काशीपुर। राज्य निर्माण सक्रिय आंदोलनकारी समिति उत्तराखंड के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शनिवार, 22 अगस्त 2026 को काशीपुर तहसील में राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर जोरदार आवाज उठाई गई। समिति से जुड़े आंदोलनकारी काशीपुर उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित प्रकरणों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। आंदोलनकारियों का आरोप है कि तहसील स्तर पर उनके चिन्हीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया लंबे समय से धीमी गति से चल रही है, जबकि संबंधित जांच समितियों की ओर से कई मामलों में जांच पूरी किए जाने के बाद भी रिपोर्ट शासन स्तर तक नहीं भेजी जा रही है। इसी स्थिति को लेकर आंदोलनकारियों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। समिति का कहना है कि राज्य निर्माण आंदोलन में संघर्ष करने वाले लोगों को उनके अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए चिन्हीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना जरूरी है। ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई कि लंबित जांच रिपोर्टों को तत्काल शासन को प्रेषित कराया जाए, ताकि वर्षों से अपने प्रमाण और पहचान के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे आवेदित आंदोलनकारियों को राहत मिल सके। इस दौरान बड़ी संख्या में आवेदित राज्य निर्माण आंदोलनकारी मौजूद रहे और उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की।
ज्ञापन में आंदोलनकारियों ने मुख्य रूप से तहसील काशीपुर में राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया में कथित विलंब को गंभीर समस्या बताया है। समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर गठित समितियों द्वारा आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी किए जाने के बावजूद कई जांच रिपोर्ट अभी तक शासन तक नहीं पहुंची हैं। इससे पात्र आवेदकों के मामलों का अंतिम स्तर पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। आंदोलनकारियों के अनुसार शासन की ओर से पूर्व में समय-समय पर चिन्हीकरण को लेकर निर्देश जारी किए जाते रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि आवेदन करने वाले लोगों को अपने पुराने दस्तावेज, प्रमाण और अन्य अभिलेख लेकर अलग-अलग कार्यालयों में जाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए जाने की मांग की है। ज्ञापन के माध्यम से यह भी कहा गया कि जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट को संबंधित स्तर पर रोककर रखने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत शासन को भेजा जाना चाहिए, जिससे आवेदकों के मामलों पर आगे निर्णय लिया जा सके। आंदोलनकारियों ने प्रशासनिक स्तर पर लंबित फाइलों को चिह्नित कर उनके शीघ्र निस्तारण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
आंदोलनकारियों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि राज्य निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष करने वाले लोगों की पहचान और प्रमाण पत्र की प्रक्रिया केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इससे आंदोलनकारियों के अधिकार, सम्मान और वर्षों के संघर्ष की मान्यता जुड़ी हुई है। समिति के अनुसार वर्ष 2000 से राज्य निर्माण आंदोलनकारी अपने चिन्हीकरण और संबंधित सुविधाओं की प्रक्रिया को लेकर लगातार प्रयास करते आ रहे हैं। इसके बावजूद जिन लोगों ने आवेदन किया है, उनमें से कई को अभी तक अंतिम रूप से चिन्हित नहीं किया गया है। समिति का आरोप है कि आवेदन और सत्यापन से जुड़े मामलों में स्थानीय स्तर पर अपेक्षित गति नहीं दिखाई जा रही है। ज्ञापन में कहा गया कि तहसील काशीपुर में चिन्हीकरण के लिए आवेदित आंदोलनकारियों के मामलों में जांच समितियों द्वारा सकारात्मक रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन उन रिपोर्टों को आगे भेजने में देरी हो रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट तैयार है तो उसे शासन तक पहुंचाने में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ऐसे सभी मामलों की सूची तैयार कर तत्काल समीक्षा की जाए और जिन प्रकरणों की जांच पूरी हो चुकी है, उनकी रिपोर्ट बिना और विलंब के शासन को भेजी जाए।
इस पूरे मामले में आंदोलनकारियों ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। ज्ञापन में कहा गया कि अधूरी और धीमी कार्यप्रणाली के कारण आवेदन करने वाले लोग बार-बार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। समिति का कहना है कि जिन लोगों ने राज्य निर्माण आंदोलन में अपनी भूमिका के आधार पर चिन्हीकरण के लिए आवेदन किया है, उन्हें लंबे समय तक केवल आश्वासन के भरोसे नहीं रखा जा सकता। आवेदन से लेकर सत्यापन और जांच रिपोर्ट शासन तक भेजे जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट समय सीमा में पूरा किया जाना चाहिए। आंदोलनकारियों ने मांग रखी कि संबंधित जिलाधिकारी और तहसील स्तर के अधिकारियों को लंबित मामलों की समीक्षा कर तत्काल प्रभाव से रिपोर्टों को संकलित करने और शासन को भेजने के निर्देश दिए जाएं। ज्ञापन में विशेष रूप से यह आग्रह किया गया कि चिन्हीकरण की प्रक्रिया को एक सप्ताह की समय अवधि के भीतर पारदर्शी ढंग से पूरा कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। समिति ने कहा कि आंदोलनकारियों के वर्षों पुराने मामलों को लंबित रखना उनके साथ न्यायसंगत व्यवहार नहीं है। प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसे मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की मजबूरी से छुटकारा मिल सके।
