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काशीपुर में केडीएफ मंच पर चमकी प्रतिभा, 160 होनहारों को मिला गौरव सम्मान

काशीपुर। गन्ना संस्थान ऑडिटोरियम रविवार को एक प्रेरणादायक दृश्य का गवाह बना, जब काशीपुर डेवलेपमेंट फोरम (केडीएफ) द्वारा आयोजित केडीएफ शिक्षा गौरव अवार्ड समारोह में क्षेत्र के होनहार विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस गरिमामय आयोजन में कुल 27 स्कूलों के करीब 160 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति से समां बांधा। इन विद्यार्थियों ने कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओंकृचाहे वह सीबीएसई हो, उत्तराखंड बोर्ड या फिर आईसीएसईकृमें प्रथम या द्वितीय स्थान प्राप्त कर अपने स्कूलों और काशीपुर का गौरव बढ़ाया। समारोह के दौरान हर चेहरे पर सफलता की चमक और भविष्य की उम्मीदें साफ झलक रही थीं। छात्रों की उपलब्धियों को मंच से जिस गरिमा और गर्मजोशी के साथ सराहा गया, उसने न केवल उन्हें प्रेरित किया बल्कि उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों को भी गर्व से भर दिया।

आयोजन में केवल अकादमिक क्षेत्र में श्रेष्ठता हासिल करने वाले विद्यार्थियों को ही नहीं, बल्कि उन छात्रों को भी विशेष सम्मान दिया गया, जिन्होंने खेलकूद के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर काशीपुर को विशेष पहचान दिलाई। केडीएफ की इस पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र व्यक्तित्व विकास का माध्यम है। मंच पर जब छात्रों को ट्रॉफी और प्रशस्तिपत्र भेंट किए गए, तब तालियों की गड़गड़ाहट ने पूरे ऑडिटोरियम को जीवंत कर दिया। खेल में अव्वल छात्रों का नाम लेते ही दर्शकों ने पूरे उत्साह के साथ उनका अभिनंदन किया। इन विजेताओं ने विभिन्न खेल विधाओं में उत्तराखंड और भारत का प्रतिनिधित्व किया है, और इनकी उपलब्धियों ने साबित किया कि काशीपुर की मिट्टी प्रतिभाओं से भरपूर है।

इस समारोह की शोभा मुख्य अतिथियों की उपस्थिति ने और बढ़ा दी, जिनमें विधायक त्रिलोक सिंह चीमा और उर्वशी दत्त बाली प्रमुख रूप से मौजूद रहे। दोनों ने मंच से विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें देश का भविष्य बताया। विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने समारोह के दौरान अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं को न केवल सार्वजनिक मंच पर सम्मान मिलने का अवसर मिलता है, बल्कि इससे उनमें आगे और बेहतर करने की प्रेरणा भी उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि जब छात्रों की मेहनत और उपलब्धियों को इस प्रकार सराहा जाता है, तो यह उनके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है। काशीपुर डेवलेपमेंट फोरम की इस पहल को उन्होंने एक उत्कृष्ट सामाजिक प्रयास करार देते हुए कहा कि यह आयोजन शिक्षा के महत्व को समाज के सामने उजागर करने वाला एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने आगे कहा कि युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण की रीढ़ होती है, और इस तरह की पहलें उन्हें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने केडीएफ को इसके लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।

वहीं उर्वशी दत्त बाली ने समारोह के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका दायरा समग्र विकास और व्यक्तित्व निर्माण तक फैला होता है। उन्होंने कहा कि आज के इस बदलते युग में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, आत्मानुशासन और सामाजिक चेतना से भी लैस होना चाहिए, ताकि वे भविष्य में समाज के लिए एक सशक्त और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से केवल पुरस्कार नहीं बांटे जाते, बल्कि यह मंच उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनता है जो अभी अपने लक्ष्य की दिशा में अग्रसर हैं। काशीपुर डेवलेपमेंट फोरम द्वारा की गई इस सकारात्मक पहल को उन्होंने अत्यंत प्रशंसनीय बताया और कहा कि जब समाज मिलकर प्रतिभाओं को सराहता है, तो वह वातावरण अपने आप में उत्साह, उम्मीद और ऊर्जा से भर जाता है। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे न केवल अच्छे विद्यार्थी बनें, बल्कि अच्छे इंसान बनने का भी प्रयत्न करें, क्योंकि यही सच्ची शिक्षा का उद्देश्य होता है।

