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वननेस वन से हरित क्रांति की दस्तक, संत निरंकारी मिशन ने छेड़ा देशव्यापी प्रकृति संरक्षण अभियान

630 स्थानों पर एक साथ गूंजेगा हरियाली का संकल्प, 10 लाख पौधों के रोपण से पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई रफ्तार, तीन से पांच वर्षों तक होगी पौधों की देखभाल।

काशीपुर। पर्यावरण संरक्षण को केवल पेड़ लगाने की गतिविधि तक सीमित न मानते हुए संत निरंकारी मिशन ने प्रकृति के साथ मनुष्य के आत्मीय और जिम्मेदार संबंध को मजबूत करने की दिशा में व्यापक पहल को जनभागीदारी का रूप दिया है। बाबा हरदेव सिंह जी का प्रेरक संदेश ‘प्रदूषण अंदर हो या बाहर दोनों ही हानिकारक है’ आज भी इस अभियान की मूल भावना को दिशा प्रदान कर रहा है। इसी विचारधारा से प्रेरित होकर ‘वननेस वन-प्रकृति के साथ समरसता’ अभियान के माध्यम से मिशन पर्यावरणीय संतुलन, हरित विकास और स्वच्छ भविष्य की अवधारणा को समाज के बीच पहुंचाने में जुटा है। अभियान का केंद्र केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों में यह चेतना विकसित करना है कि प्रकृति की सुरक्षा प्रत्येक व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है। बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण, घटते हरित क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के दौर में यह पहल पर्यावरण के प्रति संवेदनशील सोच को व्यवहार में बदलने का प्रयास बनकर सामने आई है। संत निरंकारी मिशन की इस गतिविधि में आध्यात्मिक भावना के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का समन्वय दिखाई देता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है और हरित भविष्य की दिशा में सामूहिक प्रयासों को नई गति मिल रही है।

अगस्त 2021 में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन आशीर्वाद से शुरू की गई ‘वननेस वन’ पहल ने पिछले वर्षों में लगातार विस्तार हासिल किया है। प्रारंभिक स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयास अब देश के अनेक हिस्सों में लोगों को जोड़ने वाला व्यापक पर्यावरणीय अभियान बन चुका है। इस पहल के पीछे मूल विचार यह है कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच जो स्वाभाविक संतुलन है, उसे केवल भाषणों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष सेवा और निरंतर संरक्षण के जरिए मजबूत किया जाए। इसी सोच के तहत पौधारोपण के साथ-साथ लगाए गए पौधों की देखभाल, उनके विकास और आसपास के प्राकृतिक वातावरण को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मिशन की गतिविधियों से जुड़े श्रद्धालु और सेवादार अपने समय और श्रम का योगदान देकर इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। अभियान की बढ़ती पहुंच यह संकेत देती है कि पर्यावरण को लेकर समाज में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है, बशर्ते लोगों को उद्देश्यपूर्ण तरीके से जोड़ा जाए। ‘वननेस वन’ इसी दिशा में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को जीवन-मूल्य बनाने का प्रयास है, जिसका प्रभाव केवल वर्तमान पर्यावरणीय परिस्थितियों तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संतुलित वातावरण तैयार करने की सोच से भी जुड़ा हुआ है।

देशभर में अभियान की बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख करते हुए संत निरंकारी मण्डल के सचिव आदरणीय जोगिन्दर सुखीजा ने बताया कि भारत के विभिन्न राज्यों में अब तक लगभग 350 वृक्ष समूह स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही 600 से अधिक ‘वननेस वन’ स्थलों पर श्रद्धालु और सेवादार पौधों के संरक्षण तथा संवर्धन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह पहल किसी एक दिन आयोजित होने वाले पौधारोपण कार्यक्रम की सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है और इसके पीछे लंबे समय तक चलने वाली सेवा भावना जुड़ी हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में तैयार किए जा रहे वृक्ष समूह स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हरित क्षेत्र विकसित करने में योगदान दे रहे हैं। मिशन से जुड़े स्वयंसेवकों की सहभागिता अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान कर रही है, क्योंकि पौधा लगाने के बाद उसकी सुरक्षा, पानी, देखभाल और विकास पर ध्यान देना ही वास्तविक पर्यावरण संरक्षण की कसौटी है। इस पहल के जरिए समाज में यह संदेश भी मजबूत हो रहा है कि प्रकृति के लिए किया गया छोटा प्रयास तब बड़ा परिवर्तन बनता है, जब उसमें निरंतरता और सामूहिक भागीदारी शामिल हो। 350 वृक्ष समूह और 600 से अधिक सक्रिय ‘वननेस वन’ स्थल अभियान के विस्तार की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं और बताते हैं कि मिशन पर्यावरणीय जिम्मेदारी को व्यापक सामाजिक सहभागिता में बदलने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

