काशीपुर। जमीन के एक बड़े सौदे में करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी, रकम वापस मांगने पर लगातार धमकियां और इसके बाद मारपीट कर गंभीर रूप से घायल किए जाने का मामला सामने आया है। काशीपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार शिकायतकर्ता अनिल कुमार डाबर, निवासी कृष्णा विलेज, जसपुरखुर्द, काशीपुर ने पुनीत सिंघल पुत्र स्वर्गीय प्रमोद कुमार सिंघल तथा उनकी माता निशा सिंघल के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस अभिलेख के मुताबिक इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 117(2), 318(4), 351(3) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। प्राथमिकी 21 अगस्त 2026 को शाम 6:12 बजे दर्ज की गई, जबकि पुलिस को लिखित सूचना उसी दिन शाम 5:44 बजे प्राप्त हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जमीन को साफ-सुथरा और किसी भी बैंक ऋण या अन्य भार से मुक्त बताकर उसके साथ सौदा किया गया, लेकिन बाद में दस्तावेजों की जांच के दौरान जमीन की स्थिति अलग सामने आई। मामला केवल संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिकायतकर्ता के अनुसार रकम वापस मांगने पर उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी गईं। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना नवीन बुधानी, उपनिरीक्षक/अवर निरीक्षक को सौंपी है।
शिकायत के अनुसार पूरा विवाद ग्राम धनौरी पट्टी, तहसील काशीपुर की भूमि से जुड़ा है। अनिल कुमार डाबर ने पुलिस को दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि वह काशीपुर जिला ऊधम सिंह नगर का निवासी है और कानून का पालन करने वाला व्यक्ति है। उनके अनुसार पुनीत सिंघल ने अपनी माता निशा सिंघल के साथ मिलकर उनसे संपर्क किया और ग्राम धनौरी पट्टी स्थित खसरा संख्या 33 व 37 की कुल 3.719 हेक्टेयर भूमि में से 1.416 हेक्टेयर जमीन को अपनी वर्ग-1 क की संक्रमणीय भूमि बताते हुए बेचने की इच्छा जताई। शिकायतकर्ता के मुताबिक पुनीत सिंघल ने उसे भरोसा दिलाया कि संबंधित भूमि पूरी तरह साफ है और उस पर किसी प्रकार का बैंक ऋण या अन्य वित्तीय बोझ नहीं है। इसके बाद उसे मौके पर जमीन दिखाई गई और वहां की खतौनी की छायाप्रति भी उपलब्ध कराई गई। चूंकि शिकायतकर्ता पुनीत सिंघल को पहले से जानता था, इसलिए उसने उसकी बातों पर विश्वास कर लिया। इसी भरोसे के आधार पर दोनों पक्षों के बीच जमीन का सौदा करीब एक करोड़ 21 लाख रुपये में तय हुआ। शिकायत में यह भी बताया गया कि सौदे के बदले शिकायतकर्ता की साझेदारी में रामनगर के मनोर्थपुर बाल्टीटिला क्षेत्र में स्थित रिसॉर्ट की भूमि को भी लेन-देन का हिस्सा बनाया जाना था।
मामले में दर्ज विवरण के अनुसार सौदे की शर्तों के तहत शिकायतकर्ता की साझेदारी वाले रिसॉर्ट की जमीन, जिसकी कीमत करीब 11 करोड़ रुपये आंकी गई थी, के बदले पुनीत सिंघल के नाम भूमि की रजिस्ट्री किए जाने की बात तय हुई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस समझौते के तहत 26 लाख रुपये बैंक आरटीजीएस और 74 लाख रुपये नकद, यानी कुल एक करोड़ रुपये, 17 जुलाई 2025 को बतौर बयाना पुनीत सिंघल को दिए गए। शेष भुगतान भी तय शर्तों के अनुसार समय-समय पर किया जाना था। इसी लेन-देन को लेकर शिकायतकर्ता की पत्नी कविता डाबर के साथ 17 जुलाई 2025 को एक इकरारनामा भी निष्पादित हुआ। आरोप है कि समझौते में यह तय हुआ था कि शिकायतकर्ता के साझेदारी वाले रामनगर के बाल्टीटिला स्थित रिसॉर्ट के कुछ हिस्से की रजिस्ट्री पहले पुनीत सिंघल के पक्ष में की जाएगी। शिकायत के अनुसार इस समझौते के तहत 2 फरवरी 2026 को रामनगर के बाल्टीटिला स्थित खसरा संख्या 75 में 1205 वर्गमीटर भूमि की पंजीकृत बिक्री विलेख के जरिए शिकायतकर्ता ने अपने साझेदार मनीष श्रीवास्तव के साथ मिलकर पुनीत सिंघल के नाम कर दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि बिक्री विलेख में दर्ज प्रतिफल के चेक भी पुनीत सिंघल ने प्राप्त कर लिए थे।
