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धनुष की डोर से राष्ट्रीय मंच तक गूंजा हुनर, पदकों ने जगाई ओलंपिक की सुनहरी उम्मीद

ऐश्वर्या, अंश, रुद्र, देव और अथर्व की शानदार उपलब्धियों ने तीरंदाजी में नई कहानी लिखी, सूबेदार हेमचंद हरबोला के प्रशिक्षण और परिवारों के सहयोग से राष्ट्रीय चयन की राह मजबूत।

काशीपुर। महाभारत काल के प्रसिद्ध गुरू द्रोणाचार्या की धरती पर तीरंदाजी के क्षेत्र में तैयार हो रहे होनहार खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास के दम पर खेल जगत में नई पहचान बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। केडीएफ की ओर से संचालित तीरंदाजी प्रशिक्षण से जुड़े खिलाड़ियों ने हाल में सीबीएसई नॉर्थ जोन तथा अखिल भारतीय विद्या भारती की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक हासिल किए हैं। प्रशिक्षक सूबेदार हेमचंद हरबोला के मार्गदर्शन में तैयार हो रहे इन खिलाड़ियों में ऐश्वर्या कड़ाकोटी और अंश हरबोला ने सीबीएसई नॉर्थ जोन में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सीबीएसई नेशनल के लिए अपना चयन सुनिश्चित किया है, जबकि रुद्र प्रताप ने अखिल भारतीय विद्या भारती की प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए जगह बनाई है। इसके अलावा देव उनियार और अथर्व अग्निहोत्री सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। इन उपलब्धियों ने न केवल खिलाड़ियों और उनके परिवारों का उत्साह बढ़ाया है, बल्कि काशीपुर में तीरंदाजी की संभावनाओं को लेकर भी नई चर्चा छेड़ दी है। खास बात यह है कि जिन बच्चों को कुछ समय पहले तक स्थानीय स्तर पर भी बहुत कम लोग जानते थे, वे अब पूरे प्रदेश में अपनी पहचान बनाने लगे हैं और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

सूबेदार हेमचंद हरबोला ने इन सफलताओं का श्रेय सबसे पहले केडीएफ को दिया, जिसने बच्चों को तीरंदाजी सीखने और अपनी क्षमता साबित करने का अवसर उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि जब तीरंदाजी अकादमी की शुरुआत की गई थी, तब इन खिलाड़ियों की पहचान सीमित थी और उन्हें जानने वाला कोई खास नहीं था, लेकिन निरंतर प्रशिक्षण, नियमित स्कोरिंग और प्रतियोगिताओं में भागीदारी ने आज तस्वीर बदल दी है। अब इन बच्चों के प्रदर्शन पर पूरे राज्य की नजर जाने लगी है और वे लगातार बेहतर स्कोर की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षक के अनुसार मौजूदा लक्ष्य केवल प्रतियोगिता में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर पदक हासिल करना है। इसके लिए आने वाले समय में राजस्थान में प्रस्तावित जूनियर नेशनल, मेघालय में होने वाली सीनियर नेशनल और अगले वर्ष आयोजित होने वाले नेशनल गेम्स को मुख्य लक्ष्य बनाया गया है। सूबेदार हेमचंद हरबोला को भरोसा है कि इन प्रतियोगिताओं में उनके खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन करेंगे और राष्ट्रीय स्तर पर अधिक से अधिक चयन हासिल करेंगे। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर सफलता के बाद अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचना होगा। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों की तकनीक, लक्ष्य पर एकाग्रता, स्कोरिंग और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि तीरंदाजी केवल शारीरिक क्षमता का खेल नहीं बल्कि धैर्य, नियंत्रण और निरंतर एकाग्रता की भी कठिन परीक्षा है।

सीबीएसई नॉर्थ जोन में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सीबीएसई नेशनल के लिए चयनित हुईं ऐश्वर्या कड़ाकोटी की कहानी भी इस सफर को खास बनाती है। ऐश्वर्या ने अपनी सफलता के पीछे अपनी कोच और परिवार के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि मेडल जीतने और राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन होने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उनका अगला लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए पदक हासिल करना है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए वह नियमित रूप से स्कोरिंग कर रही हैं और अपने प्रदर्शन को लगातार सुधारने पर ध्यान दे रही हैं। ऐश्वर्या का मानना है कि जितना बेहतर स्कोर होगा, उतनी ही मजबूत स्थिति में वह राष्ट्रीय मुकाबले में उतर पाएंगी। उनकी मां गीतांजलि ने बताया कि शुरुआत में उन्हें तीरंदाजी के बारे में ज्यादा जानकारी तक नहीं थी। ऐश्वर्या की रुचि देखकर उन्होंने उसे इस खेल के लिए आगे बढ़ाया। चूंकि परिवार की परिस्थितियों में आने-जाने की चुनौती भी थी, फिर भी बेटी की इच्छा और उत्साह को देखते हुए उन्होंने उसे प्रशिक्षण दिलाना शुरू किया। गीतांजलि ने बताया कि प्रशिक्षक सूबेदार हेमचंद हरबोला ने ऐश्वर्या पर विशेष ध्यान दिया और परिवार की ओर से भी हर संभव सहयोग दिया गया। उन्होंने कहा कि बेटी का राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन पूरे परिवार के साथ केडीएफ परिवार के लिए भी गर्व का विषय है और उनकी इच्छा है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने वाले सभी बच्चे गोल्ड मेडल लेकर लौटें तथा अपने परिवार, शहर और केडीएफ का नाम रोशन करें।

