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भाजपा की अंदरूनी कलह पर भारी पड़ी ‘सुखीजा’ की युवा क्रांति, बागी तेवरों से रचा ऐतिहासिक नया इतिहास

काशीपुर। उधम सिंह नगर की नवगठित गढ़ीनेगी नगर पंचायत के पहले ऐतिहासिक संग्राम का नतीजा बेहद अप्रत्याशित और चौंकाने वाला रहा है, जिसने क्षेत्र की पूरी सियासत की दिशा और दशा को ही बदलकर रख दिया है। इस पहले और बेहद महत्वपूर्ण चुनाव में निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे अभिषेक सुखीजा ने राजनीतिक पंडितों के सारे समीकरणों को ध्वस्त करते हुए एक बेहद शानदार और अभूतपूर्व जीत दर्ज की है और नगर पंचायत अध्यक्ष पद की प्रतिष्ठित कुर्सी पर अपना पूर्ण अधिकार जमा लिया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत और बेहद मजबूत माने जा रहे प्रत्याशी सचिन बाठला को एक बेहद करीबी और सांसें रोक देने वाले मुकाबले में पूरे 94 मतों के अंतर से करारी शिकस्त देकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करवा लिया है। यह परिणाम न केवल अभिषेक सुखीजा की व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह क्षेत्र के उस अंदरूनी राजनीतिक असंतोष को भी उजागर करता है जो काफी समय से भीतर ही भीतर सुलग रहा था और जिसका परिणाम इस ऐतिहासिक हार-जीत के रूप में सबके सामने आया है।

वास्तव में इस पूरे चुनावी महासमर को गहराई से देखा जाए तो यह भारतीय जनता पार्टी के लिए एक ऐसा सबक है जहां वह प्रत्यक्ष रूप से चुनाव हार कर भी एक अलग मायने में जीत गई है, क्योंकि विजेता ने खुद को भाजपा का सिपाही बताया है। लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई यह भी है कि सत्ताधारी दल के ही कुछ स्वार्थी और अतिमहत्वाकांक्षी नेताओं ने अपने निजी फायदों के चक्कर में प्रदेश नेतृत्व की आंखों में धूल झोंकी और उन्हें पूरी तरह से भ्रमित कर दिया। इन अंदरूनी साजिशकर्ताओं ने पूरी पार्टी को दो अलग-अलग और विरोधी खेमों में बांटने का एक बेहद आत्मघाती खेल खेला, जिसका खामियाजा आखिरकार पार्टी को भुगतना पड़ा। इस पूरे चक्रव्यूह और राजनीतिक खेल में एक धड़ा भले ही अपनी मनमर्जी चलाकर और बड़े नेताओं को गुमराह करके पार्टी का आधिकारिक टिकट हथियाने में पूरी तरह से कामयाब रहा, परंतु जनता की अदालत में उनका यह फैसला पूरी तरह से स्वार्थ और अहंकार से भरा हुआ नजर आया। गढ़ीनेगी की समझदार और जागरूक जनता ने नेताओं के इस थोपे गए और जमीनी हकीकत से दूर वाले फैसले को सिरे से खारिज करते हुए लोकतंत्र की असली ताकत का परिचय दे दिया।

इस ऐतिहासिक और क्रांतिकारी उलटफेर के बाद गढ़ीनेगी के आम जनमानस में एक अद्भुत उत्साह और खुशी की लहर साफ तौर पर देखी जा सकती है, जहां हर जुबान पर केवल एक ही चर्चा आम हो गई है। स्थानीय निवासियों का पूरी प्रखरता के साथ यह कहना है कि यह किसी धनबल या बाहुबल की जीत नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से शुद्ध ईमानदारी, अटूट निष्ठा और क्षेत्र की असीम युवा शक्ति की एक सामूहिक और गौरवशाली जीत है। गढ़ीनेगी की गलियों और चौपालों पर लोग खुलकर कह रहे हैं कि यह आम आदमी की आवाज की जीत है, जो लंबे समय से व्यवस्था में एक बड़ा और सार्थक परिवर्तन देखना चाहती थी। यह जीत अभिषेक सुखीजा के उन अनगिनत दिनों के कड़े संघर्षों, जनता के बीच बिताए गए पलों और हर सुख-दुख में खड़े रहने की भावना का सीधा और सच्चा प्रतिफल है। जनता से उनका यही सीधा, बिना किसी दिखावे का और गहरा भावनात्मक जुड़ाव था, जिसके कारण आज उनके सिर पर जीत का यह चमचमाता हुआ सेहरा बंध पाया है और उन्होंने इतिहास रच दिया।

