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केवीआर हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने सीखा नवजात शिशुओं की सांसें बचाने का आधुनिक मंत्र

एक राष्ट्र एक मिशन के तहत डॉ. कुशल अग्रवाल के नेतृत्व में स्वास्थ्यकर्मियों ने ली नवजात मृत्यु दर मिटाने की शपथ, अब काशीपुर में हर जन्म लेने वाले मासूम को मिलेगा आधुनिक तकनीकों का सुरक्षा कवच।

काशीपुर। केवीआर हॉस्पिटल में नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। नेशनल एनआरपी डे के इस विशेष अवसर पर अस्पताल परिसर में उत्साह और जिम्मेदारी का अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों ने नवजात शिशुओं को मृत्यु के मुंह से बाहर निकालने वाली आधुनिक तकनीकों को साझा किया। केवीआर हॉस्पिटल के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. कुशल अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित किया और बताया कि इस अभियान का मुख्य केंद्र बिंदु उन नाजुक पलों को संभालना है, जो जन्म के तुरंत बाद एक शिशु के जीवन के लिए निर्णायक होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जन्म के प्रथम स्वर्णिम मिनट में शिशु को सही चिकित्सकीय सहायता मिल जाए, तो नवजात मृत्यु दर के आंकड़ों में क्रांतिकारी कमी लाई जा सकती है। यह आयोजन न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम था, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नए आयाम देने की दिशा में काशीपुर क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसमें आधुनिक उपकरणों और अनुभवी हाथों के तालमेल पर विशेष बल दिया गया।

डॉ. कुशल अग्रवाल ने चिकित्सा क्षेत्र की गंभीरता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम यानी एनएनएफ इंडिया के मार्गदर्शन में यह गौरवशाली आयोजन पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा संकल्प है। उन्होंने एनआरपी यानी नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम की महत्ता बताते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय मिशन का आधार ही शिशुओं की सांसों को टूटने से बचाना है। वर्तमान समय में जब स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी प्रगति हो रही है, तब इस प्रकार के विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित हाथों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है। एनएनएफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित इस दिवस का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने में मौजूद स्वास्थ्य केंद्रों पर ऐसी विशेषज्ञता पहुंचाना है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में नवजात को सुरक्षित रखा जा सके। काशीपुर का केवीआर हॉस्पिटल हमेशा से ही उत्कृष्ट चिकित्सा मानकों को अपनाने के लिए अग्रणी रहा है और इसी कड़ी में इस प्रशिक्षण सत्र ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को आपातकालीन जीवनरक्षक कौशलों में और अधिक निपुण बनाने का कार्य किया है, जिससे क्षेत्र की प्रसूति सेवाओं में विश्वास और बढ़ेगा।

इस गौरवशाली अभियान की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष एनएनएफ नेशनल एनआरपी डे के लिए “One Day, One Nation, One Mission” जैसी ओजस्वी और प्रेरणादायक थीम का चयन किया गया है। यह थीम इस बात का प्रतीक है कि पूरा भारत अपने भविष्य यानी नन्हें शिशुओं की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर खड़ा है। डॉ. कुशल अग्रवाल ने जानकारी साझा की कि इस राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत समूचे भारतवर्ष में एक ही दिन के भीतर 1,050 से अधिक प्रशिक्षण सत्रों का विशाल जाल बुना गया है। इस महाभियान की सफलता का दारोमदार 20,000 से अधिक समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों के कंधों पर है, जिन्हें 2,000 से अधिक प्रमाणित और अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है। देश के 310 से अधिक जिलों की इस सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब नवजात शिशु स्वास्थ्य के मामले में किसी भी चुनौती से लड़ने के लिए तैयार है। यह केवल एक संख्यात्मक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार और चिकित्सा संस्थाओं के उस अटूट निश्चय को दर्शाता है, जो हर जन्म लेने वाले बच्चे के लिए एक सुरक्षित भविष्य की गारंटी देना चाहता है।

केवीआर हॉस्पिटल काशीपुर में आयोजित इस विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सहायक स्वास्थ्यकर्मियों को उन जटिल और आपातकालीन स्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया, जो जन्म के तत्काल बाद उत्पन्न हो सकती हैं। नवजात पुनर्जीवन की इन आधुनिक तकनीकों में कृत्रिम श्वसन देने की विधि, हृदय की गति को नियंत्रित करने के तरीके और श्वासरोध जैसी गंभीर समस्याओं का त्वरित समाधान शामिल था। प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सा टीम का प्रत्येक सदस्य न केवल सैद्धांतिक रूप से बल्कि व्यावहारिक रूप से भी इतना सक्षम हो कि वह बिना समय गंवाए जीवनरक्षक सहायता प्रदान कर सके। अक्सर देखा जाता है कि जन्म के समय कुछ सेकंड की देरी भी शिशु के लिए घातक सिद्ध हो सकती है, लेकिन इस सघन प्रशिक्षण के बाद केवीआर हॉस्पिटल की टीम अब किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति का सामना करने के लिए पूर्णतः तैयार है। अस्पताल प्रबंधन का यह प्रयास काशीपुर ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए भी एक बड़ी राहत और सुरक्षा की खबर लेकर आया है, जहाँ अब विशेषज्ञ देखभाल उपलब्ध है।

इस कार्यक्रम ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति एक नई चेतना जागृत करने का कार्य किया है, जहाँ तकनीक और संवेदनशीलता का अद्भुत मिलन देखने को मिला। डॉ. कुशल अग्रवाल और उनकी पूरी टीम ने यह सिद्ध कर दिया है कि बेहतर प्रशिक्षण और दृढ़ इच्छाशक्ति के माध्यम से हम नवजात मृत्यु दर जैसी सामाजिक और चिकित्सकीय चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। कार्यशाला के समापन पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपनी सीखी हुई तकनीकों का उपयोग पूरी निष्ठा के साथ करेंगे ताकि “वन मिशन” का लक्ष्य धरातल पर साकार हो सके। एनएनएफ के इस अभियान ने यह संदेश प्रसारित किया है कि स्वास्थ्यकर्मी केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि जीवन के रक्षक हैं। केवीआर हॉस्पिटल काशीपुर की यह पहल आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र के अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। इस प्रकार के निरंतर प्रयासों से ही हम एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण कर पाएंगे जहाँ हर नवजात शिशु को अपनी पहली सांस लेने के लिए सुरक्षित और प्रशिक्षित परिवेश प्राप्त हो सके और स्वास्थ्य सेवाएं जन-जन तक प्रभावी रूप से पहुँच सकें।

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