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गर्जिया मंदिर की लीज को लेकर करणी सेना का एसडीएम दफ्तर में बड़ा और तीखा धमाका

26 वर्षों से बिना नवीनीकरण के कब्जा जमाए बैठी समिति को तुरंत भंग करने की मांग और भारी सुविधा शुल्क वसूली के खिलाफ करणी सेना ने प्रशासन को दी एक हफ्ते में उग्र आंदोलन की कड़क चेतावनी।

रामनगर। धार्मिक और सामाजिक गलियारों में उस वक्त एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित राजनैतिक भूचाल आ गया जब विश्व प्रसिद्ध मां गर्जिया देवी मंदिर के प्रबंधन को लेकर एक कद्दावर दक्षिणपंथी संगठन ने सीधे तौर पर सत्ता व्यवस्था को खुली चुनौती दे डाली। उत्तराखंड की इस पावन देवभूमि पर स्थित बेहद प्रतिष्ठित और लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के केंद्र गर्जिया मंदिर के संचालन पर सवाल उठाते हुए करणी सेना ने एक बहुत बड़ा और बेहद तीखा विस्फोट कर दिया है, जिसकी तपिश अब पूरे सूबे के प्रशासनिक महकमे में साफ तौर पर महसूस की जा रही है। इस संवेदनशील मामले को लेकर संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों और दर्जनों उग्र कार्यकर्ताओं ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत सीधे रामनगर के उपजिलाधिकारी यानी एसडीएम (SDM) कार्यालय का घेराव कर दिया और वहां जमकर नारेबाजी करते हुए व्यवस्था के खिलाफ अपना कड़ा रोष प्रकट किया। एसडीएम दफ्तर परिसर में भारी हंगामे और गहमा-गहमी के बीच करणी सेना के जुझारू नेताओं ने मौजूदा गर्जिया मंदिर समिति के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बेहद कड़क और कानूनी बिंदुओं से लैस आधिकारिक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंप दिया, जिसमें उन्होंने वर्तमान प्रबंधन समिति को तत्काल प्रभाव से हटाने और पूरे परिसर को उनके चंगुल से मुक्त कराने की एक बेहद गंभीर और ज्वलंत मांग देश के सामने रख दी है।

प्रशासनिक अधिकारी के सम्मुख अपनी बात को बेहद आक्रामक और पुरजोर तरीके से रखते हुए करणी सेना के कद्दावर प्रतिनिधियों ने मौजूदा गर्जिया मंदिर समिति के ऊपर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने और घोर वित्तीय अनियमितताएं बरतने के कई सनसनीखेज और गंभीर आरोप मढ़े हैं। संगठन ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए सीधे तौर पर यह कड़ा आरोप लगाया कि वर्तमान मंदिर समिति पिछले 26 वर्षों के एक लंबे और दीर्घकालिक समय से बिना किसी वैध लीज नवीनीकरण यानी एग्रीमेंट रिन्यूअल के इस बेहद कीमती और पावन मंदिर परिसर की सरकारी भूमि पर पूरी तरह से अवैध कब्जा जमाए बैठी है। करणी सेना ने नियमों की कड़ाई से व्याख्या करते हुए प्रशासन को समझाया कि सरकारी और विभागीय नियमावली के बिल्कुल स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, इस प्रकार की किसी भी धार्मिक या सामाजिक संपत्ति की लीज का हर 5 वर्ष की तय समयावधि के भीतर नवीनीकरण कराया जाना कानूनी रूप से बेहद अनिवार्य और जरूरी होता है। लेकिन यहाँ विभागीय गाइडलाइंस और सख्त सरकारी नियमों को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में या ताक पर रखकर पिछले ढाई दशकों से भी अधिक समय से मनमाने ढंग से पूरा का पूरा साम्राज्य और अपनी व्यक्तिगत हुकूमत चलाई जा रही है, जो कि सीधे तौर पर कानून का खुला माखौल है।

इस बड़े और तीखे राजनैतिक हमले के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए करणी सेना के पदाधिकारियों ने गर्जिया मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं और वहां आने वाले श्रद्धालुओं के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी कई बेहद विचलित और हैरान करने वाले खुलासे मीडिया के सामने किए हैं। संगठन ने तीखे शब्दों में आरोप लगाया कि मंदिर परिसर के भीतर बनी धर्मशालाओं, विश्राम गृहों और अन्य बुनियादी जन सुविधाओं के नाम पर देश-विदेश से आने वाले भोले-भाले आस्थावान श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों से हर रोज़ भारी-भरकम सुविधा शुल्क और मोटी रकम की अवैध वसूली धड़ल्ले से की जा रही है। करणी सेना ने इसे सनातन धर्म की पवित्रता और आम जनता की अगाध धार्मिक आस्था के नाम पर खेला जाने वाला एक बेहद गंदा और शर्मनाक खेल करार देते हुए कहा कि आस्था के केंद्र अब कुछ रसूखदार लोगों की व्यक्तिगत कमाई का जरिया बनकर रह गए हैं। इसी खौफनाक जमीनी हकीकत को पूरी तरह से समाप्त करने और पवित्र मंदिर की गरिमा को बेदाग बचाने के लिए संगठन ने स्थानीय नागरिक प्रशासन से इस पूरे गोरखधंधे में तत्काल प्रभाव से कड़ा और दंडात्मक हस्तक्षेप करने की पुरजोर वकालत की है।