पर्यावरण संरक्षण की इसी मुहिम को और व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन 23 अगस्त, रविवार को ‘वननेस वन’ महाअभियान के छठे चरण का शुभारंभ करने जा रहा है। इस चरण में देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को एक साथ जोड़ते हुए 630 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के दौरान मिशन से जुड़े लाखों श्रद्धालु और स्वयंसेवक सेवा भावना के साथ भागीदारी करेंगे तथा लगभग 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इतने बड़े स्तर पर एक ही दिन विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण किया जाना पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इस आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें महानगरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अलग-अलग समुदायों और स्थानों को जोड़ा जा रहा है। उद्देश्य केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति नागरिक चेतना को मजबूत करना भी है। अभियान का छठा चरण ऐसे समय में सामने आ रहा है, जब प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के असंतुलित उपयोग को लेकर पूरी दुनिया चिंता व्यक्त कर रही है। ऐसे वातावरण में 10 लाख पौधों का प्रस्तावित रोपण जनसहभागिता के माध्यम से प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा सकता है, जो लोगों को अपने आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।

‘वननेस वन’ अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि पौधारोपण के बाद जिम्मेदारी समाप्त नहीं मानी जाती। मिशन द्वारा लगाए गए पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षण देने की दीर्घकालिक व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। प्रत्येक पौधे की लगभग तीन से पांच वर्षों तक नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया गया है, ताकि शुरुआती चरण में लगाए गए पौधे सुरक्षित रह सकें और समय के साथ मजबूत होकर विकसित हों। सामान्य तौर पर पौधारोपण कार्यक्रमों में पौधे लगाने के बाद उनकी देखरेख एक बड़ी चुनौती बन जाती है, लेकिन इस पहल में इसी पहलू को प्राथमिकता दी जा रही है। नियमित संरक्षण मिलने से पौधों के जीवित रहने की संभावना बढ़ती है और वे धीरे-धीरे छोटे सघन वनों का स्वरूप ग्रहण कर सकते हैं। ऐसे विकसित हरित क्षेत्र स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देने, पक्षियों और छोटे जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही वृक्षों की बढ़ती संख्या तापमान, वायु गुणवत्ता और मिट्टी के संरक्षण जैसे व्यापक पर्यावरणीय पहलुओं पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इस दृष्टि से ‘वननेस वन’ को केवल पौधारोपण अभियान कहना इसके वास्तविक उद्देश्य को सीमित कर देगा, क्योंकि इसकी अवधारणा पौधा लगाने से लेकर उसके वृक्ष बनने तक निरंतर सेवा और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया पर आधारित है।

आज के दौर में पर्यावरणीय संकट का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के स्वरूप में बदलाव, बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, वायु प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव मानव समाज के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। ऐसे समय में हरित क्षेत्रों का विस्तार केवल सौंदर्य या सजावट का विषय नहीं रह गया है, बल्कि स्वस्थ जीवन और टिकाऊ भविष्य की आवश्यकता बन चुका है। संत निरंकारी मिशन की ‘वननेस वन-प्रकृति के साथ समरसता’ पहल इसी व्यापक संदर्भ में महत्व रखती है। अभियान लोगों को यह समझाने का प्रयास करता है कि पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं या संस्थागत प्रयासों से संभव नहीं होगा; इसमें नागरिकों की सक्रिय भूमिका भी आवश्यक है। जब बड़ी संख्या में लोग पौधारोपण, संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़ते हैं, तब स्थानीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव की संभावनाएं बढ़ती हैं। मिशन की ओर से आयोजित गतिविधियां इसी जनभागीदारी को मजबूत करने का माध्यम बन रही हैं। पौधों की देखभाल के साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशील व्यवहार, संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और स्वच्छ परिवेश के महत्व को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस प्रकार यह पहल पर्यावरणीय सेवा को सामाजिक चेतना से जोड़ते हुए आने वाले समय के लिए अधिक संतुलित और टिकाऊ जीवनशैली की ओर संकेत करती है।