इसी सफलता की कड़ी में अंश हरबोला ने भी सीबीएसई नॉर्थ जोन में ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर सीबीएसई नेशनल के लिए अपना स्थान बनाया है। ऐसे समय में जब क्रिकेट और अन्य लोकप्रिय खेल बच्चों की पहली पसंद बने हुए हैं, अंश ने तीरंदाजी को चुना और इसमें अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़े। अंश ने बताया कि उन्हें यह खेल शुरू से अच्छा लगा और इसी रुचि ने उन्हें तीरंदाजी के प्रशिक्षण से जोड़ दिया। नॉर्थ जोन में मेडल जीतने के बाद उन्हें बेहद खुशी हुई और वह अपनी सफलता का श्रेय प्रशिक्षक की मेहनत तथा नियमित अभ्यास को देते हैं। उनका अगला लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉन्ज को गोल्ड में बदलना है। अंश का कहना है कि वह अभी से राष्ट्रीय प्रतियोगिता को ध्यान में रखते हुए लगातार तैयारी कर रहे हैं और स्कोरिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशिक्षक के अनुसार अंश में आगे बेहतर प्रदर्शन करने की पूरी क्षमता है और नियमित अभ्यास के माध्यम से उसके प्रदर्शन को और मजबूत किया जा रहा है। खिलाड़ियों की उपलब्धियों के बीच यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि तीरंदाजी में एक-एक अंक का महत्व होता है और थोड़ी सी असावधानी भी पूरे मुकाबले का परिणाम बदल सकती है। ऐसे में अंश जैसे खिलाड़ियों का लगातार स्कोरिंग अभ्यास करना यह बताता है कि राष्ट्रीय स्तर की चुनौती को लेकर वे कितनी गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं।

अखिल भारतीय विद्या भारती की प्रतियोगिता में काशीपुर के खिलाड़ियों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने केडीएफ की मेहनत को और मजबूती प्रदान की है। देव उनियार ने टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने शिकारपुर, उत्तर प्रदेश में आयोजित प्रतियोगिता में यह उपलब्धि हासिल की और लगभग दो वर्षों से तीरंदाजी का अभ्यास कर रहे हैं। महज दो साल के प्रशिक्षण में टीम इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। देव अब इससे भी बेहतर प्रदर्शन की तैयारी में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना स्कोरिंग की जा रही है और अपने स्कोर में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उनका लक्ष्य भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना है। देव के परिवार ने भी उनकी उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है और आगे उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। परिवार के अनुसार तीरंदाजी में आगे बढ़ने के लिए केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि लगातार अभ्यास, उपकरणों पर खर्च और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए आर्थिक सहयोग भी जरूरी होता है। इसके बावजूद परिवार बच्चों के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। देव की सफलता इस बात का संकेत है कि यदि किसी खिलाड़ी को सही प्रशिक्षण, परिवार का सहयोग और निरंतर अभ्यास मिले तो वह कम समय में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर सकता है।

अथर्व अग्निहोत्री ने भी शिकारपुर, उत्तर प्रदेश में विद्या भारती की प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। अथर्व ने अपनी सफलता के बाद कहा कि उन्हें पदक जीतकर बेहद खुशी हुई और अब उनकी नजर आगे होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है। वह और उनके साथी खिलाड़ी रोजाना स्कोरिंग का अभ्यास कर रहे हैं ताकि तकनीक और प्रदर्शन दोनों को मजबूत किया जा सके। अथर्व के दादा डॉक्टर महेश चंद्र अग्निहोत्री ने अपने पोते की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिभा हर बच्चे में होती है, लेकिन उस प्रतिभा को सही दिशा देने वाला प्रशिक्षक मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने तीरंदाजी प्रशिक्षण में लगे सूबेदार हेमचंद हरबोला की भूमिका को गुरु द्रोणाचार्य के समान बताते हुए उनके समर्पण और मेहनत की सराहना की। डॉक्टर महेश चंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि बच्चों को सही मार्गदर्शन मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इन खिलाड़ियों का भविष्य उज्ज्वल होगा। अथर्व के परिवार की ओर से भी उसे लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। परिवार का मानना है कि बच्चों की शिक्षा के साथ खेलों में निवेश भी भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है और यदि खिलाड़ी अपने क्षेत्र में आगे बढ़कर देश तथा शहर का नाम रोशन करता है तो यह पूरे परिवार के लिए गौरव का विषय बन जाता है।

