काशीपुर। विधानसभा क्षेत्र में राशन कार्ड से जुड़ी समस्याओं को लेकर कांग्रेस नेता और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रवि ढिंघरा ने खाद्यापूर्ति कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों के सामने जनता की परेशानियों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से आम लोग राशन कार्ड बनवाने, परिवार के सदस्यों के नाम जोड़ने और यूनिट बढ़वाने के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हो रहा है। रवि ढिंघरा का कहना था कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए राशन कार्ड केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि उनके घर की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण सहारा है, ऐसे में महीनों तक नाम नहीं जुड़ना या यूनिट नहीं बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जनता को कभी अगले दिन आने, कभी दो दिन बाद आने और कभी सुबह-शाम कार्यालय के चक्कर लगाने के लिए कहा जाता है। इस स्थिति में लोगों का समय, पैसा और मेहनत तीनों बर्बाद हो रहे हैं। उनका आरोप था कि काशीपुर विधानसभा क्षेत्र में पिछले करीब नौ महीनों से राशन कार्ड संबंधी समस्याएं लगातार उनके सामने आती रही हैं और उन्होंने कई मामलों में विभागीय स्तर पर समाधान कराने की कोशिश की है। इसी मुद्दे को लेकर वह खाद्यापूर्ति कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से सीधे जवाब मांगते हुए कहा कि जनता को राहत देने के लिए अब ठोस कार्रवाई जरूरी है।
रवि ढिंघरा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश की स्थिति पर टिप्पणी करने के बजाय वह फिलहाल काशीपुर विधानसभा क्षेत्र की बात कर रहे हैं, जहां पिछले नौ महीनों के दौरान उन्हें राशन कार्ड से संबंधित ऐसी अनेक शिकायतें मिली हैं, जिनका समाधान अभी तक पूरी तरह नहीं हो सका है। उनका कहना था कि किसी परिवार के सदस्य का नाम राशन कार्ड में शामिल कराने के लिए लोगों को बार-बार कार्यालय जाना पड़ रहा है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके दस्तावेज पूरे होने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य पात्र परिवारों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराना है तो फिर एक साधारण नाम जोड़ने या यूनिट बढ़ाने के लिए आम नागरिकों को इतनी लंबी प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता रोजमर्रा की जरूरतों और आर्थिक परेशानियों के बीच विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है। रवि ढिंघरा ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका का वास्तविक अर्थ तभी है जब वे आम लोगों की समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाएं और समाधान के लिए लगातार दबाव बनाएं। उन्होंने कहा कि बड़े पदों पर बैठे कई जनप्रतिनिधि जनता की छोटी-छोटी समस्याओं तक नहीं पहुंच पाते, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले छोटे जनप्रतिनिधियों को हर दिन लोगों की परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से वह खाद्यापूर्ति विभाग के समक्ष जनता की आवाज लेकर पहुंचे हैं और अधिकारियों से स्पष्ट जवाब की मांग की है।
सबसे ज्यादा नाराजगी राशन कार्ड में यूनिट बढ़ाने की प्रक्रिया को लेकर सामने आई। रवि ढिंघरा ने कहा कि सरकार की ओर से पात्र परिवारों को सुविधा देने की बात कही जाती है, लेकिन वास्तविक स्थिति में एक यूनिट बढ़वाने के लिए भी लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में सवाल उठाया कि आखिर किसी व्यक्ति के परिवार में सदस्य मौजूद है तो उसकी यूनिट कब बढ़ेगी और क्या विभाग तब कार्रवाई करेगा जब वह व्यक्ति इस दुनिया में ही नहीं रहेगा। इसी संदर्भ में उन्होंने एक 15 वर्षीय बच्चे का उदाहरण सामने रखा, जिसके राशन कार्ड में यूनिट बढ़वाने के लिए उन्हें स्वयं खाद्यापूर्ति कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़े। उनका कहना था कि काफी प्रयास, निवेदन और विभागीय दौड़भाग के बाद जाकर उस बच्चे की यूनिट बढ़ाई जा सकी। रवि ढिंघरा ने दावा किया कि ऐसे ही मामलों में अब तक कम से कम 70 यूनिट बढ़वाने के लिए वह प्रयास कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को एक-एक परिवार की समस्या लेकर बार-बार विभागीय कार्यालय जाना पड़े, तब यह समझा जा सकता है कि आम नागरिक किस स्तर की परेशानी झेल रहा होगा। उनका आरोप था कि ग्राम पंचायत मापुरर्गी के कई पात्र परिवार भी इसी तरह की दिक्कतों से जूझ रहे हैं और वहां से जुड़े लगभग 70 यूनिट बढ़ाने के मामलों में भी विभागीय प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी। उन्होंने साफ कहा कि गरीब परिवारों को उनके अधिकार से जुड़ी सुविधा दिलाना किसी पर एहसान नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
