काशीपुर। सहोता हॉस्पिटल में चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐसा करिश्मा हुआ है जिसने पूरे उत्तराखंड को हैरानी में डाल दिया है। ऐसी ब्रेन सर्जरी जिसे देश के नामी-गिरामी डॉक्टरों ने करने से साफ मना कर दिया था, उसे डॉक्टर गुरपाल सहोता ने सफलता पूर्वक अंजाम देकर एक युवा को न सिर्फ नया जीवन दिया, बल्कि पूरे प्रदेश को यह दिखा दिया कि इच्छाशक्ति, ज्ञान और तकनीक के संयोग से असंभव भी संभव हो सकता है। यह ऑपरेशन इतना जटिल था कि बड़े-बड़े निजी अस्पतालों और यहां तक कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी इलाज या तो अधूरा रह गया था या रोगी को जवाब मिल गया था कि यह सर्जरी अत्यधिक जोखिम भरी है। लेकिन काशीपुर के एक डॉक्टर ने जिस आत्मविश्वास और समर्पण के साथ यह कार्य किया, उसने चिकित्सा की दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया।
इलाज की शुरुआत एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां डॉक्टर गुरपाल सहोता को एक 25 वर्षीय युवक की शारीरिक बनावट कुछ असामान्य लगी। उसी पल डॉक्टर की चिकित्सकीय दृष्टि ने पहचान लिया कि मामला साधारण नहीं है। उस युवक को उन्होंने अपनी ओपीडी में बुलाया और विस्तार से जांच की, जिसमें सामने आया कि वह पिट्यूटरी ट्यूमर से ग्रसित है। यह ट्यूमर दिमाग के ठीक केंद्र में मौजूद उस ग्रंथि को प्रभावित करता है जो शरीर के सभी हार्माेन को नियंत्रित करती है। उसी के कारण उस युवक के हाथ, चेहरे और अन्य अंगों में असामान्य वृद्धि होने लगी थी, जिससे उसका सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया था। हालत यह थी कि बोलने में रुकावट, चलने में दर्द और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी गंभीर समस्याएं उसके दैनिक जीवन को नर्क बना चुकी थीं।
इस ट्यूमर का ऑपरेशन किसी आम प्रक्रिया जैसा नहीं होता, बल्कि यह दिमाग के केंद्र में स्थित होता है, जहां तक पहुंचना और बिना क्षति पहुंचाए उसे निकाल पाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। पहले के समय में इसके लिए पूरे मस्तिष्क को खोलना पड़ता था, जिससे संक्रमण और जटिलताओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता था। लेकिन डॉक्टर गुरपाल सहोता ने नई तकनीक अपनाई जिसमें नाक के रास्ते एंडोस्कोपिक विधि से ट्यूमर को हटाया गया। इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि इसमें किसी प्रकार का बाहरी निशान नहीं आता और मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है। इसी तकनीक के माध्यम से उन्होंने वह सर्जरी की जिसे देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों ने हाथ लगाने से भी मना कर दिया था। यह सर्जरी न केवल उच्चतम सटीकता की मांग करती है, बल्कि इसके लिए जिन उपकरणों और मशीनों की आवश्यकता होती है, उनकी लागत 3 से 5 करोड़ रुपये तक होती है। हर अस्पताल इस अत्याधुनिक सेटअप को वहन नहीं कर सकता और यही वजह है कि ऐसे मामलों को अक्सर या तो टाल दिया जाता है या मरीज को बाहर रेफर कर दिया जाता है।
डॉक्टर गुरपाल सहोता ने इस मरीज के इलाज को चुनौती के रूप में लिया और दिल्ली से आवश्यक उपकरण किराये पर मंगवाए। सर्जरी के एक दिन बाद ही मरीज की हालत इतनी बेहतर हो गई कि उसे अस्पताल से छुट्टी देने की तैयारी हो गई। यह सफलता एक चिकित्सक की अद्वितीय प्रतिभा, आधुनिक विज्ञान के उपयोग और मानवीय संवेदना का ऐसा संगम थी, जिसने चिकित्सा के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया। मरीज जसकरण, जो देहरादून का निवासी है, ने बताया कि बचपन से ही उसे इस बीमारी की तकलीफ थी। वह कई बड़े अस्पतालों और डॉक्टरों से इलाज करवा चुका था, लेकिन किसी ने उसे सही समाधान नहीं दिया। एम्स, देहरादून, दिल्ली जैसे बड़े केंद्रों पर भी उसे निराशा ही हाथ लगी। जब उसे सहोता हॉस्पिटल और डॉक्टर गुरपाल सहोता के बारे में बताया गया तो उसने आखिरी उम्मीद के तौर पर यहां संपर्क किया।
ऑपरेशन के बाद मरीज ने भावुक होते हुए बताया कि अब उसे न तो बोलने में कोई परेशानी हो रही है और न ही चेहरे या हाथों में पहले जैसी तकलीफ महसूस हो रही है। उसके अनुसार चेहरे और हाथों का आकार धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, जिससे अब उसे आईने में खुद को देखकर अजनबीपन नहीं लगता। मरीज ने कहा कि उसे ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे उसे दूसरा जीवन मिल गया हो, और यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि उसके टूटते विश्वास को नया संबल देने वाली चमत्कारी प्रक्रिया थी। उसने साफ तौर पर कहा कि यह सर्जरी बड़ी जरूर थी, लेकिन डॉक्टर गुरपाल सहोता के हाथों ने इसे इतने सहज और सफल ढंग से कर दिया कि अब वह पूरी तरह सामान्य महसूस कर रहा है। उसके मुताबिक डॉक्टर सहोता ने न केवल शरीर को ठीक किया, बल्कि आत्मा को भी संजीवनी दी।
काशीपुर जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहर में ऐसी विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा का उपलब्ध होना अपने आप में गर्व की बात है। यह केवल मरीज जसकरण की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उन अनगिनत संभावनाओं का प्रतीक है जो छोटे शहरों में भी अब विकसित हो रही हैं। यह उदाहरण बताता है कि इलाज के लिए महानगरों की ओर देखने की बाध्यता अब समाप्त होती जा रही है। जब विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और मानवता का समावेश एक ही स्थान पर मिलता है, तो चिकित्सा केवल उपचार नहीं बल्कि उम्मीद बन जाती है। डॉक्टर गुरपाल सहोता और सहोता हॉस्पिटल ने यह सिद्ध कर दिया कि समर्पण और नवीनतम चिकित्सा उपकरणों के साथ यदि ईमानदारी जुड़ जाए, तो चिकित्सा के क्षेत्र में कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं रह जाता। इस सफलता ने काशीपुर को स्वास्थ्य सेवाओं के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की ओर एक सशक्त कदम बढ़ाया है।



