चन्द्रबदनी। श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय परिसर, चन्द्रबदनी (नैखरी) में मंगलवार को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तत्त्वावधान में अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, रचनात्मक और जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। परिसर निदेशक डॉ महंथ मौर्य की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में कविता पाठ तथा भारतीय ज्ञान परंपरा विषयक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और प्रतिभा को सामने रखा। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं, जीवन-मूल्यों और ज्ञान विरासत से जोड़ने के साथ उनकी रचनात्मक क्षमता को मंच प्रदान करना रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और प्रश्नोत्तरी के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित अपने ज्ञान का प्रदर्शन किया। वहीं कविता लेखन एवं कविता पाठ के माध्यम से छात्राओं ने अपनी कल्पनाशीलता, अभिव्यक्ति क्षमता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अपनी समझ को शब्दों में प्रस्तुत किया। आयोजन के दौरान परिसर का वातावरण पूरी तरह शैक्षणिक, रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों से सराबोर दिखाई दिया तथा विद्यार्थियों में प्रतियोगिताओं को लेकर खासा उत्साह नजर आया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में कुल चार टीमों ने भाग लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न सवालों का सामना किया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान से जुड़े विषयों पर अपनी जानकारी का प्रदर्शन करते हुए आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिए। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद खुशबू एवं सृष्टि की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। द्वितीय स्थान पर काजल एवं अनामिका की टीम रही, जबकि रेणुका एवं सुमन ने तृतीय स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को सामान्य पाठ्यक्रम से अलग विषयगत ज्ञान को समझने और उसे प्रतियोगिता के माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर दिया। आयोजन में प्रश्नोत्तरी को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रखते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध पक्षों से विद्यार्थियों को परिचित कराने का माध्यम बनाया गया। प्रतिभागियों की सक्रियता और उत्साह ने यह संकेत दिया कि जब विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, इतिहास, भाषा और ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को रोचक गतिविधियों के माध्यम से समझने का अवसर मिलता है तो वे उसमें अधिक रुचि के साथ भाग लेते हैं। प्रतियोगिता के परिणामों ने प्रतिभागियों की तैयारी, विषय के प्रति उनकी समझ और मंच पर उत्तर देने के आत्मविश्वास को भी सामने रखा।
रचनात्मक गतिविधियों के दूसरे प्रमुख चरण में कविता लेखन और कविता पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें छह विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं खुशबू एवं सृष्टि ने कविता पाठ प्रस्तुत करते हुए अपनी भावपूर्ण और प्रभावशाली अभिव्यक्ति से उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। दोनों छात्राओं की प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और मानवीय मूल्यों को प्रमुखता से स्थान मिला। कविता के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्तमान जीवन में भी मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक मूल्यों को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण धरोहर है। उनकी प्रस्तुतियों में भावनात्मकता के साथ विषय के प्रति समझ और आत्मीय जुड़ाव दिखाई दिया। हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. सरिता ने कविता पाठ के साथ कार्यक्रम का संचालन भी किया। उनके संचालन ने कार्यक्रम की गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कविता पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक सोच को सार्वजनिक मंच पर रखने का अवसर मिला, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता और आत्मविश्वास को प्रोत्साहन मिला। इस गतिविधि ने यह भी दिखाया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को रचनात्मक साहित्य के माध्यम से नई पीढ़ी के बीच प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परिसर निदेशक डॉ महंथ मौर्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को समझने और उसे नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय परंपराओं और ज्ञान-संपदा से परिचित होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अपने समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के प्रति समझ विकसित करना भी है। इसी दिशा में आयोजित कविता पाठ और प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को सीखने के साथ अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करती हैं। दो दिवसीय कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मूलचन्द्र शुक्ल ने भी आयोजन के उद्देश्यों और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने, उसके विविध आयामों को समझने और अपने जीवन में उसके सकारात्मक मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों की भागीदारी को इस प्रकार के आयोजनों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्हें अध्ययन और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
आयोजन के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों के साथ सामाजिक जागरूकता को भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। कार्यक्रम के समापन चरण में एंटी ड्रग सेल के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार भट्ट ने विद्यार्थियों और उपस्थित प्रतिभागियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई। शपथ के माध्यम से सभी ने नशे से दूर रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। इस पहल ने कार्यक्रम को केवल शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए सामाजिक जिम्मेदारी से भी जोड़ दिया। विद्यार्थियों के बीच नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास किया गया। नशामुक्ति की शपथ के दौरान प्रतिभागियों ने व्यक्तिगत स्तर पर नशे से दूरी बनाए रखने तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। इस तरह भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े आयोजन के बीच सामाजिक चेतना का संदेश भी मजबूती से सामने आया। शिक्षा, संस्कृति, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ जोड़ने वाली इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया।
समापन अवसर पर डॉ. गुरु प्रसाद थपलियाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को सराहनीय बताते हुए इस प्रकार की गतिविधियों को शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जहां प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा और ज्ञान का प्रदर्शन किया, वहीं प्राध्यापकों ने उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया। पूरे आयोजन में शिक्षा, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक जागरूकता का समन्वय देखने को मिला। प्रश्नोत्तरी में टीमों की प्रतिस्पर्धा, कविता लेखन और कविता पाठ में विद्यार्थियों की सृजनात्मकता तथा नशामुक्ति की शपथ ने कार्यक्रम को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को केवल कक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ऐसे मंच उपलब्ध कराए जाने चाहिए, जहां वे ज्ञान, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी को एक साथ समझ सकें। चन्द्रबदनी परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम इसी सोच का उदाहरण रहा और विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति तथा ज्ञान परंपरा के प्रति अधिक जागरूक करने की दिशा में उपयोगी पहल साबित हुआ।
कुल मिलाकर चन्द्रबदनी परिसर में आयोजित इन गतिविधियों ने अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 की भावना को विद्यार्थियों के बीच रचनात्मक और सहभागी रूप में आगे बढ़ाया। आयोजन का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि, सम्मान और गौरव की भावना विकसित करना, उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना तथा समाज को नशामुक्त बनाने के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर अपनी समझ का प्रदर्शन किया, जबकि कविता लेखन और कविता पाठ ने उन्हें अपनी भावनाओं और विचारों को रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने का मंच दिया। खुशबू, सृष्टि, काजल, अनामिका, रेणुका और सुमन सहित प्रतिभागियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को जीवंत बनाया। परिसर निदेशक डॉ महंथ मौर्य, नोडल अधिकारी डॉ. मूलचन्द्र शुक्ल, डॉ. सरिता, डॉ. सुरेश कुमार भट्ट और डॉ. गुरु प्रसाद थपलियाल सहित आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों से कार्यक्रम में शैक्षणिक गतिविधि के साथ सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सरोकार का समावेश हुआ। इस पहल से विद्यार्थियों में अपनी परंपरा को समझने, रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक के रूप में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।





