काशीपुर। आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रही काशीपुर की जनता के लिए अब राहत की उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है। शहर के विभिन्न मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर लगातार बढ़ रही कुत्तों की संख्या ने न केवल भय का माहौल बना रखा है, बल्कि हर दिन किसी न किसी व्यक्ति को अस्पताल पहुंचा रही है। कुत्तों का झुंड बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को निशाना बनाकर दिनदहाड़े हमले कर रहा है। यह कोई एक मोहल्ले या गली तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी काशीपुर नगरी इस संकट से त्रस्त है। राजकीय एल्डर चिकित्सालय में दर्ज हो रहे आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं। प्रतिदिन 25 से 30 लोग इस जानलेवा खतरे का शिकार बन रहे हैं और जून तथा जुलाई माह के दौरान दर्ज हुए क्रमशः 438 और 609 मामले इस स्थिति की भयावहता को बयां करते हैं। कभी-कभी समय पर इलाज नहीं मिलने की स्थिति में ये हमले जानलेवा भी साबित हो रहे हैं।
इस खतरे के समाधान की दिशा में काशीपुर के नागरिकों को अब जिस सुविधा का बेसब्री से इंतजार है, वह है — एबीसी सेंटर। आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए यह सेंटर शहर के लिए एक वरदान से कम नहीं माना जा रहा। वर्षों से इसकी मांग की जाती रही, बैठकों में प्रस्ताव लाए गए, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार शासन-प्रशासन से इस दिशा में ठोस कार्यवाही की गुहार लगाई। लेकिन, वास्तविकता यह रही कि योजना कागज़ों में ही उलझती रही और शहर के नागरिकों को लगातार इस समस्या का दंश झेलना पड़ा। अब जाकर उम्मीद जगी है कि यह लंबे समय का वनवास समाप्त होने को है और काशीपुर के नागरिकों को राहत की सांस लेने का अवसर मिलने वाला है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह एबीसी सेंटर जल्द ही पूर्ण संचालन में आ जाएगा और सड़कों पर आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी जैसी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
राजकीय एल्डर चिकित्सालय के डॉक्टरों का मानना है कि यदि इस सेंटर की शुरुआत समय पर हो जाती, तो दर्जनों लोगों की जान बच सकती थी। पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में कुत्तों के हमले से पीड़ित लोगों को या तो देर से उपचार मिला या फिर पर्याप्त सुविधा न होने के कारण हालात गंभीर हो गए। यही कारण है कि अब जनता में एबीसी सेंटर को लेकर आशा का भाव प्रबल हो गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस केंद्र के सक्रिय हो जाने से न केवल कुत्तों की अनियंत्रित संख्या पर लगाम लगेगी, बल्कि जानमाल की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। साथ ही, स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्ग नागरिकों और सुबह-संध्या टहलने वालों के मन से यह निरंतर भय समाप्त हो सकेगा।
कई नगर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में प्रयास किया, लेकिन अब जाकर वह सपना साकार होता दिख रहा है। वर्षों तक फाइलों में लटकी योजनाएं और जन सुनवाइयों में की गई घोषणाएं अब ज़मीनी हकीकत बनने जा रही हैं। यह आशा जताई जा रही है कि आने वाले कुछ ही दिनों में एबीसी सेंटर का विधिवत उद्घाटन कर दिया जाएगा और इसके सभी विभाग पूरी क्षमता के साथ कार्य प्रारंभ करेंगे। नगर के लिए यह विकास केवल एक सुविधा की शुरुआत नहीं, बल्कि सुरक्षा की गारंटी के रूप में देखा जा रहा है। वर्षों से जिस समाधान के लिए जनता ने धैर्य रखा, अब उसका फल उन्हें मिलने जा रहा है।
कुल मिलाकर अब वह समय दूर नहीं जब काशीपुर की जनता सड़कों पर बिना किसी डर के निकल सकेगी। यह एबीसी सेंटर केवल एक चिकित्सा या नियंत्रण इकाई नहीं, बल्कि भयमुक्त शहर की ओर पहला ठोस कदम है। यह कदम जहां प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है, वहीं यह भी साबित करता है कि यदि जन प्रतिनिधि ठान लें तो कोई भी समाधान दूर नहीं होता। काशीपुर की जनता अब इंतजार कर रही है उस पल का जब एबीसी सेंटर की शुरुआत के साथ आवारा कुत्तों का यह आतंक हमेशा के लिए समाप्त हो सके और शहर एक बार फिर सुकून की ओर बढ़ सके।
