काशीपुर। शिवालिक माउंट एकेडमी में अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा की ओर से आयोजित सम्मान समारोह एवं विचार गोष्ठी में शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उपलब्धियों को विशेष सम्मान मिला। कार्यक्रम का केंद्र शिक्षाविद् डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय और साहित्यकार एवं पत्रकार विनोद भगत रहे, जिन्हें उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए महासभा की ओर से सम्मानित किया गया। डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय को शिक्षा के क्षेत्र में प्राचार्य पद की जिम्मेदारी मिलने तथा कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में सचिव बनाए जाने पर बधाई दी गई, वहीं साहित्यकार एवं पत्रकार विनोद भगत को मुंशी प्रेमचंद साहित्य पुरस्कार प्राप्त होने पर सम्मानित कर उनकी साहित्यिक उपलब्धि की सराहना की गई। समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज की प्रगति केवल संगठनात्मक मजबूती से नहीं, बल्कि शिक्षा, साहित्य, सामाजिक सहभागिता, प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और जरूरतमंदों की सहायता से संभव है। कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज की एकजुटता, युवाओं को आगे लाने, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर देने और समाज की सकारात्मक उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे गए। पूरे आयोजन में डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय और विनोद भगत की उपलब्धियों को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं ब्राह्मण नेता पंडित मनोज जोशी ने समाज की वर्तमान परिस्थितियों पर विचार रखते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज की पहचान सदियों से ज्ञान, विवेक, शिक्षा और परोपकार की परंपरा से रही है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में इस विरासत को केवल स्मरण करने के बजाय उसे सामाजिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाने की जरूरत है। उनके संबोधन में विशेष रूप से युवाओं की भूमिका पर जोर रहा। उन्होंने कहा कि समाज के युवा शिक्षा के साथ खेल, साहित्य, कला, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ें, इसके लिए वरिष्ठों को उन्हें प्रोत्साहन, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में प्राचार्य पद की जिम्मेदारी प्राप्त करना उनके अनुभव और कार्यक्षमता का परिचायक है। इसके साथ कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में सचिव की जिम्मेदारी मिलना भी उनके सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। वक्ताओं ने उनके पिता स्वर्गीय सत्येंद्र चंद गुड़िया की सामाजिक एवं राजनीतिक विरासत को याद करते हुए उम्मीद जताई कि डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में आगे भी प्रभावी योगदान देती रहेंगी।
इसी क्रम में साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले विनोद भगत की उपलब्धि को भी समारोह में प्रमुखता से रेखांकित किया गया। उन्हें मुंशी प्रेमचंद साहित्य पुरस्कार मिलने पर महासभा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बधाई देते हुए कहा कि साहित्यिक सम्मान किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं होता, बल्कि उससे उस क्षेत्र और समाज का भी गौरव बढ़ता है, जहां से संबंधित रचनाकार अपनी यात्रा आगे बढ़ाता है। वक्ताओं ने कहा कि विनोद भगत ने साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है और मुंशी प्रेमचंद साहित्य पुरस्कार उनके रचनात्मक योगदान को मिली महत्वपूर्ण मान्यता है। डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय ने भी अपने संबोधन में विनोद भगत को मिले इस सम्मान को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि साहित्यकारों के कार्यों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता को समाज के विचारों को दिशा देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि ऐसे रचनात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। समारोह में दोनों सम्मानित व्यक्तित्वों की उपलब्धियों को लेकर उपस्थित लोगों में उत्साह दिखाई दिया और वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा तथा साहित्य जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे लोगों को सम्मान देना समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करता है।
