रामनगर। देवभूमि उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है और इसी कड़ी में नगर से लेकर धर्मनगरी हरिद्वार तक राजनीतिक तापमान अचानक बेहद बढ़ गया है। क्षेत्रीय सरोकारों और जनपक्षीय राजनीति का दावा करने वाली उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की नवनिर्वाचित केंद्रीय कार्यकारिणी की अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहली बैठक आगामी रविवार यानी 5 जून को हरिद्वार के पावन क्षेत्र में स्थित गुलजारी लाल धर्मशाला सप्तऋषि परिसर में आयोजित होने जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक जमावड़े को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर रणनीतिक तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं, क्योंकि यह बैठक आने वाले समय में प्रदेश की राजनीतिक दिशा और दशा तय करने में बेहद मील का पत्थर साबित हो सकती है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बैठक को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है और इस बात के साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस महामंथन के जरिए पार्टी सूबे के बड़े राजनैतिक दलों को सीधी चुनौती देने की एक बेहद आक्रामक और नई पटकथा लिखने की तैयारी में जुट गई है।
इस बेहद अहम और निर्णायक बैठक की पृष्ठभूमि और इसके मुख्य एजेंडे के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के कद्दावर नेता और केंद्रीय सचिव लालमणि ने मीडिया को बताया कि यह केवल एक सामान्य सांगठनिक बैठक नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भविष्य की एक बेहद मजबूत बुनियाद रखने का जरिया बनेगी। केंद्रीय सचिव लालमणि ने बड़े ही पुरजोर अंदाज में स्पष्ट किया कि गुलजारी लाल धर्मशाला सप्तऋषि हरिद्वार में होने वाले इस महामंथन के दौरान उपपा की इस नई और ऊर्जावान कार्यकारिणी के समक्ष संगठन के व्यापक विस्तार की एक बेहद ठोस और रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी, ताकि उत्तराखंड के गांव-गांव और कोने-कोने तक पार्टी की वैचारिक पहुंच को बेहद मजबूत और अचूक बनाया जा सके। इसके साथ ही इस महत्वपूर्ण बैठक में वर्तमान समय में देश के भीतर चल रहे गंभीर घटनाक्रमों और स्वयं उत्तराखंड प्रदेश के मौजूदा संवेदनशील व ज्वलंत राजनीतिक हालातों पर बहुत ही बारीकी, बेबाकी और गहराई से चर्चा की जाएगी, जिससे सत्तासीन ताकतों के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला जा सके।
पार्टी के भीतर चल रही इस रणनीतिक सुगबुगाहट का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर होने वाला बेहद गहन और तीखा मंथन है, जिसे लेकर केंद्रीय सचिव लालमणि ने अपनी बात को प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने साफ किया कि उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी अब बैकफुट पर रहकर राजनीति करने के मूड में कतई नहीं है और यही वजह है कि आने वाले समय में होने वाले सूबे के सबसे बड़े चुनावी रण यानी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों, टिकट वितरण के पैमानों, जनता के बीच उठाए जाने वाले मुद्दों और चुनावी चक्रव्यूह को रचने के लिए इस बैठक में शीर्ष स्तर पर बहुत ही गंभीर व रणनीतिक मंथन किया जाएगा। इस दौरान पार्टी के रणनीतिकार इस बात पर विशेष रूप से माथापच्ची करेंगे कि किस प्रकार क्षेत्रीय अस्मिता, जल-जंगल-जमीन के अधिकारों और स्थानीय बेरोजगारों के मुद्दों को लेकर जनता के बीच एक नया और बेहद आकर्षक नैरेटिव सेट किया जाए, जिससे पारंपरिक राजनैतिक दलों के किलों को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सके।
हरिद्वार की पावन धरती पर सजने वाली उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की इस बेहद हाई-प्रोफाइल और महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक में पार्टी के तमाम दिग्गज और शीर्ष चेहरों का जमावड़ा देखने को मिलेगा, जिससे इस आयोजन की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। केंद्रीय सचिव लालमणि द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस महाबैठक की अध्यक्षता और मुख्य मार्गदर्शन करने के लिए स्वयं श्उत्तराखंड परिवर्तन पार्टीश् के सम्मानित केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी विशेष रूप से मंच पर मौजूद रहेंगे। उनके साथ ही पार्टी की नीतियों को धरातल पर उतारने वाले कुशल रणनीतिकार और केन्द्रीय समन्वयक संयोजक पी.सी. तिवारी भी इस पूरी बैठक के दौरान अग्रिम पंक्ति में बैठकर संगठन को नई धार देने का काम करेंगे। इन शीर्ष नेताओं की उपस्थिति से न केवल नए पदाधिकारियों में एक अद्भुत और नया जोश देखने को मिलेगा, बल्कि पार्टी के भविष्य के रोडमैप को तय करने में भी उनके लंबे राजनैतिक अनुभवों का बेहद सीधा और बड़ा लाभ संगठन को मिलना तय माना जा रहा है।

