रामनगर। रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय रामनगर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को लेकर सोमवार को संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती के संचालन में आयोजित सभा में वक्ताओं ने रामनगर विधानसभा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रामनगर संयुक्त चिकित्सालय के साथ सामुदायिक चिकित्सा केंद्र मालधन, कानिया, पीरूमदारा सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में मानकों के अनुरूप चिकित्सक, पैरामेडिकल कर्मचारी और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे दावों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई देता है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के विज्ञापनों में किए जा रहे दावों को महज जुमला बताते हुए वास्तविक सुधार की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसके लिए अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति जरूरी है।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि रामनगर क्षेत्र की बड़ी आबादी उपचार के लिए संयुक्त चिकित्सालय पर निर्भर है। ऐसे में अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों और जरूरी कर्मचारियों की कमी सीधे मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। उन्होंने फिजिशियन, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, एनीस्थीसिया विशेषज्ञ, ईएमओ, ईएनटी सर्जन, चर्म रोग विशेषज्ञ तथा अन्य चिकित्साधिकारियों के रिक्त पदों पर तत्काल नियमित नियुक्तियां करने की मांग उठाई। इसके साथ ही संबद्ध चिकित्सकों की नियमित नियुक्ति किए जाने पर भी जोर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ उपचार नहीं मिलने पर उन्हें दूसरे शहरों के अस्पतालों में भेजना पड़ता है, जिससे उपचार में देरी के साथ मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल को केवल भवन या बेड की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं और प्रशिक्षित मानव संसाधन के आधार पर मजबूत बनाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री उत्तराखंड, विधायक रामनगर, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल को सीएमएस के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में संयुक्त चिकित्सालय रामनगर को 100 बेड के अस्पताल के मानकों के अनुरूप विकसित करने की मांग प्रमुखता से रखी गई। ज्ञापन में चीफ फार्मासिस्ट, स्वास्थ्य निरीक्षक, नर्सिंग सहायक और लैब टेक्नीशियन के रिक्त पदों पर भी शीघ्र नियुक्तियां करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा ढांचे का पूरा लाभ तभी मरीजों को मिल सकता है, जब पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और कर्मचारियों की तैनाती हो। इसके अलावा अस्पताल में सीटी स्कैन, आईसीयू, ब्लड बैंक और वेंटिलेटर मशीन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं को जल्द बहाल करने की मांग भी की गई। वक्ताओं ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में इन सुविधाओं का महत्व बेहद अधिक है। गंभीर मरीजों को तत्काल जांच और उपचार मिलना आवश्यक है, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में थोड़ी सी देरी भी मरीज की स्थिति को गंभीर बना सकती है।
इसी दौरान संयुक्त संघर्ष समिति ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति भी स्पष्ट की। समिति के संयोजक ललित उप्रेती ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के सवाल को लेकर रामनगर तहसील क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर बैठकें और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही हस्ताक्षर अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा। सोमवार को संयुक्त चिकित्सालय परिसर में आयोजित हस्ताक्षर अभियान में 117 लोगों ने हस्ताक्षर कर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग का समर्थन किया। समिति का कहना है कि यह अभियान केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की समस्याओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े, इसके लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत चिकित्सा व्यवस्था जरूरी है। मालधन, कानिया और पीरूमदारा जैसे क्षेत्रों में पर्याप्त चिकित्सक और कर्मचारी उपलब्ध कराने की मांग भी इसी कारण उठाई गई।
धरना-प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक, व्यापारिक, महिला, मजदूर और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर मांगों के प्रति समर्थन जताया। इस दौरान देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, अध्यक्ष मनिन्दर सिंह सेठी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष और राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी, नगर संयोजक उपपा आसिफ, समाजवादी लोकमंच के संयोजक मुनीष कुमार, गिरीश चंद्र आर्या, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की शीला शर्मा, तुलसी छिम्बाल, महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के भुवन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि, राज्य आंदोलनकारी हाफिज सईद अहमद और योगेश सती मौजूद रहे। ठेका मजदूर कल्याण समिति के किशन शर्मा, समाजसेवी राहुल दरम्वाल, पूर्व सभासद नगर पालिका तहसीन खान टी के, सुमन जोशी, लालमणि, किरण आर्य, सुनील पर्नवाल, जगमोहन सिंह रावत, राजेंद्र सिंह, बी डी नैनवाल सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भी धरने में सहभागिता की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा किसी भी क्षेत्र की बुनियादी आवश्यकता है और इसे लेकर लापरवाही का सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है। उनका कहना था कि सरकारी घोषणाओं और विज्ञापनों के बजाय अस्पतालों में वास्तविक सुविधाएं दिखाई देनी चाहिए। संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। समिति क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में जनसंपर्क कर लोगों की समस्याएं जुटाएगी और हस्ताक्षर अभियान को आगे बढ़ाएगी। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय रामनगर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता, जरूरी उपकरणों की व्यवस्था और बंद पड़ी चिकित्सा सुविधाओं की बहाली तत्काल सुनिश्चित की जाए। साथ ही सामुदायिक चिकित्सा केंद्र मालधन, कानिया और पीरूमदारा में भी मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। धरने के माध्यम से संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता को बेहतर, सुलभ और भरोसेमंद स्वास्थ्य सुविधा दिलाने के लिए है।