उपजिलाधिकारी (SDM) को सौंपे गए अपने इस बेहद कड़े और ज्वलंत मांग पत्र में करणी सेना ने शासन और प्रशासन के सामने तीन सबसे प्रमुख और अभेद्य बिंदु रखते हुए साफ कहा है कि गर्जिया मंदिर समिति की जो लीज अवैध रूप से चल रही है, उसे तुरंत प्रभाव से निरस्त घोषित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी दूसरी सबसे बड़ी मांग यह रखी है कि इस पावन धाम की समस्त चल-अचल संपत्ति, जमीनों, धर्मशालाओं और दानपात्र के चढ़ावे का पूरा का पूरा कब्जा और वित्तीय नियंत्रण स्थानीय प्रशासन और संबंधित सरकारी विभाग को अविलंब अपने पूर्ण वैधानिक अधीन ले लेना चाहिए। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो समिति नियमों का पालन नहीं कर सकती, उसे एक पल भी वहां रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है, इसलिए इस अनधिकृत गर्जिया मंदिर समिति को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह भंग किया जाए और एक पारदर्शी सरकारी कमेटी का गठन किया जाए जिससे कि चढ़ावे के एक-एक पैसे का इस्तेमाल जनहित और मंदिर के आधुनिकीकरण के लिए पूरी ईमानदारी से किया जा सके।

एसडीएम कार्यालय के बाहर मीडिया और प्रेस के कैमरों के सामने रूबरू होते हुए बेबाक करणी सेना के नेताओं ने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार को एक बेहद कड़े लहजे में अंतिम और खुली चेतावनी यानी अल्टीमेटम जारी करते हुए साफ कह दिया है कि अब समय केवल बातों का नहीं बल्कि धरातल पर कड़ा एक्शन लेने का आ चुका है। संगठन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी इन जायज और कानूनी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आगामी एक सप्ताह के भीतर मौजूदा समिति के खिलाफ कोई बड़ी और ठोस कानूनी कार्रवाई अमल में नहीं लाई, तो करणी सेना पूरे रामनगर और कुमाऊं क्षेत्र में एक बहुत बड़ा, व्यापक और उग्र जन-आंदोलन शुरू करने के लिए पूरी तरह मजबूर हो जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी भरे लहजे में प्रशासन को सचेत किया कि इस संभावित उग्र आंदोलन, चक्का जाम और तालाबंदी के कारण क्षेत्र के भीतर जो भी कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा होगी या अशांति फैलेगी, उसकी पूरी की पूरी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी पूरी तरह से स्थानीय प्रशासन और बेपरवाह सरकार की होगी।

करणी सेना द्वारा गर्जिया मंदिर की चौखट से शुरू किए गए इस बेहद बड़े और विस्फोटक कानूनी मोर्चे के बाद से ही समूचे रामनगर, काशीपुर और आसपास के पहाड़ी इलाकों में अचानक से सियासी, सामाजिक और धार्मिक माहौल पूरी तरह से गर्मा गया है और चारों तरफ तीखी बहसों का दौर शुरू हो गया है। चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक हर जगह लोग अब इस बात को लेकर आपस में भिड़ रहे हैं कि आखिर इतने सालों तक प्रशासनिक तंत्र इस गंभीर मामले पर आंखें मूंदकर क्यों बैठा रहा और 26 सालों से बिना लीज के यह खेल कैसे चलता रहा। जहां एक तरफ आम जनता और जागरूक सनातनी समाज करणी सेना द्वारा उठाए गए इन कड़े और पारदर्शी मुद्दों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले ने उत्तराखंड की सत्ता व्यवस्था और बड़े-बड़े राजनेताओं को भी बैकफुट पर लाकर इस गंभीर विषय पर गहराई से सोचने पर पूरी तरह से मजबूर कर दिया है कि आने वाले दिनों में देवभूमि के इस सबसे बड़े आस्था के केंद्र का भविष्य क्या मोड़ लेने वाला है।

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