काशीपुर। इन दिनों हजारों परिवारों की नींदें उड़ी हुई हैं। वजह है नगर निगम क्षेत्र व आस-पास के इलाकों में भवन, भूखंड और प्लॉट की रजिस्ट्री पर लगी वह रोक, जिसने आम जनजीवन को उलझन में डाल दिया है। सोमवार को इसी गूंज को मुखर करते हुए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व नागरिकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दो अलग-अलग ज्ञापन महापौर के माध्यम से भेजे गये। ज्ञापनों में जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर और विकास प्राधिकरण के उन आदेशों को पूरी तरह जनविरोधी करार दिया गया है, जिनकी वजह से लोग वैध दस्तावेज होने के बावजूद अपनी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं करवा पा रहे हैं। ज्ञापन में जनता की दशकों पुरानी परंपरागत प्रक्रिया को तोड़ने को अनुचित बताया गया है और आग्रह किया गया है कि इस अव्यवस्था को तुरंत समाप्त किया जाए, ताकि जीवन की सामान्य धारा बहाल हो सके और लोगों को मानसिक राहत मिल सके।
समाजसेवी अनील डाबर के नेतृत्व में आये स्थानीय नागरिकों ने महरापोर से कहा कि जिला स्तर पर जारी आदेशों ने न केवल नगर निगम की प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया है, बल्कि उन नागरिकों की विश्वसनीयता को भी संदेह के घेरे में डाल दिया है, जो वर्षों से काशीपुर नगर निगम की हाउस टैक्स रसीदों के आधार पर संपत्तियों का क्रय-विक्रय करते आए हैं। अनील डाबर ने महापोर दीपक बाली को बताया कि बैंकों से ऋण लेने और विभिन्न विभागों से मान्यता प्राप्त करने के लिए भी यही रसीदें प्रमाण मानी जाती रही हैं। अनील डाबर ने कहा कि नगर निगम एक ऐतिहासिक नगरीय इकाई है, जिसकी सीमाएं पूर्व से ही तय हैं और जिन पर दशकों से नगरवासी भरोसा करते आए हैं। लेकिन वर्तमान आदेशों ने स्थिति ऐसी बना दी है कि नागरिकों को अपनी ही संपत्तियों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जिससे जनता में आक्रोश भी पनप रहा है और अव्यवस्था की पीड़ा भी। उन्होने कहा कि इस प्रतिबंध ने स्थानीय लोगों को कानूनी जटिलताओं में फंसा दिया है, और अब उन्हें पुराने दस्तावेजों के बावजूद नया संघर्ष झेलना पड़ रहा है।
इस बीच दूसरा ज्ञापन एक अलग लेकिन जुड़े हुए कारण को उजागर करता है। इसमें बताया गया है कि रजिस्ट्री पर लगी इस रोक की जड़ वर्ष 2010 में बनाए गए एक अधूरे मास्टर प्लान में है, जिसे न तो कभी धरातल पर लागू किया गया और न ही समय के साथ अद्यतन किया गया। इस नीति के तहत प्रस्तावित नक्शा कभी जमीन पर उतरा ही नहीं, लेकिन प्राधिकरण द्वारा उसे ही आधार बनाकर लोगों की वैध रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई। उल्लेखनीय है कि 2017 में जब विकास प्राधिकरण अस्तित्व में आया, तब तक काशीपुर का बड़ा हिस्सा पहले ही बस चुका था। इसके बावजूद प्रशासन ने उस अधूरी योजना के आधार पर फैसला सुनाया, जिससे शहर का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। महापौर दीपक बाली, तत्कालीन सीडीसी, नगर निगम के अन्य प्रतिनिधियों द्वारा कई बार इस विषय को सरकार तक पहुंचाया गया, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
ज्ञापन में यह तथ्य भी सामने आया कि पूर्व में प्रशासन द्वारा यह भरोसा दिलाया गया था कि 31 मार्च 2024 से पहले जिन संपत्तियों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, उन्हें किसी भी तरह की रोक से मुक्त रखा जाएगा। लेकिन अब पुनः ऐसे क्षेत्रों पर भी रोक लगा दी गई है, जिससे हजारों नागरिकों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। क्षेत्रवासी यह प्रश्न उठा रहे हैं कि जब कोई नक्शा कभी लागू ही नहीं हुआ और उस पर आधारित कोई ठोस योजना नहीं बनी, तो उसकी बुनियाद पर नागरिकों को कैसे कठघरे में खड़ा किया जा सकता है? ज्ञापन में इस बात पर बल दिया गया है कि सरकार को चाहिए कि वह अधूरी नीतियों को लागू करने के बजाय जनता की व्यावहारिक जरूरतों और परंपरागत प्रणाली को वरीयता दे, जिससे समाज में विश्वास बना रहे और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता भी सुरक्षित रहे।
ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में अनिल डावर, कुर्बान अली, आशुतोष गुप्ता, अजमत अली, प्रमोद, महबूब अली सहित अनेक स्थानीय नागरिकों ने भागीदारी की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अगर सरकार ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया, तो जनाक्रोश और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। काशीपुर के नागरिकों ने मुख्यमंत्री से विनम्र अपील की है कि वह जनता की भावनाओं को समझते हुए और एक संवेदनशील प्रशासक की भूमिका निभाते हुए तुरंत हस्तक्षेप करें और उन आदेशों को निरस्त करवाएं, जो जनता की जड़ों पर चोट कर रहे हैं। इसके साथ ही लोगों ने यह भी आग्रह किया है कि मास्टर प्लान को लेकर पुनर्विचार किया जाए और 100 वर्ष पुराने इस शहर की बसावट व परंपरा के अनुरूप नई व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें नागरिकों के अधिकारों का सम्मान हो और प्रशासन की मंशा पर भी विश्वास कायम रह सके।
काशीपुर के नागरिकों की निगाहें अब सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर टिक गई हैं, जिन्हें एक संवेदनशील नेतृत्वकर्ता के रूप में जनता लंबे समय से देखती आई है। लोग आशा कर रहे हैं कि वह इस गंभीर मसले में शीघ्र हस्तक्षेप करेंगे और जनहित में ऐसा निर्णायक कदम उठाएंगे जो वर्षों से चली आ रही परंपराओं, नगर निगम की वैधता और आमजन की भावनाओं को पुनः सम्मान दिलाएगा। रजिस्ट्री पर लगी रोक ने जहां नागरिकों के कानूनी अधिकारों को बाधित किया है, वहीं काशीपुर के विकास के पहिए को भी थाम दिया है। अब जब पूरा शहर एक स्वर में पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग कर रहा है, तब जनता को यह उम्मीद है कि मुख्यमंत्री अपनी प्रशासनिक दृष्टि और संवेदनशील निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए जल्द ऐसा आदेश जारी करेंगे, जिससे हजारों लोगों को राहत मिले और काशीपुर दोबारा खुले दिल से प्रगति की दौड़ में आगे बढ़ सके।
अनिल डावर ने नगर निगम काशीपुर और काशीपुर देहात के नागरिकों की तरफ से बेहद गंभीर और जमीनी मुद्दा उठाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि काशीपुर कोई नया शहर नहीं है, बल्कि यह ऐतिहासिक नगर लगभग ढाई सौ वर्षों से आबाद है, जहां की संपत्तियों की रजिस्ट्री करीब डेढ़ सौ वर्षों से की जाती रही है। उन्होंने बताया कि अधिकांश लोगों के पास हाउस टैक्स की पुरानी रसीदें और वैध दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा हाल में लिए गए निर्णयों के कारण अब उन पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया रुक गई है, जिससे हज़ारों परिवारों को अपनी ही संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं मिल रहा। उन्होंने इस प्रतिबंध को जनविरोधी और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2010 का मास्टर प्लान अब निष्प्रभावी हो चुका है, और 13 वर्षों में इस दिशा में न तो कांग्रेस और न ही भाजपा सरकार ने कोई ठोस प्रगति की। 2017 में बने प्राधिकरण के बाद भी आज तक कोई अद्यतन नक्शा सामने नहीं आया, जबकि इस दौरान शहर का बड़ा हिस्सा विकसित हो चुका है और कई जगहों पर मीटर में वैध रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, कॉलोनियां बस चुकी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोगों ने वैध प्रक्रिया से जमीन खरीदी और रजिस्ट्री करवाई, तब अब उन पर रोक लगाने का औचित्य क्या है?
