रामनगर। उत्तराखंड के विकास के इतिहास में रविवार का दिन एक बेहद स्वर्णिम और ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जब सूबे के मुखिया ने प्रदेश की जनता को कनेक्टिविटी की एक बहुत बड़ी सौगात सौंपी। राष्ट्रीय राजमार्ग-309 पर सालों से बरसात के मौसम में राहगीरों और पर्यटकों के लिए काल बनने वाले धनगढ़ी नाले के ऊपर आखिरकार वह बहुप्रतीक्षित और आलीशान पुल बनकर तैयार हो गया है, जिसका इंतजार कुमाऊं और गढ़वाल की जनता दशकों से कर रही थी। लगभग 220.90 मीटर लंबे इस बेहद आधुनिक और मजबूत प्रीस्ट्रेस बॉक्स गर्डर सेतु का लोकार्पण सूबे के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कर-कमलों द्वारा रिबन काटकर किया और इसे विधिवत रूप से आम जनता की आवाजाही के लिए समर्पित कर दिया। करीब 29.65 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुए इस शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के शुरू हो जाने से अब न केवल दो बड़े मंडलों के बीच की दूरी और समय में कमी आएगी, बल्कि सामरिक और पर्यटन के लिहाज से भी यह पूरा क्षेत्र अब एक नए और बेहद सुरक्षित युग में प्रवेश कर चुका है, जिससे स्थानीय निवासियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
इस बेहद भव्य और गरिमामय लोकार्पण समारोह के दौरान मंच पर उत्तराखंड और केंद्र सरकार के कई कद्दावर नेताओं और जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा देखने को मिला, जिन्होंने इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनकर क्षेत्र की जनता की खुशियों को दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री के साथ इस पावन अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा विशेष रूप से मौजूद रहे, जिनके साथ क्षेत्रीय राजनीति के दिग्गज चेहरे जैसे रामनगर के लोकप्रिय विधायक दिवान सिंह बिष्ट, रानीखेत के मुखर विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल और सल्ट क्षेत्र के ऊर्जावान विधायक महेश जीना ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इन तमाम जननेताओं के अलावा भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और बेहद भारी संख्या में उमड़े स्थानीय ग्रामीणों व क्षेत्रीय जनता ने मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न केवल फीता काटकर इस चमचमाते हुए नए पुल का औपचारिक उद्घाटन किया, बल्कि उन्होंने खुद सुरक्षा प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए पुल पर काफी दूर तक पैदल चलकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता का बेहद बारीकी से स्थलीय निरीक्षण भी किया और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
जनसभा को बेहद ओजस्वी और जोश से भरे अंदाज में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गर्व के साथ कहा कि यह नवनिर्मित संरचना महज सीमेंट और कंक्रीट से बना कोई साधारण पुल नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को आपस में जोड़ने और यहां की कनेक्टिविटी को एक नई व मजबूत रफ्तार देने वाला एक ऐतिहासिक जीवनदायिनी सेतु है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि इस धनगढ़ी पुल और इसके ठीक पास में ही निर्मित हुए पनोद पुल के पूरी तरह चालू हो जाने से अब मानसून के खौफनाक सीजन में इस मार्ग पर पैदा होने वाले जानलेवा खतरों और यातायात ठप होने की गंभीर समस्या का हमेशा-हमेशा के लिए एक स्थायी और मजबूत समाधान निकल आया है। मुख्यमंत्री ने पुरानी दर्दनाक यादों को ताजा करते हुए कहा कि इससे पहले जब भी पहाड़ों में मूसलाधार बारिश होती थी, तो ये बरसाती नाले उफान पर आ जाते थे और मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह से हफ्तों के लिए बाधित हो जाता था, जिससे न केवल गंभीर मरीजों और आम जनता को असहनीय व बेहद भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, बल्कि कई बार उफनते नाले को पार करने के चक्कर में गाड़ियां बह जाती थीं और जनहानि जैसी बेहद दुखद और विचलित करने वाली घटनाएं भी सामने आती थीं, जिन पर अब पूरी तरह से अंकुश लग जाएगा।