राशन कार्डों की संख्या और उनके वितरण को लेकर भी रवि ढिंघरा ने खाद्यापूर्ति विभाग के सामने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए उन्होंने गुलाबी और सफेद राशन कार्ड उपलब्ध कराने की मांग की थी। उनके अनुसार कम से कम 15 गुलाबी राशन कार्ड और 15 सफेद राशन कार्ड की जरूरत सामने रखी गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को कार्ड मिलने में देरी होने का सीधा असर गरीब परिवारों पर पड़ता है, क्योंकि राशन कार्ड के माध्यम से मिलने वाली सरकारी सुविधाएं उनके घरेलू बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। रवि ढिंघरा ने कहा कि वह खाद्यापूर्ति विभाग के अधिकारी पाठक जी के समक्ष भी इसी मामले को लेकर अपनी बात रखने पहुंचे हैं। उन्होंने मांग की कि जिन परिवारों के राशन कार्ड काटे गए हैं, उनकी पूरी जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किन आधारों पर उनके कार्ड निरस्त किए गए। उनका कहना था कि यदि किसी पात्र परिवार का कार्ड बिना उचित कारण काटा गया है तो उसे बहाल किया जाना चाहिए और यदि प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके राशन कार्ड की स्थिति क्या है, नाम क्यों नहीं जुड़ रहा है और यूनिट बढ़ाने में इतनी देरी किस कारण से हो रही है। उन्होंने विभाग से पारदर्शी व्यवस्था अपनाने की मांग की।
मामला केवल शिकायत तक सीमित न रहे, इसके लिए रवि ढिंघरा ने खाद्यापूर्ति विभाग को 15 दिन का अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर राशन कार्ड से जुड़ी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। उनके अनुसार पहले चरण में खाद्यापूर्ति कार्यालय के बाहर 48 घंटे का धरना दिया जाएगा। यदि 48 घंटे के धरने के बाद भी अधिकारियों की ओर से सुनवाई नहीं होती है तो इसके बाद अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और जनता के अधिकारों से जुड़े मामलों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहेंगे। रवि ढिंघरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विभागीय स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वह खाद्यापूर्ति कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाएंगे और जिन मामलों में उन्हें अनियमितता की आशंका है, उनकी जानकारी सामने लाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों में यह धारणा बन रही है कि राशन कार्ड में नाम जोड़ने अथवा अन्य प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के काम नहीं होता। हालांकि इस तरह के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रवि ढिंघरा ने विभाग से ऐसी शिकायतों की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी सुविधा के लिए किसी नागरिक को अनुचित भुगतान करने का दबाव महसूस होता है तो यह बेहद गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अपने बयान में रवि ढिंघरा ने यह भी कहा कि राशन कार्ड से जुड़े मामलों में गरीब परिवारों की परेशानी को केवल कागजी प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस परिवार की आय सीमित है, उसके लिए सरकारी राशन व्यवस्था महत्वपूर्ण सहारा होती है। ऐसे में नाम जुड़ने, यूनिट बढ़ने या नया कार्ड बनने में देरी होने से परिवार को प्रत्यक्ष नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना था कि गांवों और ग्राम पंचायतों में रहने वाले अनेक लोग विभागीय प्रक्रियाओं और ऑनलाइन व्यवस्थाओं की जटिलताओं से पूरी तरह परिचित नहीं होते। ऐसे लोगों को कार्यालय में सही जानकारी और सहयोग मिलना चाहिए, न कि एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वह लगातार लोगों के बीच जाते हैं और उनकी शिकायतें सुनते हैं, इसलिए उन्हें पता है कि राशन कार्ड से जुड़े मामलों में कितनी बेचौनी है। रवि ढिंघरा ने कहा कि यदि किसी दस्तावेज में कमी है तो अधिकारी स्पष्ट रूप से बता दें कि क्या कमी है और उसे पूरा करने का रास्ता भी बताएं। लेकिन यदि सभी कागजात उपलब्ध हैं और व्यक्ति पात्र है तो फिर अनावश्यक देरी का कोई औचित्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से आग्रह किया कि पुराने लंबित मामलों की सूची तैयार कर एक विशेष अभियान चलाकर उनका निस्तारण किया जाए, ताकि जनता को बार-बार कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें।