शिकायतकर्ता ने आगे पुलिस को बताया कि इकरारनामे के समय यह सहमति बनी थी कि बिक्री विलेख में दिए गए चेक बाद में उसे वापस कर दिए जाएंगे। इन चेकों की कुल राशि करीब 7,10,70,430 रुपये बताई गई है। इसी बीच जब अनिल कुमार डाबर ने पुनीत सिंघल की बताई गई भूमि को खरीदने के लिए बैंक से ऋण लेने की प्रक्रिया शुरू की तो बैंक ने संबंधित भूमि की वर्तमान खतौनी प्रस्तुत करने को कहा। शिकायत के मुताबिक जब खसरा संख्या 33 और 37 की नई खतौनी तहसील से निकलवाई गई तो कथित तौर पर उसमें स्थिति पहले बताई गई जानकारी से अलग दिखाई दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम धनौरी पट्टी, तहसील काशीपुर में खसरा संख्या 33, 35 और 37 को लेकर भूमि संबंधी स्थिति ऐसी सामने आई, जिससे उसके सामने पूरे सौदे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अनिल कुमार डाबर ने आरोप लगाया कि पुनीत सिंघल ने कथित रूप से पहले से सोची-समझी योजना के तहत उसकी रकम हड़पने की नीयत से उसे गलत जानकारी दी और विश्वास में लेकर जमीन का सौदा किया। शिकायत में यह भी कहा गया कि पुनीत सिंघल को इस प्रक्रिया से अनुचित लाभ पहुंचा, जबकि शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
दस्तावेज के अनुसार विवाद तब और गहरा गया जब अनिल कुमार डाबर ने कथित भूमि की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद पुनीत सिंघल से बातचीत कर अपनी रकम वापस मांगने की कोशिश की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद पुनीत सिंघल ने भुगतान वापस करने के बजाय टालमटोल शुरू कर दी। इतना ही नहीं, आरोप है कि रामनगर के रिसॉर्ट की रजिस्ट्री में दर्ज चेक भी उसे आज तक वापस नहीं किए गए। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पुनीत सिंघल ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उसे धमकाया और कहा कि यदि उसने ज्यादा बात की तो उसे और उसके परिवार को जान से मार दिया जाएगा। इसके बाद मामला केवल पैसों की वापसी और जमीन के दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिकायतकर्ता के अनुसार उसे लगातार भय और दबाव का सामना करना पड़ा। पुलिस को दी गई तहरीर में अनिल कुमार डाबर ने कहा कि वह अपनी रकम वापस लेने का प्रयास कर रहा था, लेकिन कथित धमकियों के कारण उसे अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका पैदा हो गई थी। इसी पृष्ठभूमि में 19 अप्रैल 2026 की शाम हुई कथित मारपीट की घटना ने विवाद को और गंभीर रूप दे दिया।
19 अप्रैल 2026 की शाम करीब 5:45 बजे हुई घटना को शिकायतकर्ता ने प्राथमिकी में अपने आरोपों का सबसे गंभीर हिस्सा बताया है। अनिल कुमार डाबर के अनुसार वह अपने मित्र के साथ रास्ते से गुजर रहा था, तभी उसका सामना पुनीत सिंघल से हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसने पुनीत सिंघल से जमीन के सौदे में कथित धोखाधड़ी को लेकर सवाल किया और कहा कि उसके साथ गलत किया गया है। आरोप है कि इस बात पर पुनीत सिंघल आगबबूला हो गया और अपनी कार से बेसबॉल बैट जैसा डंडा निकालकर शिकायतकर्ता पर हमला कर दिया। प्राथमिकी के मुताबिक इस हमले में अनिल कुमार डाबर के चार दांत टूट गए और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गंभीर चोटें आईं, जिनके उपचार के दौरान टांके भी लगाए गए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मारपीट के बाद भी उसे धमकाते हुए कहा गया कि यदि दोबारा कहीं दिखाई दिया तो उसे जान से मार दिया जाएगा। घटना के बाद उसने अपने मित्र मनीष श्रीवास्तव को मोबाइल फोन पर पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत के मुताबिक मनीष श्रीवास्तव उसे उपचार के लिए सरकारी अस्पताल काशीपुर लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर चोटों का प्राथमिक उपचार किया।
