अंदाज में किया कि आज पूरे क्षेत्र में उनके कार्यशैली की सराहना हो रही है। बसंती आर्य ने एक नहीं, अनेक स्तरों पर समन्वय स्थापित कर जलनिकासी कार्य को अंजाम तक पहुँचाया और हर उस नागरिक को राहत दी, जिनके घरों में पानी भरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था।
क्षेत्र में भारी बारिश के कारण जलभराव की समस्या विकराल रूप ले चुकी थी। स्थानीय घरों में घुटनों तक पानी भर गया था, जिससे लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। बसंती आर्य ने इस गंभीर स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि तुरंत सक्रियता दिखाते हुए मोटर पंप के माध्यम से पानी निकासी का कार्य शुरू कराया। इस बीच उन्होंने पटवारी को भी मौके पर बुलवाया, जिन्होंने स्थलीय निरीक्षण कर तत्काल प्रभाव से रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को प्रेषित की। यह कदम न केवल प्रशासन को जागरूक करने का प्रयास था, बल्कि यह सुनिश्चित करने का भी एक उपाय था कि आने वाले समय में ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए योजनात्मक कार्यवाही हो। साथ ही, बसंती आर्य ने पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता और जेई को भी मौके पर बुलाकर समस्या की गंभीरता से अवगत कराया। दोनों अधिकारियों ने मौके पर पहुंचते ही जेसीबी मंगाई और नालियों की पूरी सफाई करवाई, जिससे जलनिकासी प्रक्रिया और अधिक तीव्र हो सकी।
दिनभर चले इस राहत अभियान में बसंती आर्य अकेली नहीं थीं, बल्कि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कई स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। महेन्द्र आर्य, ग्रामप्रधान पति गोविंद प्रसाद, मनमोहक उर्फ दीपू, गुरदीप उर्फ दीपू, पत्रकार सलीम अहमद, हिम्मत राम, चरणजीत और राजेन्द्र कुमार जैसे जिम्मेदार नागरिक भी इस दौरान उपस्थित रहे और पूरी सक्रियता से काम में जुटे रहे। इन सभी ने न केवल पानी निकालने में सहयोग दिया, बल्कि प्रत्येक प्रभावित घर तक जाकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद भी किया। यह एक प्रकार की समवेत जनभागीदारी थी, जिसमें न कोई पद का अहंकार था और न कोई प्रचार की मंशा, सिर्फ एक ही लक्ष्य थाकृसमस्या का तुरंत समाधान और आमजन को राहत। इस अभियान की सबसे बड़ी बात यह रही कि यह कोई प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि जनता के साथ आत्मीयता से जुड़ी एक जनप्रतिनिधि की संवेदनशीलता का प्रमाण था।
जहां अन्य पंचायत क्षेत्रों में जनता अपने प्रतिनिधियों को खोजती फिर रही थी, वहीं मालधन चौड़ की जनता को अपने जनप्रतिनिधियों का साथ प्रत्यक्ष रूप से मिला। बसंती आर्य का यह कदम न केवल उनके राजनीतिक जीवन में एक प्रभावशाली शुरुआत है, बल्कि यह क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक प्रेरणा है। जनप्रतिनिधित्व केवल पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि जनता के लिए हर परिस्थिति में तत्पर रहने का दायित्व हैकृइस मूल सिद्धांत को बसंती आर्य ने अपने आचरण से सिद्ध कर दिखाया है। यह वह समय था जब क्षेत्र की समस्याएं किसी फ़ाइल या रिपोर्ट तक सीमित नहीं थीं, बल्कि वास्तविक धरातल पर उनकी भयावहता दिखाई दे रही थी। और इसी धरातल पर उतरकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वह जनता की सच्ची प्रतिनिधि हैं, जिनकी प्राथमिकता सिर्फ सेवा है, न कि प्रचार।
आज मालधन चौड़ में जिन लोगों के घरों से शाम छह बजे तक जलभराव पूरी तरह समाप्त हो गया, उनके चेहरों पर राहत के भाव साफ नजर आ रहे हैं। बसंती आर्य और उनकी टीम के इस अथक प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से कितनी बड़ी समस्या का समाधान दिनभर में संभव हो सकता है। आने वाले समय में यदि इसी प्रकार की तत्परता अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी दिखाएं, तो आमजन को कभी भी प्रशासनिक उपेक्षा की मार नहीं झेलनी पड़ेगी। मालधन चौड़ में आज जो हुआ, वह केवल एक राहत कार्य नहीं, बल्कि लोकतंत्र की उस जीवंतता का परिचायक है जहाँ जनता और प्रतिनिधि एक साथ खड़े होकर समस्याओं का हल निकालते हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य बसंती आर्य ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि होने का अर्थ केवल चुनाव जीतना नहीं है, बल्कि जनता के हर सुख-दुख में साथ खड़ा होना ही असली प्रतिनिधित्व है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें जानकारी मिली कि मालधन चौड़ के कई मोहल्लों में भारी जलभराव हो गया है और लोगों के घरों में पानी घुस चुका है, तो उन्होंने एक पल की भी देर किए बिना तुरंत मौके पर पहुंचने का निर्णय लिया। बसंती आर्य ने कहा कि सुबह 5 बजे से ही वह अपनी पूरी टीम के साथ मैदान में डटी रहीं और हर संभव संसाधन जुटाकर जलनिकासी का काम शुरू करवाया। उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को बुलाया गया, मोटर पंप लगाए गए और जेसीबी मंगाकर नालियों की सफाई कराई गई। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अंतिम घर से पानी नहीं निकल गया, तब तक वह खुद मौके पर मौजूद रहीं। बसंती आर्य ने जनता को आश्वासन दिया कि भविष्य में भी किसी भी आपदा या समस्या में वह सबसे पहले उनके बीच होंगी और हर जरूरत में साथ निभाएंगी।



