काशीपुर। आईटी इंडस्ट्री के बदलते समीकरणों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के इस नए क्रांतिकारी युग ने देश की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। अब वह दौर पूरी तरह समाप्त हो चुका है जब कोई छात्र किसी खास विषय की पढ़ाई करके या डिग्री हासिल करके जीवन भर के लिए रोजगार की गारंटी पा लेता था। वर्तमान समय में आपकी स्ट्रीम कौन सी है, इस बात का महत्व लगातार कम होता जा रहा है और इसकी जगह इस बात ने ले ली है कि आपके भीतर तकनीकी कौशल यानी स्किल्स कितने मजबूत हैं। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आने वाले इस बड़े बदलाव ने कॉलेज के छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के सामने एक नया यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या वे भविष्य की इस स्मार्ट तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारत में पिछले कई दशकों से साधारण कॉलेजों से कंप्यूटर की पढ़ाई करने वाले युवाओं के लिए रोजगार का सबसे बड़ा जरिया बनी रहने वाली देश की दिग्गज टेक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के हालिया बयानों ने इस पूरी बहस को एक नई दिशा दे दी है।
देश की सबसे बड़ी आईटी नियोक्ता कंपनी टीसीएस ने हमेशा से भारतीय युवाओं के करियर को संवारने में एक रीढ़ की हड्डी की तरह काम किया है, लेकिन अब वहां भी बदलाव की एक नई बयार साफ देखी जा सकती है। अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2021-22 के दौरान इस वैश्विक कंपनी ने रिकॉर्ड स्तर पर करीब एक लाख नए स्नातकों यानी फ्रेशर्स को अपने साथ जोड़कर रोजगार का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था। हालांकि, पिछले चौबीस महीनों के भीतर वैश्विक स्तर पर तकनीक के क्षेत्र में जो उथल-पुथल मची है, उसने भर्ती की पुरानी और घिसी-पिटी प्रक्रियाओं को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। कंपनी की हालिया वार्षिक आम बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ द्वारा दिए गए कड़े और स्पष्ट संदेश ने इंजीनियरिंग और कंप्यूटर के छात्रों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह जमाना अब इतिहास बन चुका है जब केवल बुनियादी कोडिंग और साधारण कंप्यूटर ज्ञान के बल पर थोक के भाव में नियुक्तियां कर ली जाती थीं।
अब पूरी दुनिया बहुत तेजी से इंसानी श्रम के बजाय एआई एजेंट्स और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार अत्याधुनिक तकनीकों की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा चुकी है। टीसीएस जैसी बड़ी कंपनियों का आगामी मुख्य लक्ष्य अब साधारण इंजीनियरों की फौज खड़ी करना नहीं, बल्कि लाखों की संख्या में कुशल एआई एजेंट्स विकसित करना है, जो कम लागत और न्यूनतम मानव हस्तक्षेप के साथ ज्यादा से ज्यादा काम को बेहद स्मार्ट तरीके से अंजाम दे सकें। इस रणनीतिक बदलाव का सीधा और साफ असर यह होने वाला है कि आने वाले दिनों में आपके पास मौजूद कागज की डिग्री की अहमियत कम हो जाएगी, जबकि आपकी तार्किक सोच, समस्याओं को सुलझाने की क्षमता और नई परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालने का हुनर ही आपकी असली ताकत बनेगा। यही कारण है कि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को भी अब अपनी सदियों पुरानी रूढ़िवादी सोच को छोड़कर खुद को नए सिरे से परिभाषित और अपग्रेड करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

इसी वैचारिक और व्यावहारिक बदलाव की दिशा में उत्तराखंड की प्रतिष्ठित कुमाऊं यूनिवर्सिटी, नैनीताल द्वारा लिया गया एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय आज पूरे देश के शिक्षा जगत में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ने बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन यानी बीसीए पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए सालों से चली आ रही गणित विषय की अनिवार्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। विश्वविद्यालय के इस क्रांतिकारी कदम ने कला, वाणिज्य और अन्य गैर-विज्ञान पृष्ठभूमि वाले उन हजारों मेधावी छात्रों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के बंद दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिए हैं जो केवल गणित न होने की वजह से कंप्यूटर की दुनिया में कदम रखने से महरूम रह जाते थे। अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने इंटरमीडिएट में कौन से विषयों का चयन किया था, क्योंकि यदि आपके भीतर कुछ नया सीखने का जज्बा है तो आप कंप्यूटर और एआई की इस विशाल दुनिया में अपना एक शानदार और सुरक्षित भविष्य बना सकते हैं।
विश्वविद्यालय के इसी आधुनिक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने का काम काशीपुर स्थित श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (एसआईएमटी) बेहद संजीदगी और पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रहा है। पिछले बाईस वर्षों के लंबे सफर में इस अग्रणी शिक्षण संस्थान ने न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए मापदंड स्थापित किए हैं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को बेहतरीन रोजगार दिलाने में भी एक अद्वितीय मिसाल कायम की है। वर्तमान समय की मांग को भांपते हुए इस संस्थान ने खुद को एक साधारण पारंपरिक कॉलेज से ऊपर उठाकर एक पूर्ण विकसित ‘एआई इनेबल्ड कैंपस’ के रूप में तब्दील कर लिया है। यहाँ पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें रोजमर्रा के व्यावहारिक जीवन में काम आने वाले डिजिटल टूल्स, उन्नत एआई सॉफ्टवेयर और उद्योग जगत की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस संस्थान की इसी आधुनिक सोच और बेहतरीन प्रशिक्षण शैली की सबसे बड़ी और जीती-जागती गवाही यहाँ के विद्यार्थियों का विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों में होने वाला शानदार चयन और प्लेसमेंट रिकॉर्ड है। यहाँ से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र लगातार टीसीएस, विप्रो, कंसेंट्रिक्स, आईजीटी सोल्यूशंस और सीटा एयरो जैसी दुनिया की अग्रणी तकनीकी और सेवा प्रदाता कंपनियों में ऊंचे पदों पर चयनित होकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं। इन सफल युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि आज के दौर में कॉर्पोरेट जगत में सफलता की ऊंचाइयों को छूने के लिए आपकी पुरानी शैक्षणिक स्ट्रीम या पृष्ठभूमि मायने नहीं रखती, बल्कि सही समय पर मिला हुआ सही मार्गदर्शन और भविष्य के अनुकूल खुद को ढालने की आपकी क्षमता ही आपको दूसरों से आगे ले जाती है।
तकनीक के इस नए दौर में युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से डरकर पीछे हटने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है, बल्कि इस समय की असली मांग खुद को लगातार अपग्रेड और री-स्किल करने की है। एआई किसी भी इंसान की नौकरी या उसके सुनहरे भविष्य को छीनने नहीं आया है, बल्कि यह तकनीक केवल इस बात को सुनिश्चित कर रही है कि आने वाला कल सिर्फ उन्हीं लोगों का होगा जो लगातार कुछ नया सीखने और खुद को बदलने के लिए तैयार रहेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में समय से पहले आए इस बड़े बदलाव को पहचान कर अपने पाठ्यक्रम और बुनियादी ढांचे को बदलने वाले संस्थान ही आने वाले समय में देश को एक नई दिशा दे पाएंगे। यही कारण है कि आज हर स्तर पर इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि भविष्य की शिक्षा वही है जो छात्रों को केवल डिग्री न दे, बल्कि उन्हें वैश्विक पटल पर आने वाली हर तकनीकी चुनौती का मजबूती से सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम बनाए।