सरकारी अस्पताल काशीपुर में उपचार के दौरान चिकित्सकों ने शिकायतकर्ता के दांतों में आई गंभीर चोटों को देखते हुए उसे दंत चिकित्सक के पास रेफर किया। प्राथमिकी में उल्लेख है कि इसके बाद उसे डेंटामैक्स, जसपुरखुर्द, काशीपुर भेजा गया, जहां दांतों से संबंधित उपचार कराया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने इस पूरी घटना की सूचना काशीपुर थाने की पुलिस को दी थी। उसका आरोप है कि तत्काल अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण पुनीत सिंघल के हौसले और बढ़ गए तथा इसके बाद वह उसे और उसके परिवार को बार-बार जान से मारने की धमकियां देने लगा। अनिल कुमार डाबर ने पुलिस के समक्ष आरोप लगाया कि जमीन के सौदे में करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के साथ-साथ इकरारनामे की शर्तों का भी पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि न तो जमीन का सौदा निर्धारित तरीके से पूरा किया गया और न ही उनके द्वारा दी गई रकम वापस की गई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को यह भी बताया कि जब वह अपनी रकम वापस मांगता है तो कथित तौर पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है। इस कारण उसने आशंका जताई कि आर्थिक विवाद के चलते उसके या उसके परिवार के साथ कोई गंभीर वारदात हो सकती है।
इसी गंभीर आशंका के आधार पर अनिल कुमार डाबर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला ऊधम सिंह नगर के समक्ष लिखित शिकायत देकर आरोपितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्राथमिकी में उन्होंने पुनीत सिंघल पुत्र स्वर्गीय प्रमोद कुमार सिंघल तथा निशा सिंघल पत्नी स्वर्गीय प्रमोद कुमार सिंघल, निवासी ग्राम प्रतापपुर, तहसील काशीपुर, जिला ऊधम सिंह नगर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जमीन के सौदे, इकरारनामे और रकम के लेन-देन से जुड़े घटनाक्रम में उसे आर्थिक क्षति हुई तथा बाद में रकम मांगने पर कथित रूप से धमकियां और मारपीट का सामना करना पड़ा। पुलिस दस्तावेज में दर्ज कार्रवाई के अनुसार शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला पंजीकृत कर लिया गया है और विवेचना की जिम्मेदारी नवीन बुधानी को दी गई है। प्राथमिकी पर थाना प्रभारी हरेंद्र चौधरी, निरीक्षक के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड में यह स्पष्ट है कि मामला दर्ज होने के बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अब जांच के दौरान जमीन के स्वामित्व और राजस्व अभिलेख, कथित इकरारनामा, भुगतान से संबंधित बैंक लेन-देन, बिक्री विलेख, चेक तथा मारपीट से संबंधित चिकित्सीय दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम से यह मामला एक साधारण जमीन विवाद से कहीं अधिक गंभीर स्वरूप लेता दिखाई देता है, क्योंकि शिकायतकर्ता ने संपत्ति के कथित गलत विवरण से लेकर करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजी समझौते, रकम की वापसी की मांग, धमकियों और शारीरिक हमले तक के आरोप लगाए हैं। हालांकि प्राथमिकी में दर्ज आरोप अभी जांच का विषय हैं और आरोपों की अंतिम पुष्टि विवेचना तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस के समक्ष दर्ज शिकायत में अनिल कुमार डाबर ने जिस क्रम से घटनाओं का उल्लेख किया है, उसमें 17 जुलाई 2025 को कथित बयाना राशि दिए जाने से लेकर 2 फरवरी 2026 को 1205 वर्गमीटर भूमि की बिक्री विलेख के जरिए रजिस्ट्री कराने और फिर भूमि के दस्तावेजों की स्थिति सामने आने तक का पूरा घटनाक्रम शामिल है। इसके बाद रकम वापसी को लेकर कथित विवाद, धमकियां और 19 अप्रैल 2026 को हुई मारपीट का आरोप सामने आया। एफआईआर के अनुसार पुलिस ने मामले को दर्ज करते हुए जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया है। अब विवेचना के दौरान दोनों पक्षों के कथनों, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।