अभियान की सामाजिक उपयोगिता इस तथ्य से भी स्पष्ट होती है कि इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को समान रूप से शामिल किया जा रहा है। शहरों में तेजी से बढ़ते निर्माण और सीमित हरित क्षेत्रों के कारण पेड़-पौधों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है, वहीं ग्रामीण इलाकों में भी प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय पारिस्थितिकी के संरक्षण की जरूरत बनी हुई है। 630 स्थानों पर एक साथ होने वाला प्रस्तावित कार्यक्रम इस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसके माध्यम से अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को एक साझा पर्यावरणीय उद्देश्य से जोड़ा जाएगा। लाखों श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों की भागीदारी इस प्रयास को जनआंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खास बात यह है कि अभियान में सेवा को केवल आयोजन के दिन तक सीमित न रखकर लंबे समय तक जारी रखने पर जोर है। इससे लोगों में यह भावना विकसित होती है कि प्रकृति के लिए किया गया योगदान तभी सार्थक है, जब उसके परिणामों की जिम्मेदारी भी स्वीकार की जाए। पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षण देने की सोच समाज में धैर्य, निरंतरता और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को भी मजबूत करती है। पर्यावरणीय दृष्टि से यह मॉडल अन्य सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है, क्योंकि इसमें संख्या के साथ गुणवत्ता और दीर्घकालिक संरक्षण को बराबर महत्व दिया गया है।

बाबा हरदेव सिंह जी का यह संदेश कि प्रदूषण चाहे भीतर हो या बाहर, दोनों ही हानिकारक हैं, इस पूरे अभियान को एक व्यापक मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करता है। बाहरी प्रदूषण को कम करने के लिए पेड़ लगाना और पर्यावरण को स्वच्छ रखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ मनुष्य की सोच, व्यवहार और प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव भी उतना ही आवश्यक माना गया है। इसी कारण ‘वननेस वन’ अभियान को केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम के बजाय चेतना और सेवा से जुड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तब वास्तविक रूप लेती है, जब व्यक्ति अपने आसपास के वातावरण को अपनी जिम्मेदारी समझने लगे। पेड़ को केवल एक पौधे के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवनदायी संसाधन के रूप में देखने की सोच इस अभियान के केंद्र में दिखाई देती है। स्वच्छ हवा, संतुलित पारिस्थितिकी, जैव विविधता और हरित वातावरण आने वाली पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़े विषय हैं। इसलिए पर्यावरण की रक्षा का अर्थ केवल वर्तमान की जरूरतें पूरी करना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखना भी है। मिशन की गतिविधियां इसी जिम्मेदारी को सामूहिक संकल्प में बदलने का प्रयास कर रही हैं, जिसमें आध्यात्मिक प्रेरणा, सामाजिक सेवा और पर्यावरणीय संरक्षण एक साथ दिखाई देते हैं।

काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी इस व्यापक संदेश का प्रभाव पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली गतिविधियों के रूप में देखा जा सकता है। ‘वननेस वन’ की अवधारणा लोगों को यह अवसर देती है कि वे प्रकृति के संरक्षण में प्रत्यक्ष रूप से योगदान करें और लगाए गए पौधों के विकास की प्रक्रिया से जुड़ें। जब किसी पौधे को वर्षों तक देखभाल के साथ वृक्ष का रूप लेते हुए देखा जाता है, तो पर्यावरण संरक्षण केवल एक विचार नहीं रहता, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव में बदल जाता है। इसी प्रकार सामूहिक रूप से लगाए गए पौधे सामाजिक सहभागिता और साझा जिम्मेदारी का प्रतीक बन सकते हैं। 23 अगस्त को प्रस्तावित छठे चरण में लगभग 10 लाख पौधों का लक्ष्य इस विचार को देशव्यापी स्तर पर और मजबूत करेगा। 630 स्थानों पर एक साथ होने वाली गतिविधियां यह संदेश देंगी कि प्रकृति संरक्षण किसी एक क्षेत्र, संस्था या वर्ग की जिम्मेदारी नहीं है। हर व्यक्ति अपने स्तर पर इसमें भूमिका निभा सकता है। पौधा लगाना शुरुआत है, उसकी रक्षा करना निरंतर सेवा है और उसे वृक्ष बनते देखना उस सेवा का परिणाम। इसी क्रम में ‘वननेस वन-प्रकृति के साथ समरसता’ अभियान हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित करने का प्रयास कर रहा है। जानकारी प्रकाश खेड़ा द्वारा दी गई है। आने वाले समय में इस अभियान के विस्तार से और अधिक लोगों के प्रकृति संरक्षण से जुड़ने की उम्मीद है।

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