रुद्र प्रताप की उपलब्धि ने केडीएफ के खिलाड़ियों की राष्ट्रीय स्तर की संभावनाओं को और मजबूत किया है। रुद्र प्रताप ने विद्या भारती ग्रुप टीम इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया और इसी प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए हैं। उन्होंने अपनी सफलता के लिए सूबेदार हेमचंद हरबोला तथा परिवार के सहयोग को विशेष रूप से याद किया। रुद्र प्रताप ने बताया कि प्रशिक्षक ने बच्चों के साथ लगातार मेहनत की और परिवार ने भी आर्थिक तथा मानसिक स्तर पर उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तीरंदाजी महंगा खेल है और इसमें उपकरणों तथा प्रशिक्षण से जुड़े खर्च काफी होते हैं, लेकिन परिवार और प्रशिक्षक के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। रुद्र प्रताप की फैमिली को अब उम्मीद है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी केडीएफ की टीम पदक हासिल करेगी। खिलाड़ियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि इससे उनके परिवार, प्रशिक्षण केंद्र और काशीपुर का नाम भी आगे बढ़ेगा। रुद्र प्रताप की सफलता के बाद अब उनकी तैयारी राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों के साथ-साथ आने वाले अन्य आयोजनों के लिए भी जारी है। लगातार अभ्यास और बेहतर स्कोर का लक्ष्य लेकर खिलाड़ी अपने प्रदर्शन को अगले स्तर तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं।

खिलाड़ियों के परिवारों की भूमिका भी इस पूरी कहानी का अहम हिस्सा बनकर सामने आई है। अंश हरबोला के परिवार की तरह अन्य अभिभावक भी यह मानते हैं कि तीरंदाजी आसान खेल नहीं है। इसमें धैर्य, मानसिक स्थिरता, तकनीकी समझ और लंबे समय तक नियमित अभ्यास की जरूरत होती है। उपकरणों और प्रतियोगिताओं से जुड़े खर्च भी परिवारों के सामने चुनौती रखते हैं, लेकिन अभिभावक इसे बच्चों के भविष्य में निवेश के तौर पर देख रहे हैं। एक खिलाड़ी के पिता ने कहा कि आज लोग अपने बच्चों के भविष्य के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में पैसा खर्च करते हैं और उसी तरह खेल में किया गया निवेश भी भविष्य में बड़ी उपलब्धि का आधार बन सकता है। उनका मानना है कि बच्चों को मोबाइल और दूसरी गतिविधियों में अत्यधिक समय देने के बजाय किसी सकारात्मक क्षेत्र से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे अनुशासन सीखें और आगे चलकर देश व समाज का नाम रोशन कर सकें। परिवारों का कहना है कि पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन बच्चों को समय का प्रबंधन सिखाकर दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ाया जा सकता है। देव उनियार के परिवार ने भी बताया कि मेडल जीतने के बाद बच्चे का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और अब उसकी इच्छा राष्ट्रीय स्तर पर खेलने की है। पढ़ाई में फिलहाल कोई गंभीर बाधा नहीं आई है और वह खेल के साथ अपनी शिक्षा भी जारी रख रहा है।

इन उपलब्धियों के पीछे केडीएफ के संस्थापक राजीव राजीव घई ने बताया कि काशीपुर की ऐतिहासिक पहचान को तीरंदाजी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। राजीव भाई ने कहा कि काशीपुर को द्रोण नगरी के रूप में देखा जाता है और द्रोणाचार्य की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ी इस धरती पर धनुष विद्या को फिर से मजबूत पहचान दिलाने का सपना देखा गया था। इसी उद्देश्य के साथ यह प्रयास शुरू हुआ कि काशीपुर से फिर कोई ऐसा अर्जुन निकले जो राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाए। उनका कहना है कि हर महीने किसी न किसी खिलाड़ी की उपलब्धि सामने आ रही है। कभी गोल्ड मेडल, कभी सिल्वर या ब्रॉन्ज और कभी राष्ट्रीय टीम के लिए चयन जैसी उपलब्धियां इस अभियान को गति दे रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे शहर की उपलब्धि है। परिवारों का सहयोग, बच्चों की मेहनत और समाज की ओर से मिलने वाला प्रोत्साहन खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाता है। संस्थापक राजीव राजीव घई ने बताया कि केडीएफ का उद्देश्य जल्द से जल्द ऐसी आर्चरी अकादमी तैयार करना है, जहां स्थानीय बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और उन्हें प्रशिक्षण के लिए बाहर न जाना पड़े। इसके लिए स्थान और प्रशासनिक सहयोग की आवश्यकता बताई गई है। संगठन की ओर से उम्मीद जताई गई कि आने वाले समय में काशीपुरवासी और प्रशासन इस पहल को समझेंगे और खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सहयोग देंगे।