ज्ञापन में समिति ने यह भी कहा कि तहसीलदार तथा राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों द्वारा कई आवेदित राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के मामलों में सकारात्मक जांच रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात सामने आई है। समिति के अनुसार वर्ष 2015-16 में भी तहसील स्तर से सकारात्मक जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजे जाने का उल्लेख किया गया था, लेकिन इसके बावजूद संबंधित रिपोर्ट को मान्यता देने और आगे की प्रक्रिया पूरी करने में बाधाएं बनी हुई हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है तो उसे अनिश्चितकाल तक लंबित रखना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से पुराने प्रकरणों की भी समीक्षा करने और उन मामलों को वर्तमान प्रक्रिया के साथ जोड़कर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। समिति का आरोप है कि राज्य के अन्य हिस्सों में चिन्हीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि ऊधम सिंह नगर जिले में विशेष रूप से काशीपुर तहसील के आंदोलनकारियों को कथित रूप से अपेक्षित गति नहीं मिल रही है। इसे लेकर आवेदित आंदोलनकारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से किसी भी प्रकार के भेदभाव की स्थिति समाप्त कर सभी आवेदकों के मामलों को समान और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने की मांग की है।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और शासन की ओर से इस मामले में जल्द ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलनकारी एकजुट होकर बड़े स्तर पर विरोध कार्यक्रम शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि चिन्हीकरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलनकारी सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे और आगामी एक सितंबर को खटीमा शहीद स्मारक पर कूच करने का निर्णय भी लिया जा सकता है। आंदोलनकारियों ने इस संभावित कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होने की बात कही है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग प्रशासन के सामने रखते आए हैं, लेकिन यदि लगातार देरी जारी रही तो आंदोलन का स्वरूप व्यापक हो सकता है। समिति ने मुख्य सचिव से मामले में सीधे हस्तक्षेप करते हुए संबंधित जिला और तहसील स्तर के अधिकारियों को लंबित जांच रिपोर्टों को तत्काल संकलित कर शासन को भेजने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर चिन्हीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा कराने की व्यवस्था करने का आग्रह किया गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य निर्माण के संघर्ष में योगदान देने वालों को उनके अधिकार और सम्मान समय पर मिलना चाहिए तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं की देरी इसके रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान विनय कुमार विश्नोई, सचिन शर्मा एडवोकेट, रिजावन अहमद, प्रमोद यादव, नीरज ठाकुर, अनुराग सारस्वत, प्रदीप कुमार, रामभरोसे, अमित कुमार, जीवन कुमार, सुरेश चंद्र गौड़, दीपक कुमार, रामसिंह, भूपेंद्र सिंह, विनय कुमार शर्मा, सतीश कुमार, महेंद्र सिंह और विनोद कुमार सहित बड़ी संख्या में आवेदित राज्य निर्माण आंदोलनकारी उपस्थित रहे। सभी ने चिन्हीकरण प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने और लंबित जांच रिपोर्टों को शासन तक पहुंचाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित मामलों का नियमों के अनुरूप समाधान सुनिश्चित कराना है। उनका कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर जांच पूरी हो चुकी है तो शासन स्तर पर रिपोर्ट पहुंचाने में देरी का कोई औचित्य नहीं होना चाहिए। समिति ने उम्मीद जताई कि मुख्य सचिव के नाम दिए गए ज्ञापन के बाद प्रशासन इस विषय को गंभीरता से लेगा और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। अब आंदोलनकारियों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। यदि निर्धारित अवधि में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है तो समिति द्वारा घोषित संभावित आंदोलन कार्यक्रमों को लेकर काशीपुर और आसपास के क्षेत्र में राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों की गतिविधियां भी तेज हो सकती हैं। फिलहाल ज्ञापन के माध्यम से आंदोलनकारियों ने अपनी मांग शासन तक पहुंचा दी है और शीघ्र निर्णय की अपेक्षा जताई है।