इस धमाकेदार और अविस्मरणीय जीत का परचम लहराने के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष अभिषेक सुखीजा ने अत्यंत भावुक और विनम्र होते हुए कहा कि उन्हें इस देवतुल्य क्षेत्र की सम्मानित जनता पर पहले दिन से ही अटूट भरोसा और दृढ़ विश्वास था। उन्होंने बहुत ही आदरपूर्वक कहा कि यह जीत उनकी नहीं, बल्कि जनता-जनार्दन के असीम आशीर्वाद, स्नेह और उनके निस्वार्थ समर्थन का ही परिणाम है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने अपनी इस महान सफलता का पूरा श्रेय गढ़ीनेगी के एक-एक नागरिक, दिन-रात चुनाव प्रचार में पसीना बहाने वाले अपने जांबाज साथियों और निस्वार्थ समर्थकों को समर्पित करते हुए सभी का सहृदय आभार प्रकट किया। गौरतलब है कि गढ़ीनेगी क्षेत्र को उत्तराखंड सरकार द्वारा हाल ही में एक नई नगर पंचायत का विशिष्ट दर्जा दिया गया था, जिसके कारण इस नवगठित निकाय में यह पहला और सबसे पहला चुनाव आयोजित हुआ था, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच रखा था। इस महामुकाबले में न केवल मुख्य अध्यक्ष पद के लिए वोट डाले गए, बल्कि इसके साथ ही साथ कुल सात विभिन्न वार्डों के सदस्यों को चुनने के लिए भी जनता ने अपने मतों का प्रयोग किया।

इस पूरे लोकतांत्रिक उत्सव के दौरान नगर पंचायत के सर्वोच्च अध्यक्ष पद की सीट पूरे उत्तराखंड की राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चित और बेहद हाई-प्रोफाइल बनी हुई थी, जिस पर सबकी नजरें टिकी थीं। इसका मुख्य कारण यह था कि भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार सचिन बाठला को जिताने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और काशीपुर के कद्दावर मेयर दीपक बाली, बाजपुर के लोकप्रिय विधायक राजेश कुमार तथा बेहद वरिष्ठ एवं रसूखदार भाजपा नेता राम मल्होत्रा समेत कई दिग्गज चेहरों ने गढ़ीनेगी की गलियों में जमकर धुआंधार चुनाव प्रचार किया था। इतने बड़े-बड़े दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर होने और उनके द्वारा पूरी ताकत लगाने के बावजूद, सत्ताधारी दल भाजपा को यहां एक बेहद अप्रत्याशित और करारी पराजय का कड़वा घूंट पीना पड़ा, जिसने संगठन को हिलाकर रख दिया। जब चुनाव के अंतिम परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित हुए, तो भाजपा खेमे में सन्नाटा पसर गया और पराजित प्रत्याशी सचिन बाठला ने तुरंत ही पूरी मतगणना प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रशासन से दोबारा मतों की गिनती करने की कड़क मांग कर डाली।

जनता के भारी दबाव और चुनावी नियमों को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बेहद मुस्तैदी के साथ दोबारा से मतों की पूरी गिनती यानी पुनर्मतगणना कराई गई, ताकि किसी भी प्रकार का संदेह न रहे। परंतु जब दोबारा हुई गिनती के आंकड़े सामने आए, तो परिणाम में रत्ती भर भी बदलाव नहीं हुआ और अभिषेक सुखीजा की शानदार जीत पर अंतिम और पक्की मुहर लगाते हुए उन्हें आधिकारिक रूप से विजेता घोषित कर दिया गया। इसके तुरंत बाद भाजपा के पराजित उम्मीदवार सचिन बाठला ने एक सच्चे और परिपक्व राजनेता की तरह अपनी हार को खुले दिल से स्वीकार किया और गढ़ीनेगी की महान जनता के इस अंतिम फैसले का पूरा सम्मान किया। उन्होंने बेहद शालीनता से बात करते हुए कहा कि यदि कहीं उनके जनहित के कार्यों में या फिर जनता से सीधे संपर्क साधने में कोई कमी या चूक रह गई होगी, तो जनता ने लोकतंत्र के माध्यम से उसका बिल्कुल सही निर्णय दिया है। उन्होंने बिना किसी द्वेष के विजेता अभिषेक सुखीजा को गले लगाकर बधाई दी और उनके आने वाले उज्जवल और सफल कार्यकाल के लिए अपनी ढेर सारी शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं।