खाद्यापूर्ति कार्यालय पहुंचने के दौरान रवि ढिंघरा ने जिस तरह से अपनी बात रखी, उसमें शिकायत के साथ-साथ आंदोलन की चेतावनी भी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि वह हाथ जोड़कर अधिकारियों से निवेदन करने आए हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य पहले चरण में टकराव पैदा करना नहीं बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान कराना है। लेकिन यदि निवेदन के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जनता लंबे समय से इंतजार कर रही है और अब उसे केवल आश्वासन नहीं बल्कि परिणाम चाहिए। रवि ढिंघरा ने कहा कि कल आने, परसों आने या सुबह-शाम आने की प्रक्रिया से आम आदमी परेशान हो चुका है। उनके अनुसार कई लोग मजदूरी छोड़कर कार्यालय पहुंचते हैं और घंटों इंतजार करने के बाद भी उनका काम नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में सरकारी सुविधा हासिल करने की प्रक्रिया ही उनके लिए परेशानी का कारण बन जाती है। उन्होंने कहा कि विभाग को एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें आवेदन की स्थिति स्पष्ट रूप से पता चल सके और प्रत्येक पात्र व्यक्ति को निर्धारित समय के भीतर सेवा मिले। उन्होंने यह भी कहा कि राशन कार्ड से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाएं, ताकि ग्रामीणों को बार-बार काशीपुर के कार्यालय तक न आना पड़े। उनके मुताबिक ऐसी व्यवस्था से विभाग और जनता दोनों का समय बचेगा।
रवि ढिंघरा ने भाजपा से जुड़े बड़े जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जनता ने जिन लोगों को प्रतिनिधित्व का अवसर दिया है, उनसे उम्मीद होती है कि वे आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को समझेंगे और अधिकारियों के सामने मजबूती से रखेंगे। उनका आरोप था कि बड़े पदों पर पहुंचने के बाद कुछ जनप्रतिनिधि आम जनता से दूरी बना लेते हैं, जबकि छोटे स्तर के जनप्रतिनिधि गांव-गांव और परिवार-परिवार की समस्याओं से सीधे जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि राशन कार्ड, नाम जोड़ने, यूनिट बढ़ाने और कार्ड कटने जैसी समस्याएं देखने में छोटी लग सकती हैं, लेकिन जिस परिवार को सरकारी राशन पर निर्भर रहना पड़ता है, उसके लिए यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जनता की बुनियादी जरूरतों से जुड़े मामलों में सभी जनप्रतिनिधियों को एक साथ खड़ा होना चाहिए। रवि ढिंघरा ने कहा कि वह कांग्रेस नेता के रूप में अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के तौर पर क्षेत्र के लोगों की समस्याएं भी उठा रहे हैं। उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि राशन कार्ड का मुद्दा किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
यह पूरा मामला प्रतापपुर धनौरी जिला पंचायत क्षेत्र से भी जुड़ा हुआ है, जहां रवि ढिंघरा लंबे समय से सक्रिय बताए जाते हैं। वह पूर्व में जिला पंचायत पद के प्रत्याशी भी रह चुके हैं और वर्तमान में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की भूमिका में हैं। इसी क्षेत्र में लोगों के बीच सक्रिय रहने के कारण राशन कार्ड से संबंधित शिकायतें उनके सामने पहुंचीं और उन्होंने इन्हें विभागीय स्तर पर उठाने का फैसला किया। खाद्यापूर्ति कार्यालय पहुंचकर उन्होंने अधिकारियों से बातचीत की और अपने क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखा। उनके प्रदर्शन और बयान से यह संकेत मिला कि यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं हुआ तो मुद्दे को बड़े आंदोलन का रूप दिया जा सकता है। फिलहाल विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, इसलिए रवि ढिंघरा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। लेकिन जिस तरह से उन्होंने 15 दिन का अल्टीमेटम, उसके बाद 48 घंटे के धरने और फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है, उससे यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि खाद्यापूर्ति विभाग लंबित राशन कार्ड, यूनिट बढ़ाने, नाम जोड़ने और कार्ड काटे जाने से जुड़े मामलों पर क्या कदम उठाता है और क्या 15 दिन के भीतर शिकायतों का समाधान संभव हो पाता है।
राशन कार्ड को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ सरकार पात्र लोगों तक खाद्यान्न और अन्य सुविधाएं पहुंचाने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ यदि किसी परिवार को केवल नाम जुड़वाने या यूनिट बढ़ाने के लिए महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें तो व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। रवि ढिंघरा ने इसी बिंदु को आधार बनाकर अधिकारियों से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि उन लोगों के लिए है जो स्वयं अपनी बात प्रभावी ढंग से अधिकारियों तक नहीं पहुंचा पाते। उनका कहना है कि यदि 15 दिन के भीतर ठोस कार्रवाई होती है तो जनता को राहत मिलेगी, लेकिन यदि समस्या जस की तस रहती है तो आंदोलन को रोकना उनके लिए संभव नहीं होगा। फिलहाल काशीपुर खाद्यापूर्ति कार्यालय पर उठी यह आवाज कितनी दूर तक पहुंचती है और विभाग इस पर किस स्तर की कार्रवाई करता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। इतना जरूर है कि राशन कार्ड में नाम जोड़ने, यूनिट बढ़ाने और कार्ड कटने की शिकायतों ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। अब जनता की नजर विभागीय कार्रवाई पर है, जबकि रवि ढिंघरा ने संकेत दे दिया है कि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।





