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श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर भाजपा का शक्ति प्रदर्शन राष्ट्रवाद के संकल्प से गूंजा हरिद्वार

हरिद्वार। पवित्र और ऐतिहासिक धरती पर राष्ट्रवाद की एक बेहद नई और ऊर्जावान बयार बहती हुई दिखाई दी है, जिसने संपूर्ण राजनीतिक गलियारों में एक नया जोश भर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला संगठन द्वारा जगजीतपुर स्थित मुख्य भाजपा कार्यालय में महान राष्ट्रनायक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पावन 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक बेहद भव्य और गरिमापूर्ण स्मरण पक्ष के अंतर्गत पुष्पांजलि कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायी अवसर पर वहां उपस्थित तमाम वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के तैलचित्र पर अत्यंत श्रद्धा भाव से सुगन्धित पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी और सादर अंजलि अर्पित की। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि जिला मुख्यालय पर उनके महान जीवन दर्शन और राष्ट्रहित से जुड़े क्रांतिकारी विचारों पर आधारित एक अत्यंत ज्ञानवर्धक और भव्य प्रदर्शनी का भी भव्य आयोजन किया गया था। इस अनूठी और देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रदर्शनी का वहां पहुँचे सभी विशिष्ट अतिथियों, प्रबुद्ध नागरिकों और कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अत्यंत गहराई और उत्सुकता के साथ अवलोकन किया और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया। इस पूरे भव्य और अनुशासित कार्यक्रम की गरिमापूर्ण अध्यक्षता भाजपा के जुझारू जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने की, जिनके कुशल नेतृत्व में कार्यक्रम को एक नई ऊंचाई और भव्यता प्राप्त हुई।

राष्ट्रवाद के इस सबसे बड़े समागम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा के माननीय सांसद नरेश बंसल ने अपने ओजस्वी और तीखे भाषण से पूरे पंडाल में राष्ट्रभक्ति की अलख जगा दी। उन्होंने बेहद तार्किक ढंग से अपनी बात रखते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक साधारण राजनेता मात्र नहीं थे, बल्कि वह एक अत्यंत महान समाजसेवी, अद्वितीय शिक्षाविद और युगद्रष्टा राष्ट्र चिंतक भी थे, जिन्होंने देश की दिशा बदलने का काम किया। राजनीतिक पटल पर उनकी सबसे बड़ी क्रांति का उल्लेख करते हुए सांसद ने कहा कि उन्होंने ही श्एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगेश् का वह ऐतिहासिक और गगनभेदी उद्घोष किया था, जिसने तत्कालीन सत्ता की नींव हिला दी थी और इसी अखंड भारत के सपने को पूरा करने तथा देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने बहुमूल्य प्राणों की हंसते-हंसते आहुति दे दी थी। नेहरू मंत्रिमंडल में देश के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए नरेश बंसल ने कहा कि उन्होंने ही विषम परिस्थितियों में देश के औद्योगिक विकास की सबसे मजबूत नींव रखी थी। उनके दूरदर्शी प्रयासों के कारण ही देश को चितरंजन लोकोमोटिव फैक्ट्री, महान दामोदर घाटी परियोजना और सिंदरी फर्टिलाइजर जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक औद्योगिक उपक्रम उपहार स्वरूप मिल सके, जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होने का काम किया।

सांसद नरेश बंसल ने डॉ. मुखर्जी के बहुआयामी व्यक्तित्व के सामाजिक और शैक्षणिक पहलुओं पर भी अत्यंत विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि वह सामाजिक क्षेत्र में भी एक बेहद कुशल और विलक्षण शिक्षाविद के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने अपनी अद्भुत मेधा के बल पर अत्यंत कम उम्र में ही कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बनने का गौरव हासिल किया और उस सर्वाेच्च पद पर रहते हुए शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐसे युगांतकारी और ऐतिहासिक सुधार किए जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। उन्होंने आगे कहा कि डॉ. मुखर्जी ने ही भारतीय जनसंघ जैसी महान संस्था की स्थापना कर देश की राष्ट्रवादी राजनीति को एक बिल्कुल नई और वैचारिक दिशा देने का अविस्मरणीय कार्य किया था। वर्तमान परिदृश्य से उनके विचारों को जोड़ते हुए सांसद ने कहा कि आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के साहसिक नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कश्मीर से विवादित धारा 370 को हमेशा के लिए मटियामेट कर उनके उसी अधूरे और पवित्र सपने को धरातल पर साकार करने का ऐतिहासिक काम किया है। अब हम सभी राष्ट्रभक्तों का यह परम दायित्व है कि उनके इन महान सामाजिक और राजनीतिक विचारों को देश के घर-घर तक पहुँचाएँ ताकि हर नागरिक के भीतर श्राष्ट्र प्रथमश् की भावना को और अधिक मजबूती प्रदान की जा सके।

