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पर्वतीय सभा लखनपुर में हरेला पर्व बना शिक्षा संस्कृति और हरियाली का भव्य संगम

लोकगीतों की गूंज, मेधावी छात्रों का सम्मान और वृक्षारोपण ने मिलकर रचा पर्वतीय परंपरा और पर्यावरणीय चेतना का जीवंत और प्रेरक उदाहरण

रामनगर। हरेला पर्व के शुभ अवसर पर पर्वतीय सभा लखनपुर रामनगर में आयोजित हुआ एक भव्य सांस्कृतिक और सम्मान समारोह, जिसने न केवल प्रकृति प्रेम को जागृत किया, बल्कि नई पीढ़ी को प्रेरणा और गौरव से भी जोड़ा। सभा के प्रांगण में हरेला उत्सव को पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया, जहां हर कोना संस्कृति और समर्पण की भावना से गूंजता दिखा। इस विशेष आयोजन की अध्यक्षता सभा अध्यक्ष ललित मोहन जोशी ने की और पूरे कार्यक्रम का प्रभावी संचालन महामंत्री जितेंद्र बिष्ट द्वारा किया गया। इस समारोह को विशेष गरिमा उस समय मिली जब मुख्य अतिथि विधायक दीवान सिंह बिष्ट, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. गिरीश चंद्र पंत तथा एडवोकेट जगदीश मासीवाल मंच पर उपस्थित होकर पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन की विधि में शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक समृद्ध कर दिया।

सभा अध्यक्ष ललित मोहन जोशी ने कार्यक्रम के दौरान अपने विचार रखते हुए कहा कि हरेला पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारे दायित्व और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक बीज से विशाल वृक्ष पनपता है, उसी प्रकार समाज में छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि हम सभी को न केवल वृक्ष लगाने चाहिए, बल्कि उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। ललित मोहन जोशी ने मेधावी छात्रों को सम्मानित किए जाने पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यही युवा आने वाले समय में समाज और राष्ट्र की दिशा तय करेंगे। हरेला के बहाने हमें अपने मूल्यों और विरासत से जुड़ने का अवसर मिला है।

मुख्य अतिथि विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने समारोह के दौरान संबोधित करते हुए कहा कि हरेला पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा है, जो हमें न केवल प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा देता है, बल्कि सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी समस्याएं विकराल रूप ले रही हैं, ऐसे में इस प्रकार के पारंपरिक पर्वों का संरक्षण और आयोजन अत्यंत आवश्यक है। दीवान सिंह बिष्ट ने सभा द्वारा मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल युवाओं को प्रेरित करेगी और उन्हें शिक्षा के प्रति और अधिक समर्पित बनाएगी। उन्होंने पर्वतीय सभा लखनपुर को इस अद्भुत आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि यही वे संस्कार हैं जो उत्तराखंड की संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं।

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. गिरीश चंद्र पंत ने अपने संबोधन में कहा कि हरेला पर्व केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक चेतना, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब समाज शिक्षा, संस्कृति और प्रकृति के संरक्षण को एक साथ लेकर चलता है, तभी समग्र विकास संभव हो पाता है। डॉ. गिरीश चंद्र पंत ने मेधावी छात्रों को सम्मानित किए जाने को एक प्रेरणादायी कदम बताया और कहा कि इससे युवा वर्ग में शिक्षा के प्रति लगाव और उत्तरदायित्व की भावना और प्रबल होती है। उन्होंने पर्वतीय सभा द्वारा आयोजित इस प्रकार के आयोजनों को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला बताया और कहा कि हमें अपनी परंपराओं को जीवित रखने के लिए ऐसे प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध बनाएं और उसके संरक्षण में योगदान दें।

लोक संस्कृति की गूंज उस क्षण और तेज हो गई जब आयुष म्यूजिक एंड डांस एकेडमी के लोक कलाकारों ने मंच संभाला और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित गीतों और नृत्यों की प्रस्तुति दी। इन युवा कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद दर्शकों को भावविभोर कर दिया। गीतों में पहाड़ की मिट्टी की खुशबू और नृत्य में जनजातीय लोकजीवन की झलक ने समस्त सभा को सम्मोहित कर दिया। ये प्रस्तुतियां महज मनोरंजन नहीं थीं, बल्कि यह भी संदेश दे रही थीं कि सांस्कृतिक पहचान की जड़ें मजबूत करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इन लोक कलाकारों ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी परंपराओं को आत्मीयता से संजोया जा सकता है, अगर मंच और मार्गदर्शन सही मिले।

समारोह का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब आया जब पर्वतीय सभा लखनपुर की ओर से नगर क्षेत्र के हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। हाईस्कूल एवं इंटर बोर्ड परीक्षा में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को न केवल मेडल पहनाकर बल्कि मुख्य अतिथि दीवान सिंह बिष्ट, एडवोकेट जगदीश मासीवाल और प्रो. डॉ. गिरीश चंद्र पंत के कर-कमलों से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह ने यह साबित कर दिया कि पर्वतीय सभा न केवल संस्कृति की संरक्षक है, बल्कि शिक्षा और प्रतिभा को भी भरपूर महत्व देती है। मेधावी छात्रों के चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक और मंच पर अपनों द्वारा सम्मानित होने का गौरव भविष्य की नई ऊर्जा बनकर उभरा।

समारोह में मंच की शोभा बढ़ाने वाले अतिथियों में एडवोकेट बालम सिंह बिष्ट, बचे सिंह डंगवाल, नवीन तिवारी, जेपी लोहनी, हेमचंद पांडे, पंकज सत्यवाली, प्रभात ध्यानी, सभासद नवीन सुनेजा, सचिन कुमार, पूरन पांडे, प्रदीप पांडे, प्रकाश पांडे, रेनू जोशी, भावना भट्ट, एडवोकेट पी. एस. बोला, गौरव तिवारी, नवेंदु जोशी और कैलाश छिम्बावे जैसे समाजसेवी, शिक्षाविद् और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिनकी सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक भव्य जनउत्सव में परिवर्तित कर दिया। इन सभी गणमान्य जनों ने अपनी उपस्थिति से न केवल कार्यक्रम को गरिमामयी बनाया, बल्कि अपने विचारों और समर्थन से युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के मेल से ही समाज की सच्ची उन्नति संभव है।

समाप्ति के समय पूरे समारोह में एक अद्भुत ऊर्जा व्याप्त थी। यह केवल एक पर्व का आयोजन नहीं था, बल्कि यह सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक धरोहर और शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव था। ललित मोहन जोशी और जितेंद्र बिष्ट की सूझबूझ और संगठन क्षमता ने यह साबित कर दिया कि जब किसी उद्देश्य को लेकर समाज के बुद्धिजीवी और जनप्रतिनिधि एक मंच पर आते हैं, तो न केवल पर्व सार्थक बनता है, बल्कि उसका प्रभाव भी दूरगामी होता है। दीवान सिंह बिष्ट, गिरीश चंद्र पंत और जगदीश मासीवाल जैसे जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे केवल राजनीतिक चेहरे नहीं हैं, बल्कि सामाजिक चेतना के सशक्त संवाहक भी हैं। पर्वतीय सभा लखनपुर का यह आयोजन आने वाले वर्षों के लिए एक दिशा, एक दृष्टि और एक प्रेरणा बनकर समाज को हरियाली, शिक्षा और संस्कृति की त्रिवेणी से जोड़ने का कार्य करेगा।

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