काशीपुर। उत्तराखंड के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र काशीपुर को आधुनिकता के वैश्विक नक्शे पर चमकाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठा लिया है। नगर निगम की हालिया संपन्न हुई बोर्ड बैठक विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है, जहां शहर के चहुंमुखी विकास को रफ्तार देने के लिए अरबों रुपये की योजनाओं को न केवल हरी झंडी दिखाई गई, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने की समयबद्ध रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है। इस महाबैठक में लिए गए ऐतिहासिक निर्णय आने वाले समय में काशीपुर की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदलकर रख देंगे। जनभावनाओं को सर्वोपरि रखते हुए तैयार की गई इन योजनाओं के केंद्र में आम नागरिकों की सहूलियत, शहर का सौंदर्यीकरण, रोजगार के नए अवसर, अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत वित्तीय प्रबंधन शामिल है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुए गहन मंथन के बाद निकले इस अमृत से काशीपुर अब कुमाऊं ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के सबसे व्यवस्थित और स्मार्ट शहरों की कतार में सबसे आगे खड़ा होने के लिए तैयार है।
नगर सरकार ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 614 करोड़ 52 लाख रुपये का एक अभूतपूर्व और विशाल वार्षिक बजट सर्वसम्मति से सदन में पारित करा लिया है। इस भारी-भरकम बजट की सबसे खास बात यह है कि इसमें विकास की असीम संभावनाओं के बीच वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रखा गया है, जिसके तहत अनुमानित व्यय 570 करोड़ 91 लाख रुपये तय किया गया है। तमाम लोक-कल्याणकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद निगम के खजाने में लगभग 20 करोड़ 30 लाख रुपये की मोटी बचत का अनुमान लगाया गया है, जो सीधे तौर पर नगर निगम की मजबूत और कुशल वित्तीय नीति को प्रमाणित करता है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए भारत सरकार की महत्वाकांक्षी यूसीएफ योजना के अंतर्गत 228 करोड़ रुपये की विशालकाय और बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है, जो शहर के विकास में नए प्राण फूंकेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा समय-समय पर काशीपुर की जनता से किए गए वादों और घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए भी इस बैठक में खजाना पूरी तरह खोल दिया गया। सूबे के मुखिया की घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने के क्रम में नगर के 17 अलग-अलग वार्डों में अवस्थापना विकास कार्यों को गति देने के लिए 120 करोड़ 44 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की परियोजनाओं को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर छोटी-मोटी समस्याओं को दूर करने और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अवस्थापना विकास निधि सहित अन्य विभिन्न सरकारी मदों से 23 करोड़ 44 लाख रुपये के अतिरिक्त विकास कार्यों पर सदन ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। इतनी बड़ी धनराशि एक साथ शहर के विभिन्न इलाकों में सड़कों, नालियों और सार्वजनिक संपत्तियों के सुधार पर खर्च होने से आने वाले दिनों में काशीपुर की आंतरिक व्यवस्था बेहद मजबूत और आधुनिक नजर आने लगेगी।
शहरी क्षेत्र में रेहड़ी-पटरी संचालकों, छोटे दुकानदारों और प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत ऋण लेकर अपना व्यवसाय चलाने वाले गरीब लाभार्थियों को व्यवस्थित रोजगार मुहैया कराने के लिए एक बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक फैसला लिया गया है। शहर के मुख्य मार्गों पर लगने वाले बेतरतीब जाम से मुक्ति दिलाने और इन छोटे व्यापारियों को सम्मानजनक आजीविका का साधन देने के उद्देश्य से पांच नए आधुनिक वेंडिंग जोन विकसित किए जाएंगे, जिन पर निगम प्रशासन लगभग 11 करोड़ 15 लाख रुपये खर्च करने जा रहा है। इन वेंडिंग जोनों के बन जाने से जहां एक ओर हजारों परिवारों को स्थायी तौर पर दुकान लगाने की सुरक्षित जगह मिलेगी, वहीं दूसरी ओर शहर की यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह सुचारू हो जाएगी। यह कदम शहर के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने और काशीपुर को एक सुनियोजित व्यापारिक नगरी के रूप में स्थापित करने में गेमचेंजर साबित होगा।
नगर को पूरी तरह स्वच्छ, कचरा मुक्त और प्रदूषण रहित बनाने के लिए इस बार पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर पूरी तरह से आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। काशीपुर की संपूर्ण सफाई व्यवस्था की पल-पल की निगरानी करने और इसे अधिक जवाबदेह बनाने के लिए 3 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक सेंट्रल कंट्रोल रूम स्थापित करने की कार्ययोजना को सर्वसम्मति से पारित किया गया है। इस कंट्रोल रूम के माध्यम से कूड़ा उठाने वाले वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग से लेकर वार्डों में तैनात सफाई कर्मियों की डिजिटल हाजिरी और जनता की शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए शहर में ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाया जाएगा, जिसमें नगर निगम केवल अपनी जमीन उपलब्ध कराएगा और निजी कंपनियां पूरा निवेश करेंगी। इस पीपीपी मॉडल के तहत होने वाली कुल कमाई का 25 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर नगर निगम के राजस्व में जमा होगा।

काशीपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को एक नया भव्य स्वरूप देने के लिए बोर्ड ने कुछ बेहद आकर्षक और भव्य पर्यटन परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दी है, जो सैलानियों को आकर्षित करेंगी। शहर के प्रवेश द्वार और प्रमुख चौराहे के रूप में विख्यात अल्ली खां चौक पर 135 फीट ऊंचा गगनचुंबी और गौरवशाली राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया जाएगा, जिसके साथ ही पूरे चौराहे के सुंदरीकरण कार्य के लिए 26 करोड़ 21 लाख रुपये की भारी-भरकम योजना को हरी झंडी दिखाई गई है। इसके साथ ही, लंबे समय से उपेक्षित पड़ी ढेला नदी के तटीय क्षेत्र का पूरी तरह कायाकल्प करते हुए उसे पर्यटन, सैर-सपाटे और मनोरंजन के एक शानदार केंद्र के रूप में तब्दील करने का बड़ा निर्णय लिया गया है। ढेला नदी के किनारों पर खूबसूरत वॉकिंग स्पेस, साइक्लिंग ट्रैक, हरियाली से भरपूर पार्क और खान-पान के लिए सुंदर वेंडिंग जोन बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय निवासियों को परिवार के साथ समय बिताने के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक स्थल मिल सकेगा।
बोर्ड की इस ऐतिहासिक बैठक में केवल निर्माण कार्यों पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि शहर की व्यावसायिक संपत्तियों के सही इस्तेमाल और आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी कड़े फैसले लिए गए। पूर्व में प्रस्तावित पेट्रोल पंप की योजना को अव्यावहारिक मानते हुए उसके स्थान पर अब एक विशाल और सर्वसुविधायुक्त आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे निगम को भविष्य में करोड़ों रुपये की स्थायी आय होगी। इसके साथ ही, नगर निगम के स्वामित्व वाली दुकानों और भवनों में दशकों से रह रहे किरायेदार आवंटियों को बड़ी राहत देते हुए किराया बढ़ोतरी से जुड़े तमाम लंबित और विवादित मामलों का आपसी सहमति से निपटारा करने का रास्ता साफ कर दिया गया है। वहीं, सार्वजनिक स्थलों पर विज्ञापन के लिए स्वागत द्वार और बड़ी एलईडी डिस्प्ले स्क्रीन लगाने के काम को निजी निवेश मॉडल पर सौंपने की अनुमति दी गई है, जिससे बिना किसी खर्च के निगम को हर साल दो लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई होगी।
जनस्वास्थ्य को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए महापौर दीपक बाली ने बैठक में एक ऐसी घोषणा की, जिसने लंबे समय से परेशान चल रहे काशीपुर वासियों का दिल जीत लिया। पार्षदों द्वारा शहर में आवारा कुत्तों के आतंक और एंटी रैबीज इंजेक्शन की भारी किल्लत का मामला उठाए जाने पर महापौर दीपक बाली ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि आगामी दो सप्ताह के भीतर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी आरोग्य मंदिरों यानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रैबीज इंजेक्शन की प्रचुर उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कर दी जाएगी। महापौर के इस संवेदनशील आश्वासन को नगरवासियों के लिए बहुत बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि अब कुत्तों के काटने की घटनाओं से पीड़ित गरीब मरीजों को तुरंत और पूरी तरह निःशुल्क जीवनरक्षक इलाज अपने घर के नजदीक ही मिल सकेगा।
विकास की इस महागाथा में नगर निगम ने उन तमाम औद्योगिक घरानों और कॉरपोरेट समूहों को भी मंच से सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी यानी सीएसआर फंड के माध्यम से शहर के सुंदरीकरण और जनसुविधाओं में अनुकरणीय योगदान दिया है। नगर प्रशासन को उम्मीद है कि इस सम्मान से प्रेरित होकर आगामी वित्तीय वर्ष में इन उद्योग समूहों से शहर के विकास कार्यों के लिए 3 से 4 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त हो सकती है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा शहर के प्रमुख स्टेडियम तिराहे का नामकरण पवित्र धार्मिक स्थल के नाम पर ‘श्री ननकाना साहिब चौक’ करने और उसके विशेष सुंदरीकरण की मंजूरी देने पर पूरे सदन ने मेजें थपथपाकर प्रदेश सरकार के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए एक धन्यवाद प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।
सदन की मर्यादा और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने के उद्देश्य से बोर्ड ने एक बेहद कड़ा और साहसिक सामाजिक निर्णय भी लिया है, जिसकी चर्चा पूरे उत्तराखंड में हो रही है। शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों और पार्षदों की लंबे समय से आ रही शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए बोर्ड बैठक में यह सर्वसम्मति से कानून तय किया गया कि किसी भी मांगलिक कार्य, शादी-ब्याह या बच्चे के जन्म के शुभ अवसर पर किन्नर समाज द्वारा बधाई के रूप में अधिकतम 5100 रुपये तक की धनराशि ही स्वेच्छा से स्वीकार की जाएगी। यदि किसी भी परिवार से इससे अधिक रकम वसूलने के लिए दबाव बनाया जाता है, जबरन वसूली की जाती है या किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार करने की शिकायत नगर निगम या पुलिस प्रशासन को मिलती है, तो दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस संपूर्ण बोर्ड बैठक के फैसलों का बारीकी से विश्लेषण करने पर यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि नगर निगम काशीपुर ने इस बार केवल कागजी योजनाएं बनाने के बजाय एक सुदृढ़ और व्यावहारिक विजन डाक्यूमेंट तैयार किया है। इस महाबजट में जहां एक ओर अरबों रुपये के निर्माण कार्यों से शहर का ढांचा मजबूत होगा, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण जैसे गंभीर विषयों पर तकनीकी सुधार देखने को मिलेंगे। यदि महापौर दीपक बाली और निगम के अधिकारियों की यह पूरी टीम इन सभी स्वीकृत योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारने में कामयाब रहती है, तो निश्चित रूप से आने वाले चंद वर्षों में काशीपुर न केवल कुमाऊं का गौरव बनेगा, बल्कि पूरे उत्तराखंड के सबसे आधुनिक, स्वच्छ, व्यवस्थित और आदर्श महानगरों की अग्रिम पंक्ति में अपनी एक नई और अमिट पहचान स्थापित कर लेगा।