अनिल डावर ने मिडिया से बात करते हुये बडी बेबाकी से कहा कि जब नगर निगम की सीमा में आने वाली संपत्तियों पर दशकों से हाउस टैक्स जमा हो रहा है, तो अब उन पर रोक लगाना सरासर अन्याय है। उन्होंने जोर देकर यह भी कहा कि यदि सरकार नियम बनाना चाहती है तो 31 मार्च 2024 से पूर्व जिन खसरा नंबरों में कॉलोनियां कट चुकी हैं और रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, उन्हें तत्काल छूट प्रदान की जाए। भविष्य की कॉलोनियों को नियमों के तहत नियंत्रित किया जाए, लेकिन पुरानी बसावट पर नया चाबुक चलाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने चुभते हुए शब्दों में कहा, “सरकार पहले अपना मास्टर प्लान तो लाए, फिर प्रतिबंध लगाए। आप 40 फुट चौड़ी सड़क की बात करते हैं, पहले यह बताएं कि किस पार्षद का मकान 40 फुट चौड़ी सड़क पर है? यह पुराना शहर है, यहां की बसावट किसी प्लानिंग से नहीं, परंपरा और ज़रूरत से विकसित हुई है। ऐसे में अब पुरानी रजिस्ट्री को अवैध ठहराना हजारों परिवारों के साथ अन्याय है।”
अनिल डावर ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से यह मार्मिक अपील की कि वे व्यक्तिगत रूप से इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करें और काशीपुर में रजिस्ट्री पर लगी रोक को तुरंत प्रभाव से हटवाएं, क्योंकि यह केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकार, सुरक्षा और आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने वर्षों से वैध तरीके से हाउस टैक्स चुकाया है, उनके साथ इस तरह का व्यवहार न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि शासन के प्रति जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। यह मसला हजारों परिवारों के जीवन की स्थिरता, भविष्य की योजनाओं और संपत्ति के अधिकार से जुड़ा है, जिसे टालना नहीं, बल्कि तत्काल हल करना आवश्यक है। सरकार को जनता की पीड़ा को अब प्राथमिकता देनी ही होगी।
महापौर दीपक बाली ने ज्ञापन पर मिडिया से बात करते हुये कहा कि रजिस्ट्री पर लगी रोक पर कहा कि यह समस्या अब केवल एक प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह जन-जीवन, परंपरा, विकास और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि वर्षों पुरानी संपत्तियों के पास हाउस टैक्स की वैध रसीदें होने के बावजूद नागरिक अपने ही घर को न बेच पाने की स्थिति में हैं, जिससे आमजन खासतौर पर गरीब, मध्यमवर्गीय और जरूरतमंद लोग बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। दीपक बाली ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने डीएम पंकज उपाध्याय सहित संबंधित अधिकारियों से बातचीत की है और इस मामले को पूरी संवेदनशीलता के साथ उठाया है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि कुछ लोगों ने हाउस टैक्स की रसीदों की आड़ में नगर निगम क्षेत्र के बाहर की एग्रीकल्चरल भूमि को खरीदने के लिए गलत तरीके अपनाए, इसलिए सरकार ने यह रोक लगाई है। लेकिन ऐसे लोगों के बहाने पूरे शहर को सजा देना न्यायोचित नहीं है। महापौर बाली ने दो टूक कहा कि यदि कोई व्यक्ति नगर निगम सीमा में स्थित अपनी संपत्ति की वैध रसीद के आधार पर रजिस्ट्री कराना चाहता है, तो उसे उसका अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी तीन-चार दिनों में वे इस विषय पर प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल कर रजिस्ट्री प्रक्रिया को बहाल कराने का प्रयास करेंगे, ताकि शहर के नागरिकों को जल्द राहत मिले।
दीपक बाली ने यह भी जोड़ा कि यह नियम इस तरह से लागू होना चाहिए जिससे असामाजिक तत्वों पर रोक लगे, लेकिन नगर निगम क्षेत्र के वैध और पुराने निवासियों के साथ अन्याय न हो। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पूरे प्रदेश में ऑपरेशन कालनेमि अभियन चलाये जाने के सवाल पर उन्होने कहा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे साधु वेश में छिपे नकली लोगों, बाहरी राज्यों से आए अपराधियों और देवभूमि की संस्कृति को कलंकित करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए।
उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि अगर नगर निगम क्षेत्र में भी कोई ऐसा संदिग्ध पाया गया, तो उसे भी पुलिस के हवाले करने में एक पल की भी देर नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ संदेश दिया कि काशीपुर में अब नकली दस्तावेज, अवैध रजिस्ट्री या बहानेबाजी की कोई जगह नहीं है, लेकिन आम नागरिकों के अधिकार और न्याय की रक्षा हर हाल में की जाएगी। दीपक बाली ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि जब तक काशीपुर की जनता को उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।