अपने सम्मान के बाद डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय ने महासभा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी उपलब्धि की वास्तविक खुशी तब बढ़ जाती है, जब परिवार और समाज के लोग उससे प्रसन्न होकर उसे साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि पद और उपलब्धियां जीवन की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर हैं, लेकिन उनसे जुड़ी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय सत्येंद्र चंद गुड़िया को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संस्कारों और मार्गदर्शन को अपने जीवन की निरंतर प्रेरणा बताया। डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय ने कहा कि परिवार से मिले संस्कार व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने की दृष्टि प्रदान करते हैं। उन्होंने महासभा के वरिष्ठजनों से भविष्य में भी मार्गदर्शन और आशीर्वाद बनाए रखने का आग्रह किया। उनके संबोधन में उपलब्धि से अधिक जिम्मेदारी और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके विचारों की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाली डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय यदि इसी तरह सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रहेंगी तो युवाओं और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का मजबूत आधार तैयार होगा।
महासभा के प्रदेश महासचिव उमेश जोशी एडवोकेट ने संगठन की भूमिका और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा का उद्देश्य किसी दूसरे समाज का विरोध करना अथवा उसके पतन की कामना करना नहीं, बल्कि अपने समाज के उत्थान के लिए सकारात्मक और रचनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है और उन्हें केवल सदस्य बनाने के बजाय जिम्मेदारियां देकर सामाजिक कार्यों से जोड़ना चाहिए। कार्यक्रम में पंडित सुभाष शर्मा, पंडित बिदुशेखर शर्मा, पंडित पंकज पंत, जिला अध्यक्ष प्रभा तिवारी, महानगर अध्यक्ष लता शर्मा, अधिवक्ता प्रीति शर्मा, लता तिवारी और पूनम पंत सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने समाज के गरीब एवं प्रतिभावान बच्चों की शिक्षा में सहयोग, जरूरतमंद परिवारों की मदद, सामाजिक एकता मजबूत करने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय और विनोद भगत जैसे व्यक्तित्वों की उपलब्धियों को सामने लाना युवा पीढ़ी को शिक्षा, साहित्य और सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
आयोजन के दौरान महासभा की आगामी गतिविधियों को लेकर भी जानकारी साझा की गई। प्रदेश महासचिव उमेश जोशी एडवोकेट ने बताया कि आगामी 11 सितंबर को रामनगर क्षेत्र के ढिकुली स्थित एक रिसोर्ट में महासभा की प्रदेश कार्यकारिणी और वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में काशीपुर के सम्मानित व्यक्तित्वों को प्रदेश स्तर पर सम्मानित किए जाने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में शिवालिक माउंट एकेडमी के उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी बसंत वल्लभ भट्ट की आयोजन व्यवस्था और सामाजिक एवं शैक्षिक गतिविधियों में सहयोग के लिए भी सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि शैक्षिक संस्थानों की भूमिका केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता, प्रतिभा प्रोत्साहन और सकारात्मक संवाद के केंद्र भी बन सकते हैं। इसी दृष्टि से शिवालिक माउंट एकेडमी में आयोजित यह कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद का अवसर बना। समारोह में डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय की शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र में सक्रियता तथा विनोद भगत की साहित्य और पत्रकारिता से जुड़ी उपलब्धियों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे व्यक्तित्वों का सम्मान और उनकी उपलब्धियों से युवाओं को परिचित कराना आवश्यक है, ताकि सफलता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत हो।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष शैलेन्द्र मिश्रा एडवोकेट ने की। समारोह में चंद्रभूषण डोभाल, मोहन पपनै, संदीप चतुर्वेदी, विमल गुड़िया, विकल्प गुड़िया, गिरिश अधिकारी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। अध्यक्षीय संबोधन और अन्य वक्ताओं के विचारों में सामाजिक एकता तथा रचनात्मक सहभागिता को प्रमुख स्थान मिला। वक्ताओं ने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसके लोगों की प्रतिभा, सहयोग और परस्पर विश्वास में निहित होती है, इसलिए व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक हितों के लिए कार्य करना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के समापन अवसर पर भगवान परशुराम के जयकारे लगाए गए और राष्ट्रहित तथा समाजहित में मिलकर काम करने का संकल्प लिया गया। समारोह में डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय और विनोद भगत का सम्मान आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। शिक्षा के क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने वाली डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय और मुंशी प्रेमचंद साहित्य पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार एवं पत्रकार विनोद भगत की उपलब्धियों को जिस तरह मंच से रेखांकित किया गया, उससे कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक नेतृत्व में सक्रिय प्रतिभाओं को पहचानना और प्रोत्साहित करना जरूरी है। महासभा ने इसी सोच के साथ सामाजिक उत्थान, युवा सहभागिता और प्रतिभा सम्मान की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।