ओलंपिक तक पहुंचने का सपना भी केडीएफ की इस मुहिम का केंद्रीय लक्ष्य बताया गया है। केडीएफ के संस्थापक राजीव राजीव घई ने कहा कि सपना बड़ा होगा तभी उसकी दिशा में बड़ा प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने अपने जीवन के उस दौर का भी उल्लेख किया जब उत्तराखंड के निर्माण के समय राज्य को औद्योगिक क्षेत्र में आगे ले जाने का सपना देखा गया था और लंबे प्रयासों के बाद उस दिशा में काम किया गया। इसी सोच के साथ अब खेलों के क्षेत्र में भी एक बड़ा सपना देखा जा रहा है कि काशीपुर का कोई तीरंदाज भविष्य में ओलंपिक के मंच तक पहुंचे। उनका कहना है कि इस लक्ष्य के लिए तन, मन और धन से प्रयास जारी रहेगा और उन्हें भरोसा है कि समाज से सहयोग जरूर मिलेगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से भी आग्रह किया कि द्रोणाचार्य की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े द्रोणासागर क्षेत्र में तीरंदाजी को प्रोत्साहन देने की संभावनाओं पर ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि पूरे ऊधम सिंह नगर और कुमाऊं क्षेत्र में तीरंदाजी को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की पहल केडीएफ ने शुरू की है। आने वाले समय में जब यही बच्चे राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतेंगे तो प्रशासनिक अधिकारियों की नजर भी इस प्रतिभा पर पड़ेगी। राजीव राजीव घई ने कहा कि सरकार खेल महाकुंभ जैसे आयोजन कर खिलाड़ियों को मंच दे रही है और स्वर्ण पदक विजेताओं को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी पहल अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने माना कि संभव है कि उनकी ओर से भी अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने में कमी रही हो, लेकिन अब उम्मीद है कि खिलाड़ियों के लगातार राष्ट्रीय चयन और पदक प्रदर्शन से यह प्रयास व्यापक समर्थन हासिल करेगा।

काशीपुर में तीरंदाजी की यह कहानी केवल कुछ पदकों की उपलब्धि तक सीमित नहीं दिखाई देती, बल्कि यह उस बदलती खेल संस्कृति की तस्वीर भी पेश कर रही है जिसमें बच्चे पारंपरिक और अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय खेलों में भी भविष्य तलाश रहे हैं। ऐश्वर्या कड़ाकोटी, अंश हरबोला, रुद्र प्रताप, देव उनियार और अथर्व अग्निहोत्री जैसे खिलाड़ी इस बदलाव के उदाहरण बनकर सामने आए हैं। इन खिलाड़ियों की मेहनत, परिवारों का विश्वास और सूबेदार हेमचंद हरबोला का प्रशिक्षण मिलकर एक ऐसी टीम तैयार कर रहा है, जिसकी नजर अब राष्ट्रीय मंच से आगे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है। आने वाले जूनियर नेशनल, सीनियर नेशनल और नेशनल गेम्स इन खिलाड़ियों के लिए बड़ी परीक्षा साबित होंगे। सीबीएसई नॉर्थ जोन में ब्रॉन्ज से शुरुआत करने वाले खिलाड़ियों के सामने अब उसे राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण में बदलने की चुनौती होगी, जबकि विद्या भारती में गोल्ड जीतने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच पर अपनी निरंतरता साबित करनी होगी। इन पदकों ने बच्चों के भीतर आत्मविश्वास बढ़ाया है और परिवारों में उम्मीद जगाई है कि खेल के माध्यम से उनके बच्चे नया मुकाम हासिल कर सकते हैं। यदि केडीएफ की आर्चरी अकादमी की योजना को जमीन पर आवश्यक संसाधन और प्रशासनिक सहयोग मिलता है तो काशीपुर में तीरंदाजी के लिए स्थायी प्रशिक्षण ढांचा तैयार हो सकता है। यही ढांचा आने वाले वर्षों में उन प्रतिभाओं को तैयार कर सकता है, जो न केवल राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करें, बल्कि उस सपने को भी सच कर दिखाएं जिसमें काशीपुर की धरती से कोई तीरंदाज ओलंपिक तक पहुंचे।

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