इस बेहद रोमांचक मतगणना के दौरान जैसे ही माहौल गरमाने लगा, वैसे ही क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक आदेश चौहान और कांग्रेस पार्टी के बेहद वरिष्ठ और कद्दावर नेता संदीप सहगल भी सीधे मतगणना स्थल पर जा पहुंचे। इन दोनों ही बड़े नेताओं ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष अभिषेक सुखीजा को उनकी इस बेमिसाल और ऐतिहासिक जीत के लिए फूलों का गुलदस्ता भेंट करते हुए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। इसी बीच जब तीखे पत्रकारों ने अभिषेक सुखीजा को चारों तरफ से घेर लिया और उनसे यह सीधा सवाल दागा कि क्या वह अब औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होंगे, तो उन्होंने बेहद चतुराई और गर्व से उत्तर दिया। सुखीजा ने साफ शब्दों में कहा कि वह तो वैचारिक रूप से पहले से ही भारतीय जनता पार्टी के एक सच्चे, निष्ठावान और समर्पित सिपाही हैं, और जहां तक भविष्य के राजनीतिक फैसलों या किसी नए कदम की बात है, तो वह सारे निर्णय उचित समय आने पर जनता की सलाह से ही लिए जाएंगे।

इस बहुप्रतीक्षित और बेहद संवेदनशील नगर पंचायत चुनाव की मतगणना का कार्य गुरुवार के शुभ दिन काशीपुर की फल मंडी के विशाल परिसर में सुबह ठीक आठ बजे पूरी पारदर्शिता के साथ शुरू किया गया था। इस बेहद महत्वपूर्ण मतगणना स्थल पर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के इतने कड़े और अभेद्य इंतजाम किए गए थे कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता था और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या हंगामे से सख्ती से निपटने के लिए भारी मात्रा में सशस्त्र पुलिस बल की मुस्तैदी हर कोने पर साफ तौर पर दिखाई दे रही थी। इस ऐतिहासिक चुनाव के बाद जो अंतिम और आधिकारिक विजयी उम्मीदवारों की सूची जारी हुई है, वह क्षेत्र के नए राजनीतिक भूगोल को साफ बयां करती है। मुख्य नगर पंचायत अध्यक्ष के पद पर अभिषेक सुखीजा ने पूरे 94 मतों के अंतर से एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व विजय दर्ज करके सबको चौंका दिया है।

इसके साथ ही अगर हम विभिन्न वार्डों के नतीजों पर नजर डालें तो वार्ड संख्या एक से रजनी ने अपने प्रतिद्वंद्वी को पूरे 263 वोटों के भारी-भरकम अंतर से पटखनी देकर शानदार जीत हासिल की है। वहीं वार्ड संख्या दो के बेहद करीबी मुकाबले में लवकुश ने महज 34 वोटों के अंतर से बाजी मारकर अपनी सीट सुरक्षित करने में कामयाबी पाई है। वार्ड संख्या तीन गोविंदपुर की बात करें तो यहां से दिलीप सिंह ने जनता का भरोसा जीतते हुए 125 वोटों के एक बेहद मजबूत अंतर से अपनी शानदार जीत का परचम लहराया है। वार्ड संख्या चार चामुंडा नगर में तो अर्पण चावला ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए पूरे 305 वोटों के विशाल और सबसे बड़े अंतर से ऐतिहासिक विजय प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त वार्ड संख्या पांच रामेश्वरम से सुगंध ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 230 वोटों के बड़े अंतर से जीत का स्वाद चखा है। वार्ड संख्या छह आदर्श नगर की जनता ने कुलविंदर कौर पर अपना पूरा भरोसा जताया और उन्हें 128 वोटों से विजयी बनाकर नगर पंचायत भेजा है, जबकि अंतिम वार्ड संख्या सात अंबेडकर नगर से नरेश कुमार ने 169 वोटों के शानदार अंतर से जीत दर्ज कर अपनी ताकत दिखाई है। चुनावी नतीजों का ऐलान होते ही पूरे क्षेत्र में ढोल-नगाड़ों की थाप पर समर्थकों ने अपने प्रिय और विजयी प्रत्याशियों को फूलों की विशाल मालाओं से लाद दिया, आसमान में जमकर अबीर-गुलाल उड़ाया और गढ़ीनेगी नगर पंचायत के इस पहले और ऐतिहासिक चुनाव को लेकर पूरे इलाके में दिवाली जैसा एक अद्भुत, भव्य और अभूतपूर्व उत्साह का माहौल चारों तरफ देखने को मिला।

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