इस बेहद महत्वाकांक्षी और जनहित से जुड़ी बड़ी परियोजना को धरातल पर सफलतापूर्वक उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने देश के दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नई दिल्ली में बैठे केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ-साथ मंच पर मौजूद केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा का दिल की गहराइयों से आभार प्रकट किया। उन्होंने विपक्ष पर सीधा और तीखा सियासी हमला बोलते हुए कहा कि जिन अनिवार्य और बेहद महत्वपूर्ण विकास कार्यों को राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण आज से कई दशक पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, उन्हें हमारी डबल इंजन की सरकार अब बेहद तीव्र गति और आधुनिक तकनीक के साथ धरातल पर उतार रही है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि चाहे वह धनगढ़ी और पनोद के ये दोनों लाइफलाइन पुल हों, या फिर वर्षों से लटकी पड़ी जमरानी बांध परियोजना, सोंग बांध परियोजना और ऐतिहासिक लखवार परियोजना हो— इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स पर आज हमारी सरकार बहुत स्पष्ट नीति, पूरी तरह से साफ नीयत और जनता के मान-सम्मान व हित को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर बेहद ईमानदारी के साथ दिन-रात आगे बढ़ा रही है, जिसके परिणाम आज उत्तराखंड की धरती पर साफ तौर पर नजर आने लगे हैं।

अपने संबोधन के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार की कार्यप्रणाली और उसकी प्रतिबद्धता को जनता के सामने रखते हुए साफ कहा कि उनकी सरकार केवल चुनावों को ध्यान में रखकर बड़ी-बड़ी योजनाओं का खोखला शिलान्यास करने या सिर्फ पत्थर लगाने तक सीमित रहने वाली पारंपरिक सरकार नहीं है, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति यह है कि हम जिस भी जन कल्याणकारी परियोजना का शिलान्यास करते हैं, उसका समय सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ लोकार्पण करके जनता को सौंपने का माद्दा भी रखते हैं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान मंच पर उपस्थित सभी क्षेत्रीय विधायकों, जन प्रतिनिधियों और भाजपा संगठन के निष्ठावान पदाधिकारियों की पीठ थपथपाते हुए उनकी जमकर सराहना की और कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं है, बल्कि सभी के सामूहिक प्रयासों, लगातार की गई मॉनिटरिंग और जनता के अटूट विश्वास की बदौलत ही यह बेहद जटिल और महत्वपूर्ण परियोजना अपने निर्धारित समय के भीतर पूरी तरह से संपन्न हो सकी है, जो इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि अगर नीयत साफ हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
पुल के इतिहास और इसकी पृष्ठभूमि पर अगर नजर डाली जाए तो यह बात बेहद गौरतलब है कि वर्ष 2020 में इस अतिमहत्वपूर्ण पुल के निर्माण कार्य की नींव और शुरुआती कसरत तत्कालीन राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के भगीरथ प्रयासों और उनके द्वारा केंद्र सरकार के स्तर पर की गई मजबूत पैरवी के बाद ही संभव हो सकी थी। हालांकि किन्हीं अपरिहार्य कारणों और अतिव्यस्तता की वजह से इस भव्य लोकार्पण समारोह के मंच पर वर्तमान सांसद अनिल बलूनी स्वयं साक्षात रूप से मौजूद नहीं रह सके, लेकिन इसके बावजूद समारोह में शामिल हुए हजारों स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों ने खुले दिल से यह स्वीकार किया कि इस ठप पड़ी परियोजना को दोबारा से पंख लगाने और इसे केंद्रीय फंड से मंजूरी दिलाकर गति प्रदान करने में उनका योगदान बेहद अतुलनीय और हमेशा याद रखने योग्य रहा है। अब धनगढ़ी पुल के इस विधिवत और शानदार लोकार्पण के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग-309 पर चौबीसों घंटे और बारहों महीने आवागमन पूरी तरह से महफूज, सुगम और बेहद आलीशान हो जाएगा, जिससे इस पूरे पहाड़ी बेल्ट की तकदीर और तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।
इस ऐतिहासिक पुल के चालू होने के दूरगामी परिणामों को लेकर क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल स्थानीय पहाड़ी आबादी को जिला मुख्यालयों तक पहुंचने में सुगमता होगी, बल्कि उत्तराखंड की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन उद्योग, स्थानीय फल व सब्जी व्यापार और विशेष रूप से किसी भी प्राकृतिक आपदा या आपातकाल के समय राहत एवं बचाव कार्यों को एक बहुत ही नई और तीव्र गति मिलने वाली है, क्योंकि अब सेना और राहत दल बिना रुके सीधे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगे। इस बेहद बड़ी और बहुप्रतीक्षित सौगात के मिलने पर पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों, व्यापारियों, टैक्सी ऑपरेटरों और होटल व्यवसायियों ने नाच-गाकर और मिठाइयां बांटकर अपनी असीम खुशी का इजहार किया है और इस नवनिर्मित महासेतु को कुमाऊं और गढ़वाल के बीच केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि उत्तराखंड के समग्र विकास, अटूट एकता और बेहतर अंतःप्रांतीय संपर्क का एक बेहद चमकता हुआ नया और आधुनिक प्रतीक बताया है जो आने वाली पीढ़ियों के सफर को भी आसान बनाएगा।