मेधावी छात्र-छात्राओं ने मीडिया से अपने अनुभव साझा करते हुए भावुक और प्रेरणादायक बातें कहीं। बच्चों ने कहा कि काशीपुर डेवलेपमेंट फोरम (केडीएफ) द्वारा उन्हें जो सम्मान मिला है, वह सिर्फ एक ट्रॉफी या प्रशस्तिपत्र नहीं, बल्कि उनके पूरे शैक्षिक संघर्ष और परिश्रम को मिली एक सामाजिक मान्यता है। उनके अनुसार, यह पुरस्कार उनके लिए आने वाले भविष्य की तैयारी का एक मजबूत कदम है, जिसने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि मेहनत और लगन का फल अवश्य मिलता है। कई छात्रों ने कहा कि वे चाहते हैं कि उनके जैसे और भी छात्र-छात्राएं कड़ी मेहनत करें, ताकि उन्हें भी ऐसा मंच और सम्मान मिल सके। कक्षा 10वीं और 12वीं के इन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने बताया कि परीक्षा की तैयारी आसान नहीं होती, लेकिन सही मार्गदर्शन, नियमितता और आत्म-विश्वास से हर कठिनाई पार की जा सकती है। कुछ विद्यार्थियों ने कहा कि इस सम्मान ने उन्हें न केवल खुश किया है, बल्कि जीवन में और भी बड़े लक्ष्य तय करने की प्रेरणा दी है। खेलों में सम्मानित छात्रों ने बताया कि मैदान में संघर्ष के दौरान कई बार निराशा होती है, लेकिन जब समाज द्वारा ऐसे मंच पर प्रोत्साहन मिलता है तो हर थकान सार्थक लगती है। छात्रों ने यह भी कहा कि उन्हें यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि उनके माता-पिता और शिक्षक भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे और उन्हें मंच पर सम्मानित होते देख गर्व से अभिभूत हो रहे थे। अंत में विद्यार्थियों ने एक सुर में यह दोहराया कि वे इस प्रेरणा को साथ लेकर आगे की राह में और अधिक निष्ठा, लगन और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ेंगे ताकि आने वाले वर्षों में काशीपुर का नाम और रोशन कर सकें।

गौरवमयी इस अवसर पर गन्ना संस्थान का विशाल प्रेक्षागृह विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों तथा समाजसेवियों की उपस्थिति से खचाखच भरा रहा। मंच पर विद्यार्थियों को ट्रॉफी प्रदान करने के साथ-साथ, उनके नामों की घोषणा होते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठता रहा। खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को मंच पर आमंत्रित करते समय उनके विद्यालयों और उनके द्वारा प्राप्त अंकों या उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता का उदाहरण प्रस्तुत हुआ। इससे बच्चों के आत्मविश्वास को और अधिक बल मिला। कार्यक्रम का संचालन अत्यंत व्यवस्थित और उत्साहपूर्ण रहा, जिससे यह आयोजन मात्र एक सम्मान समारोह न रहकर प्रेरणा का सशक्त मंच बन गया।

काशीपुर डेवलेपमेंट फोरम द्वारा आयोजित इस समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि समाज के भीतर प्रतिभा को मंच और सम्मान दोनों मिले, तो वह नई ऊंचाइयों को छूने में सक्षम होती है। ऐसे आयोजनों से एक सकारात्मक सामाजिक संदेश भी प्रसारित होता है, जो केवल विद्यार्थियों तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र को जागरूक करता है। आयोजकों ने इस अवसर पर यह भी संकेत दिया कि भविष्य में भी इसी प्रकार की पहलें जारी रहेंगी, जिससे शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर नयी ऊर्जा का संचार हो। कुल मिलाकर, यह समारोह न केवल विद्यार्थियों के लिए सम्मान का क्षण था, बल्कि पूरे काशीपुर के लिए गर्व और प्रेरणा की मिसाल बन गया।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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