इसी वैचारिक श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने अपने बेहद आक्रामक और प्रभावशाली संबोधन में डॉ. मुखर्जी के बलिदान को याद किया। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वास्तव में भारतीय जनसंघ के मूल संस्थापक और वैचारिक स्तंभ थे, जिन्होंने भारत की मुख्यधारा की राजनीति में शुद्ध राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक एकता और देश की अखंडता के सर्वाेपरि विचार को स्थापित करने का भगीरथ प्रयास किया था। उन्होंने तत्कालीन सरकार की तुष्टिकरण की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए और देशहित से समझौता न करते हुए नेहरू मंत्रिमंडल से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया था और तुरंत बाद जनसंघ का गठन कर कश्मीर को पूरी तरह से भारत का अभिन्न और अटूट अंग बनाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी ऐतिहासिक आंदोलन की शुरुआत कर दी थी। एक महान शिक्षाविद और कुशल उद्योग मंत्री के रूप में उनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए मदन कौशिक ने कहा कि उन्होंने देश के औद्योगिक ढांचे और शिक्षा व्यवस्था को भारतीयता के रंग में ढालने का ऐतिहासिक कार्य किया था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी भाजपा सरकार उन्हीं के बताए उच्च आदर्शों और सिद्धांतों पर चलकर पूरे देश को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और परम वैभवशाली बना रही है, इसलिए हमें भी उनके दिखाए मार्ग पर चलकर राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वस्व योगदान देना चाहिए।

समारोह में वैचारिक विमर्श को और अधिक गहराई देते हुए भाजपा के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष एवं हरिद्वार जिले के संगठन प्रभारी अनिल गोयल ने अपने अत्यंत गंभीर और प्रेरणादायी उद्बोधन में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अनिल गोयल ने भावुक और ओजस्वी स्वर में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने कश्मीर को भारत का पूर्ण और वास्तविक अभिन्न अंग बनाने के लिए जो अभूतपूर्व और अविस्मरणीय संघर्ष किया था, उसे भारत के इतिहास में हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियां उससे प्रेरणा लेती रहेंगी। नेहरू मंत्रिमंडल में देश के उद्योग मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश के तीव्र औद्योगीकरण और आर्थिक मोर्चे पर देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़े कदम उठाए थे जो मील का पत्थर साबित हुए। उन्होंने देश की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए जेल की सलाखों के पीछे जाना सहर्ष स्वीकार किया और अंततः देश की एकता के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान दे दिया। संगठन प्रभारी ने कहा कि उनका पूरा जीवन त्याग, तपस्या, कड़े संघर्ष और निश्छल राष्ट्रभक्ति का एक जीवंत प्रतीक है, इसलिए आज के समय में हमें केवल औपचारिकता न निभाकर उनके महान विचारों को अपने जीवन में पूरी तरह आत्मसात करना चाहिए और समाज सेवा, राष्ट्र सेवा और संगठन की सेवा में अपना तन, मन और धन पूरी तरह समर्पित कर देना चाहिए, क्योंकि ऐसा करके ही हम सच्चे मायने में उन्हें अपनी सच्ची और वास्तविक श्रद्धांजलि अर्पित कर पाएंगे।

इस भव्य और विशाल देशभक्ति कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए संगठन के जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया और कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका। जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने अत्यंत गर्व के साथ कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी देश में प्रखर राष्ट्रवाद के सबसे बड़े प्रतीक और प्रकाश स्तंभ थे, जिन्होंने भारत माता की एकता, अखंडता और हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को विदेशी और विघटनकारी ताकतों से बचाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया और अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनके द्वारा स्थापित किए गए उच्च आदर्श और सिद्धांत आज भी हम जैसे करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा और ऊर्जा के स्रोत हैं और भारतीय जनता पार्टी उनके दिखाए गए उसी गौरवशाली मार्ग पर निरंतर चलते हुए राष्ट्र निर्माण के अपने महान संकल्प को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही है। इस ऐतिहासिक और गरिमामयी जयंती कार्यक्रम के पावन अवसर पर मंच पर और दीर्घा में रानीपुर के लोकप्रिय विधायक आदेश चौहान, हरिद्वार की महापौर किरण जैसल, और माननीय राज्य मंत्री डॉ जयपाल चौहान की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनके साथ ही वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश जामदानी, संदीप गोयल, विकास तिवारी, सचिन अग्रवाल, लव शर्मा, आशु चौधरी, सीमा चौहान, निपेंद्र चौधरी, धर्मेंद्र चौहान, राजवीर कश्यप, जसवीर बसेड़ा, प्रीति गुप्ता, लोकेश पाल, संजीव कुमार, एजाज हसन, विनीत जोली, रेनू शर्मा, रितु ठाकुर, उमेश पाठक, अरविंद कुशवाह, सुशील पवार, कैलाश भंडारी, नकली राम सैनी, लक्ष्मण सिंह नागर, रीता सैनी, विपिन शर्मा, बिन्दर पाल, पृथ्वी सिंह राणा, और रविंद्र सिंह सहित बहुत बड़ी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, ऊर्जावान कार्यकर्ता और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पूरे आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाया।

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