काशीपुर। महानगर कांग्रेस कमेटी की जिला अध्यक्ष अलका पाल ने सूबे के मुखिया के पांच साल के शासनकाल पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा हमला बोलते हुए वर्तमान सरकार की नीतियों को पूरी तरह से दिशाहीन और घोर जन-विरोधी करार दिया है। कांग्रेस की महिला नेत्री ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि इस डबल इंजन सरकार ने अपने पांच वर्षों के लंबे सेवाकाल में धरातल पर एक भी ऐसा ठोस कार्य नहीं किया जिसे गिनाया जा सके, जिसके दुष्परिणामस्वरूप आज पूरे उत्तराखंड में विकास की गति पूरी तरह से ठप और अवरुद्ध हो चुकी है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उन्होंने साफ कहा कि भाजपा राज में प्रदेश की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है क्योंकि जो वादे चुनाव के वक्त बड़े-बड़े मंचों से किए गए थे, वे आज पूरी तरह से हकीकत की कसौटी पर फेल साबित हुए हैं।
महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने प्रदेश की सबसे बड़ी दुखती रग पर हाथ रखते हुए ऊर्जा प्रदेश के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर रख दीं। उन्होंने बेहद गुस्से में कहा कि जिस राज्य को देश भर में बिजली उत्पादन का गढ़ माना जाता है, आज वही उत्तराखंड अघोषित विद्युत कटौती के काले साए में जीने को मजबूर है, जो सरकार के विकास के खोखले और कागजी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। उद्योगों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक, हर कोई इस भीषण बिजली संकट से त्रस्त है और सरकार मूकदर्शक बनी बैठी है। कांग्रेस नेत्री ने वित्तीय मोर्चे पर भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे और कहा कि जब से देवभूमि की धरती से कांग्रेस पार्टी सत्ता से बेदखल हुई है, तब से लेकर आज तक यह राज्य वित्तीय कुप्रबंधन के कारण 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के गहरे दलदल में पूरी तरह डूब चुका है। यह कर्ज प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है, लेकिन सत्ता में बैठे हुक्मरान केवल अपनी पीठ थपथपाने में मशगूल हैं।
उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे और जनसरोकारों से जुड़े गंभीर विषयों पर चर्चा करते हुए महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की बदहाली का पूरा कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रख दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज सूबे के भीतर चिकित्सा व्यवस्था वेंटिलेटर पर है, सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है और प्रदेश का शिक्षित युवा रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। कृषि क्षेत्र में किसानों की लगातार उपेक्षा हो रही है, जिससे तंग आकर पहाड़ों से मैदानी इलाकों की तरफ होने वाला पलायन अब एक गंभीर महामारी का रूप अख्तियार कर चुका है। इन तमाम बुनियादी और संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की निरंतर अनदेखी और उदासीनता ने उत्तराखंड के चहुंमुखी विकास के पहिये को पूरी तरह से रोक दिया है। हालात यह हो चुके हैं कि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी, दोनों ही आज इस भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था के कारण राज्य के काम नहीं आ पा रहे हैं और त्राहि-त्राहि मची हुई है।

प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर भी कांग्रेस ने मौजूदा सरकार के खिलाफ एक बेहद आक्रामक मोर्चा खोल दिया है। महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने अवैध खनन के सुलगते मुद्दे पर सरकार को बुरी तरह घेरते हुए कहा कि माफियाओं के साथ सत्ताधारियों की कथित मिलीभगत और बेखौफ अवैध खनन के काले कारोबार के चलते आज पूरे देश के भीतर उत्तराखंड की छवि बेहद धूमिल और कलंकित हो रही है। उन्होंने बेहद भावुक और कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि उत्तराखंड की पहचान कहे जाने वाले जल, जंगल और जमीन, इस वर्तमान भाजपा सरकार के साए में पूरी तरह से असुरक्षित और खतरे में आ चुके हैं। नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है और जंगलों को रसूखदारों के हवाले किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के पांच साल के कार्यकाल पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने साफ कहा कि धरातल पर तो कोई काम हुआ नहीं है, बल्कि तथाकथित विकास केवल बड़े-बड़े होल्डिंग्स, विज्ञापनों और सरकारी फाइलों के कागजों पर ही सिमट कर रह गया है।
कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार को पूरी तरह बेनकाब करते हुए महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने देवभूमि के इतिहास के सबसे काले और रूह कंपा देने वाले पन्नों को पलटा। उन्होंने बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री के इन 5 सालों के दंश भरे कार्यकाल में उत्तराखंड ने अंकिता भंडारी जैसे कई बेहद दर्दनाक और वीभत्स हत्याकांडों का दंश झेला है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। सबसे ज्यादा अफसोस और शर्म की बात तो यह है कि इन तमाम मामलों में जब-जब सत्ता से जुड़े किसी वीआईपी या रसूखदार सफेदपोश का नाम खुलकर सामने आया, तब-तब सरकार ने त्वरित और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले पर पर्दा डालने और अपराधियों को संरक्षण देने का काम किया। कांग्रेस नेत्री ने कहा कि अंकिता भंडारी को आज तक पूरा न्याय नहीं मिल पाना इस सरकार की नीयत को साफ तौर पर दर्शाता है, जिसने राज्य की बेटियों की सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रख दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम और पांच सालों के कामकाज का बारीक विश्लेषण करने के बाद महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने अंतिम निष्कर्ष के तौर पर कहा कि उत्तराखंड सरकार का यह 5 वर्ष का पूरा कार्यकाल हर मोर्चे पर पूरी तरह से एक बड़ा फेलियर और नाकाम साबित हुआ है। सरकार के पास जनता को दिखाने के लिए कोई भी वास्तविक उपलब्धि नहीं है, केवल जुमलों और वादों की एक लंबी फेहरिस्त है जिससे जनता का पेट नहीं भरने वाला है। उन्होंने दृढ़ता के साथ संकल्प दोहराते हुए कहा कि मुख्य विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी सरकार के खिलाफ चुप नहीं बैठने वाली है और जनता की बुनियादी समस्याओं, उनके हक-हकूक और देवभूमि की अस्मिता की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक सदैव पूरी मजबूती के साथ संघर्षशील रहेगी। काशीपुर महानगर कांग्रेस कमेटी आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र करेगी ताकि इस सोई हुई बहरी सरकार को जगाया जा सके और जनता को इस दमनकारी शासन से मुक्ति दिलाई जा सके।





