रामनगर। उत्तराखंड के औद्योगिक और राजनैतिक गलियारों से इस वक्त की बेहद सनसनीखेज और हिला देने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ देश के आयुष मंत्रालय के अधीन संचालित और सूबे की एकमात्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की आयुर्वेद दवा निर्माता कंपनी इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IMPCL) का आखिरकार पूरी तरह से निजीकरण हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा लंबे समय से प्रस्तावित विनिवेश नीति के तहत इस बेहद मुनाफे वाली और नामचीन सरकारी फैक्ट्री की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए बुलाई गई वित्तीय बोलियों के अंतिम चरण में स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने 121 करोड़ रुपये से अधिक की सबसे ऊंची बोली लगाकर इस बहुमूल्य राष्ट्रीय संपत्ति का मालिकाना हक पूरी तरह से अपने नाम कर लिया है। अल्मोड़ा जनपद के मोहान (रामनगर के समीप) स्थित इस ऐतिहासिक और इकलौती आयुर्वेदिक व यूनानी दवा निर्माण इकाई के कॉर्पोरेट हाथों में चले जाने की आधिकारिक घोषणा होते ही समूचे देवभूमि के श्रमिक संगठनों, स्थानीय निवासियों और कर्मचारी यूनियनों के बीच एक गहरा आक्रोश और तीखा राजनैतिक भूचाल आ गया है। इस औचक और बड़े नीतिगत फैसले ने राज्य के भीतर एक ऐसी गंभीर बहस को जन्म दे दिया है जिसने सीधे तौर पर सरकार के दावों और स्थानीय युवाओं के रोजगार के भविष्य पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
इस हाई-प्रोफाइल रणनीतिक बिक्री और विनिवेश सौदे के धरातल पर अमलीजामा पहनते ही रोजगार और आजीविका की दृष्टि से समूचे रामनगर, अल्मोड़ा और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के 1000 से भी अधिक स्थानीय परिवारों के ऊपर अचानक एक बहुत बड़ा और खौफनाक आर्थिक संकट पूरी तरह से मंडराने लगा है। दशकों से इस सरकारी उपक्रम में अपनी मेहनत और पसीने से दवाओं का निर्माण करने वाले सैकड़ों नियमित कर्मचारियों, संविदा श्रमिकों, दैनिक वेतनभोगियों और कच्चे माल की आपूर्ति करने वाले हजारों स्थानीय जड़ी-बूटी उत्पादक किसानों के घरों के चूल्हे बुझने की कगार पर पहुंच गए हैं। क्षेत्र के प्रबुद्ध सामाजिक विचारकों और श्रमिक नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि जब कोई बेहद सफल सरकारी संस्थान किसी निजी हाथों या कॉर्पोरेट घराने के नियंत्रण में चला जाता है, तो सबसे पहले वहां बड़े पैमाने पर छंटनी, वेतन में कटौती और स्थानीय लोगों की घोर उपेक्षा का एक अंतहीन दौर शुरू हो जाता है। यही कारण है कि आज मोहान की वादियों से लेकर काशीपुर और रामनगर के चौराहों तक हर एक प्रभावित परिवार के चेहरे पर अपने सुरक्षित भविष्य को खोने का गहरा खौफ और मानसिक तनाव साफ तौर पर देखा जा रहा है।

कॉर्पोरेट जगत के इस बड़े अधिग्रहण के बाद पैदा हुए बेहद संवेदनशील और नाजुक हालातों को देखते हुए स्थानीय जन प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पूर्व दिग्गज राजनेताओं और उग्र छात्र संगठनों ने अपने अस्तित्व और माटी के हक की रक्षा के लिए अब आर-पार की जंग लड़ने का एक बेहद कड़ा और आक्रामक मन बना लिया है। प्रभावित श्रमिक नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि वे किसी भी कीमत पर स्थानीय युवाओं और मजदूरों के मुंह से उनका वैध निवाला छीनने की इस घिनौनी कॉरपोरेट साजिश को बर्दाश्त बिल्कुल नहीं करेंगे और इसके खिलाफ बहुत जल्द ही पूरी देवभूमि की सड़कों पर एक बेहद उग्र, राष्ट्रव्यापी और ऐतिहासिक आंदोलन की चिंगारी सुलगने वाली है। आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहे कद्दावर स्थानीय प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मातृभूमि के इस औद्योगिक गौरव को बचाने और पहाड़ों से होने वाले इस जबरन पलायन को रोकने के लिए जेल भरो आंदोलन, चक्का जाम और अनिश्चितकालीन तालाबंदी जैसे बेहद तीखे और कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे ताकि शासन-प्रशासन के बहरे कानों तक जनता की चीख पहुंच सके।
पहाड़ी क्षेत्र के इस इकलौते और बेहद समृद्ध औद्योगिक ढांचे के निजीकरण के खिलाफ एकजुट हो रहे जनसमूह का मुख्य और बुनियादी मकसद सिर्फ और सिर्फ यही है कि किसी भी सूरत में यहां के मूल और स्थानीय निवासियों का रोजगार और उनका पुराना हक़ किसी भी बाहरी निजी कंपनी द्वारा कतई न छीना जा सके। आंदोलनकारी समितियों ने कड़े तेवर दिखाते हुए सरकार से यह साफ मांग की है कि भले ही कंपनी के शेयर और प्रबंधन का हस्तांतरण हो गया हो, लेकिन फैक्ट्री के भीतर सालों से काम कर रहे एक-एक मजदूर की नौकरी, उसकी वरिष्ठता, सामाजिक सुरक्षा और उनके वेतनमान के साथ रत्ती भर भी खिलवाड़ या समझौता नहीं होना चाहिए। अगर नई निजी प्रबंधन इकाई ने मुनाफे के चक्कर में स्थानीय पहाड़ों के बच्चों को नौकरी से निकालने या उनकी छंटनी करने का दुस्साहस किया, तो फिर रामनगर और अल्मोड़ा की इस क्रांतिकारी धरती से एक ऐसा अभूतपूर्व और अनियंत्रित जनांदोलन शुरू होगा जिसकी पूरी कड़क गूंज सीधे देश की संसद और सूबे की राजधानी देहरादून की सत्ता के गलियारों तक को हिलाकर रख देगी।