राजनीतिक रूप से बेहद सजग माने जाने वाले इस बड़े महामंथन में पार्टी के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती देने वाले कई अन्य वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरे भी अपनी पूरी ताकत के साथ भागीदारी करने जा रहे हैं। केंद्रीय सचिव लालमणि ने आगे बताया कि इस बैठक को सफल बनाने और सांगठनिक प्रस्तावों को पारित करने के लिए उपपा के प्रधान महासचिव नरेश नोडियाल के साथ-साथ पार्टी के कद्दावर केंद्रीय उपाध्यक्ष कुलदीप मतवाल जेपी बडोनी और नारायण राम भी वहां पूरी मुस्तैदी से डटे रहेंगे। इसके अतिरिक्त पार्टी के कानूनी और सांगठनिक पक्षों को मजबूती देने के लिए एडवोकेट जे. पी. बडोनी भी इस महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा बनकर अपनी कानूनी और रणनीतिक सूझबूझ से कार्यकारिणी का मार्गदर्शन करेंगे। इन सभी वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी इस बात का साफ इशारा है कि उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी अब किसी भी स्तर पर कमजोर नहीं पड़ना चाहती और वह हर मोर्चे पर बेहद सोच-समझकर और फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही है।
हरिद्वार के गुलजारी लाल धर्मशाला सप्तऋषि में आयोजित होने जा रही इस पहली कार्यकारिणी बैठक की भव्यता और इसकी महत्ता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के सचिवालय और केंद्रीय विंग के लगभग सभी मुख्य सिपहसालार एक ही छत के नीचे मौजूद रहेंगे। केंद्रीय सचिव लालमणि ने गणमान्य लोगों की सूची को आगे बढ़ाते हुए बताया कि इस महाबैठक में पार्टी की रीढ़ माने जाने वाले केंद्रीय महासचिव दिनेश उपाध्याय अमीनुर रहमान और केंद्रीय सचिव भोपाल रावत भी पूरी ऊर्जा के साथ हिस्सा लेंगे। उनके साथ ही सांगठनिक गतिविधियों में हमेशा अग्रणी रहने वाले प्रकाश जोशी, किरणआर्य सहित पार्टी के तमाम अन्य केंद्रीय पदाधिकारियों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले बेहद निष्ठावान व कर्मठ कार्यकर्ताओं का एक बहुत बड़ा हुजूम इस ऐतिहासिक बैठक में अपनी सक्रिय और दमदार भागेदारी सुनिश्चित करने के लिए हरिद्वार पहुंच रहा है, जिससे इस राजनैतिक आयोजन को एक बेहद व्यापक और जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके।
इस पूरी घटना और आगामी बैठक ने उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में एक बेहद नई और गरमागरम बहस को जन्म दे दिया है, क्योंकि नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के गठन के ठीक बाद इतनी जल्दबाजी में बुलाई गई यह पहली बैठक पार्टी के आक्रामक इरादों को पूरी तरह से बयां कर रही है। समाचार पत्रों और राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर बेहद तीखी चर्चाएं चल रही हैं कि उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी जिस तरह से हरिद्वार जैसे बड़े धार्मिक और राजनैतिक केंद्र को अपनी पहली बैठक के लिए चुन रही है, उसके पीछे मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच एक मजबूत संतुलन बनाने की एक बहुत ही सोची-समझी और गहरी सियासी रणनीति छिपी हुई है। अब पूरे प्रदेश की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें आगामी रविवार 5 जून को होने वाली इस महाबैठक से निकलने वाले निष्कर्षों और फैसलों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यहां से निकलने वाले राजनैतिक प्रस्ताव और चुनावी रणनीतियां निश्चित तौर पर उत्तराखंड की भावी राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल लाने और सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह से बदलने का माद्दा रखती हैं।





