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एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने मिलकर किया अवैध हथियार गिरोह का भंडाफोड़

फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के सहारे गन हाउस से अत्याधुनिक पिस्टल और भारी कारतूस खरीदने वाले तीन शातिर आरोपी चढ़े खाकी के हत्थे तथा फरार अन्य सफेदरपोशों की तलाश में लगातार जारी है छापेमारी।

काशीपुर। बाहरी राज्यों से फर्जी तरीके से तैयार कराए गए शस्त्र लाइसेंसों के दम पर अवैध हथियार लहराने वाले गिरोह के खिलाफ उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और स्थानीय पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। मुख्यमंत्री के ष्अपराध मुक्त उत्तराखंडष् के संकल्प और पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत चलाए जा रहे इस विशेष अभियान ने सीमावर्ती इलाकों में हड़कंप मचा दिया है। खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस संयुक्त छापेमारी में पुलिस की टीमों ने देर रात काशीपुर क्षेत्र से तीन शातिर आरोपियों को रंगे हाथों दबोचने में कामयाबी हासिल की है। पकड़े गए इन अभियुक्तों के पास से अत्याधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से जारी दिखाए गए पूरी तरह से जाली और कूटरचित दस्तावेज बरामद हुए हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे राज्य में अवैध रूप से हथियारों का शौक पालने वाले सफेदरपोशों और अपराधियों में खलबली मच गई है।

इस बड़े घटनाक्रम की पटकथा तब लिखी गई जब एसटीएफ के पास पिछले कुछ महीनों से लगातार इनपुट आ रहे थे कि पड़ोसी राज्यों से ट्रांसफर होकर उत्तराखंड की शस्त्र पंजिकाओं में दर्ज होने वाले कई लाइसेंसों में बहुत बड़ा झोल है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसटीएफ) श्री अजय सिंह के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल ने इस खुफिया जानकारी पर करीब दो महीने तक बेहद गोपनीय तरीके से काम किया और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों से संपर्क साधकर हजारों शस्त्र लाइसेंसों का डेटा खंगाला। जांच के दौरान जैसे ही कड़ियां आपस में जुड़ीं, तो पता चला कि शाहजहांपुर से ट्रांसफर दिखाकर उत्तराखंड में लाए गए कई लाइसेंस वास्तव में कभी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं थे। जब उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिलाधिकारी कार्यालय से इन फाइलों का भौतिक सत्यापन कराया गया, तो वहां के प्रशासन ने लिखित आख्या में साफ कर दिया कि संबंधित व्यक्तियों के नाम पर कोई भी परमिट जारी नहीं हुआ है, बल्कि जिन नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा था, वे किसी अन्य निर्दाेष नागरिकों के नाम पर पंजीकृत थे।

इतने बड़े फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही एसटीएफ की तहरीर पर ऊधमसिंह नगर जिले की काशीपुर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर संख्या 213/2026 दर्ज की गई। इस मुकदमे में मुख्य रूप से धारा 318(4) धोखाधड़ी, धारा 338 जाली दस्तावेज बनाना, धारा 336(3), 340, 61(2), 3(5) और 111 जैसी सख्त धाराएं लगाई गईं, जो संगठित अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ के मामलों में बेहद प्रभावी मानी जाती हैं। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर कुल 10 ऐसे संदिग्ध लाइसेंस धारकों को इस नामजद मुकदमे में नामजद किया था, जिन्होंने जाली दस्तावेजों के बल पर स्थानीय गन हाउस से धड़ल्ले से हथियारों की खरीद-फरोख्त की थी। मुकदमा दर्ज होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात एक जाल बिछाकर काशीपुर में छिपे तीन मुख्य आरोपियों को दबोच लिया।

पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान और उनके पास से बरामद सामान की सूची देखकर खुद जांच अधिकारी भी हैरान रह गए, क्योंकि इनके पास से बरामद हथियार बेहद आधुनिक श्रेणी के हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए पहले मुख्य आरोपी का नाम नौशाद हुसैन पुत्र लियाकत हुसैन है, जो काशीपुर के मोहला थाना साबिक का रहने वाला है। तलाशी के दौरान नौशाद हुसैन के पास से एक बेहतरीन .30 बोर की सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, 28 जिंदा कारतूस और शाहजहांपुर के पते पर बना वह फर्जी लाइसेंस बरामद हुआ, जिसके दम पर उसने यह हथियार खरीदा था। पुलिस की गिरफ्त में आया दूसरा आरोपी जतिन कांडपाल पुत्र पूरन चन्द्र कांडपाल है, जो काशीपुर के ही चामुंडा मंदिर इलाके का निवासी है। जतिन कांडपाल के कब्जे से पुलिस ने एक चमचमाती .32 बोर की पिस्टल, 18 कारतूस और एक अन्य कूटरचित परमिट बरामद करने में सफलता पाई है, जो पूरी तरह फर्जी पाया गया है।

इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को आपस में जोड़ने वाला तीसरा महत्वपूर्ण अभियुक्त अजीम पुत्र नन्हे पहलवान है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद के ग्राम व पोस्ट सिंधोली का निवासी है और वर्तमान में काशीपुर में ठिकाना बदलकर रह रहा था। अजीम के पास से भी एक खतरनाक .30 बोर की पिस्टल, 19 जिंदा कारतूस और एक जाली लाइसेंस बरामद हुआ है, जिसका इस्तेमाल वह पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए करता था। शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि अजीम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच इस अवैध नेक्सस में एक महत्वपूर्ण पुल का काम कर रहा था और उसी के जरिए इन फर्जी दस्तावेजों को स्थानीय गन हाउसों में असली बताकर पेश किया जाता था। काशीपुर का वह गन हाउस भी अब जांच के दायरे में आ गया है, जिसने बिना पुख्ता वेरिफिकेशन के इन अपराधियों को घातक हथियार और इतनी बड़ी संख्या में कारतूस बेच डाले।