वार्ड 17 के पार्षद पुष्कर सिंह बिष्ट ने बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि काशीपुर की जनता बीते कई वर्षों से आवारा कुत्तों की समस्या से परेशान है, और यह केवल एक सामान्य समस्या नहीं बल्कि गंभीर जनस्वास्थ्य और जनसुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। उन्होंने बताया कि आए दिन उनके वार्ड में नागरिक शिकायत लेकर पहुंचते हैं कि कैसे सड़क पर निकलते समय लोगों को कुत्तों का डर सताता है, बच्चों को स्कूल भेजते समय अभिभावक चिंतित रहते हैं, और बुजुर्गों का निकलना दूभर हो गया है। पुष्कर सिंह बिष्ट ने यह भी कहा कि जब वह पार्षद बने थे, तभी से उन्होंने इस गंभीर विषय को प्राथमिकता में रखा और नगर निगम से लेकर जिले के आला अधिकारियों तक इस मुद्दे को कई बार रखा। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि अब जब एबीसी सेंटर जल्द शुरू होने वाला है, तो यह केंद्र वार्ड 17 समेत पूरे काशीपुर के लिए राहत का बड़ा जरिया साबित होगा। पार्षद ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि प्रशासनिक प्रयास तभी सफल होंगे जब जनता जागरूकता और सहभागिता के साथ साथ चलेगी।
वार्ड 20 के पार्षद राशिद फारूक़ी ने इस दौरान अपने विचार रखते हुए कहा कि काशीपुर में आवारा कुत्तों की समस्या केवल एक वार्ड की नहीं बल्कि पूरे शहर की विकराल चुनौती बन चुकी है, और यह स्थिति अब असहनीय होती जा रही है। उन्होंने बताया कि उनके वार्ड में प्रतिदिन कई नागरिक शिकायत लेकर आते हैं कि सुबह टहलने निकले लोग, स्कूल जा रहे बच्चे या दफ्तर जाने वाले कर्मचारी रास्ते में कुत्तों के झुंड द्वारा घेर लिए जाते हैं, जिससे लोग मानसिक रूप से भी परेशान हो चुके हैं। राशिद फारूक़ी ने इस बात पर जोर दिया कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह जनजीवन के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं इस विषय को कई बार नगर निगम की बैठकों में उठाया और लगातार अधिकारियों से संपर्क में भी रहे। अब जब एबीसी सेंटर के शुरू होने की खबर आ रही है, तो उन्होंने इसे नगरवासियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। फारूक़ी ने आशा जताई कि एबीसी सेंटर की सक्रियता से जल्द ही कुत्तों के आतंक से राहत मिलेगी और शहर एक बार फिर सुरक्षित अनुभव करेगा।
पार्षद राशिद फारूक़ी ने पशु जन्म नियंत्रण केंद्र (एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) की अनुपस्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि काशीपुर जैसे विकसित होते नगर में आज तक एक पूर्ण रूप से संचालित एबीसी सेंटर का न होना प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नगर के हर वार्ड से आवारा कुत्तों के हमलों की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन इन कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था आज तक नहीं बन पाई है। उन्होंने इस बात पर खास ज़ोर दिया कि यदि नगर में वर्षों पहले ही एबीसी सेंटर को सक्रिय कर दिया गया होता, तो आज हालात इतने भयावह न होते। राशिद फारूक़ी ने बताया कि अकेले वार्ड 20 में पिछले कुछ महीनों में दर्जनों लोग कुत्तों के हमले का शिकार हुए हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा हैं, जो हर दिन इस संकट से गुजरते हैं। उन्होंने मांग की कि एबीसी सेंटर का निर्माण और संचालन अब और विलंबित न किया जाए और इसे शीघ्र प्रभाव से शुरू किया जाए ताकि आवारा कुत्तों की बेतहाशा बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाया जा सके। राशिद फारूक़ी ने यह भी कहा कि जब तक एबीसी सेंटर की स्थापना नहीं होती, तब तक यह समस्या और गंभीर होती जाएगी और किसी बड़े हादसे का इंतजार करना प्रशासन की संवेदनहीनता होगी।



