काशीपुर।अदम्य साहस और शौर्य की प्रतिमूर्ति वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती का उत्सव आज काशीपुर की धरा पर बड़े ही भव्य और श्रद्धापूर्ण ढंग से आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रवाद की एक नई लहर देखने को मिली। महापौर दीपक बाली ने शहर के मुख्य केंद्र महाराणा प्रताप चौक पर पहुंचकर राष्ट्र नायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके चरणों में शीश नवाते हुए कृतज्ञता प्रकट की। इस दौरान वातावरण ‘जय महाराणा’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा, जो जनमानस के मन में देशभक्ति और स्वाभिमान का संचार कर रहा था। महापौर ने केवल औपचारिकता ही नहीं निभाई, बल्कि वहां उपस्थित प्रत्येक नागरिक के साथ इस पावन अवसर की खुशियां साझा कीं और मिठाई वितरित कर उत्सव के उल्लास को और अधिक मिठास प्रदान की। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि महाराणा प्रताप मात्र एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान के उस अटूट स्तंभ का नाम है, जिसकी छाया में आज का भारत अपनी जड़ों को और अधिक मजबूती से तलाश रहा है।
इतिहास के पन्नों से निकलकर आज के आधुनिक समाज को प्रेरणा देने वाले महाराणा प्रताप के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए महापौर दीपक बाली ने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा का जीवन अदम्य साहस, अपार त्याग और अपनी मातृभूमि के प्रति उस सर्वाेच्च समर्पण की गाथा है, जिसका उदाहरण पूरी दुनिया में कहीं और मिलना असंभव है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार महाराणा प्रताप ने महलों के सुख को त्याग कर घास की रोटी खाना स्वीकार किया लेकिन विदेशी आक्रांताओं के सामने कभी अपना मस्तक नहीं झुकाया, वह गुण आज के युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा और स्वाभिमान की सबसे बड़ी शिक्षा है। दीपक बाली ने यह विश्वास दिलाया कि आने वाली पीढ़ियां महाराणा के आदर्शों को आत्मसात कर देश की अखंडता और संप्रभुता के लिए सदैव तत्पर रहेंगी, क्योंकि उनका संघर्ष हमें सिखाता है कि स्वतंत्रता का मूल्य किसी भी सुख से कहीं अधिक ऊंचा होता है और राष्ट्र की आन-बान-शान के लिए सर्वस्व न्योछावर करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

इस गरिमामयी श्रद्धांजली सभा और शौर्य दिवस के साक्षी बनने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों से कई गणमान्य विभूतियां वहां उपस्थित रहीं, जिन्होंने कार्यक्रम की महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया। मत्स्य पालक अभिकरण विभाग की उपाध्यक्ष सीमा चौहान के साथ-साथ जितेन्द्र चौहान, बीपी सिंह, डॉक्टर तरुण सोलंकी, डॉक्टर प्रियंका चौहान, डॉक्टर नरेश चौहान, सूर्य प्रताप सिंह और इंद्रपाल सिंह चौहान जैसे सम्मानित व्यक्तित्वों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर राष्ट्र नायक को नमन किया। उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि वे महाराणा प्रताप के सिद्धांतों को केवल नारों तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि उन्हें अपने आचरण में ढालकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा के समक्ष राष्ट्र रक्षा का संकल्प लिया, जिससे पूरा काशीपुर शहर भक्ति और शक्ति के अनूठे संगम का केंद्र बन गया और यह आयोजन स्थानीय इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ।