एसटीएफ की इस धुआंधार और ताबड़तोड़ कार्रवाई की यह कोई पहली किस्त नहीं है, बल्कि इससे पहले भी टास्क फोर्स इस बड़े रैकेट की परतों को उखाड़ चुकी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस अभियान के तहत पहले भी दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें संलिप्त दो अन्य मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। उन पूर्व की कार्रवाइयों में भी आरोपियों के पास से अवैध सेमी-ऑटोमैटिक असलहे और जाली दस्तावेज जब्त किए गए थे, जिससे यह साफ होता है कि यह गिरोह बहुत बड़े पैमाने पर पैर पसार चुका था। बाहरी राज्यों से फर्जी कागजात बनवाकर उत्तराखंड में उन्हें रिन्यू कराने या ट्रांसफर कराने का यह खेल अब पूरी तरह से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ चुका है, और आने वाले दिनों में कई बड़े नामों पर गाज गिरना बिल्कुल तय माना जा रहा है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग भी इस तरह के अवैध हथियारों और फर्जी कागजातों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके लिए अब बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे फर्जी शस्त्र धारक अभी भी अपने हथियारों को बिना किसी देरी के स्थानीय पुलिस या प्रशासन के सामने सरेंडर कर दें, अन्यथा उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने जैसी कठोरतम कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जाली शस्त्र परमिट न केवल कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर सार्वजनिक शांति को भंग करने की एक गहरी साजिश का हिस्सा हैं। इस तरह के गंभीर मामलों में उत्तराखंड पुलिस पूरी तरह से ष्जीरो टॉलरेंसष् की नीति पर काम कर रही है, चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार क्यों न हो।

इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली एसटीएफ की टीम में कई जांबाज अफसर और पुलिसकर्मी शामिल थे, जिनकी सूझबूझ की चारों तरफ सराहना हो रही है। इस विशेष टीम में निरीक्षक एम0पी0सिंह, निरीक्षक अरुण कुमार, उपनिरीक्षक जगदीप नेगी और उपनिरीक्षक प्रकाश भगत जैसे अनुभवी अधिकारियों ने फ्रंटफुट पर रहकर पूरी रणनीति बनाई। उनके साथ सहायक उपनिरीक्षक सत्येन्द्र गंगोला, हेड कांस्टेबल गोविन्द बिष्ट, हेड कांस्टेबल रियाज अख्तर, कांस्टेबल गुरवंत सिंह, हेड कांस्टेबल सुरेन्द्र सामंत, कांस्टेबल सोनू पाण्डे और हेड कांस्टेबल चालक संजय कुमार ने पूरी मुस्तैदी के साथ इस खतरनाक ऑपरेशन को ग्राउंड पर कामयाब बनाया। इन जवानों ने रात के अंधेरे में चारों तरफ से घेराबंदी कर बदमाशों को भागने या फायर करने का कोई भी मौका नहीं दिया, जिससे यह पूरा मिशन बिना किसी नुकसान के पूरा हो सका।

इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर ऊधमसिंह नगर पुलिस की टीम ने भी इस ज्वाइंट ऑपरेशन में कंधे से कंधा मिलाकर अपनी जिम्मेदारी निभाई, जिससे अपराधियों की घेराबंदी पूरी तरह अभेद्य हो गई। स्थानीय टीम की ओर से उपनिरीक्षक सुनील सुतेड़ी ने अपनी टीम के साथ मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और संदिग्ध ठिकानों की सटीक लोकेशन एसटीएफ के साथ साझा की। इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल नंबर 71 नागरिक पुलिस दीपक कुमार, कांस्टेबल नंबर 33 नागरिक पुलिस हरीश गोस्वामी और सरकारी वाहन के चालक ललित चौधरी ने बेहद सराहनीय और तत्परतापूर्ण भूमिका निभाई। दोनों टीमों के इस बेहतरीन तालमेल और समन्वय के कारण ही काशीपुर के घने रिहायशी इलाकों के बीच से इन खतरनाक अपराधियों को बिना किसी हंगामे या खून-खराबे के दबोचना मुमकिन हो पाया, जो कि स्थानीय पुलिसिंग के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि है।

अवैध हथियारों के इस मकड़जाल को पूरी तरह से उखाड़ फेंकने के लिए अब एसटीएफ ने आम जनता से भी इस जंग में सीधे भागीदार बनने की एक विशेष और भावुक अपील की है। टास्क फोर्स ने जनता के लिए एक आधिकारिक मोबाइल नंबर 9412029536 जारी किया है, जिस पर कोई भी नागरिक फर्जी या संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों के संबंध में कोई भी गोपनीय जानकारी साझा कर सकता है। पुलिस प्रशासन ने जनता को यह पूरा भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले किसी भी व्यक्ति का नाम, पता या पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी और उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पुलिस की होगी। इस सार्वजनिक अपील के बाद पुलिस को उम्मीद है कि समाज में छिपे ऐसे अन्य सफेदपोश अपराधियों की सूचनाएं भी जल्द ही सामने आएंगी, जिससे इस संगठित अपराध की जड़ों को पूरी तरह से काटा जा सके।

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