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श्रीराम इंस्टीट्यूट के मंथन 2026 में प्रतिभाओं का महासंगम और मेधावी छात्र-छात्राओं पर इनामों की बौछार

प्रतिभागियों के कौशल और मेधा का दिखा अद्भुत संगम, जहाँ नकद पुरस्कारों के साथ भविष्य के कर्णधारों के लिए स्कॉलरशिप की हुई भारी बौछार, जिसने संस्थान के शैक्षिक वातावरण को नई ऊर्जा और प्रतिस्पर्धात्मक जोश से भर दिया।

काशीपुर। शैक्षणिक संस्था श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के प्रांगण में बौद्धिक कौशल और युवा ऊर्जा का एक ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने शिक्षा जगत में नई हलचल पैदा कर दी है। संस्थान द्वारा आयोजित भव्य क्विज प्रतियोगिता “मंथन 2026” ने न केवल छात्र-छात्राओं की तार्किक क्षमता को परखा, बल्कि भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को एक ऐसा मंच प्रदान किया जहाँ वे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकें। “द क्विज चैलेंज फॉर फ्यूचर लीडर्स” की प्रेरणादायक थीम पर आधारित इस महाकुंभ में काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों के विभिन्न महाविद्यालयों से आए सैंकड़ों विद्यार्थियों ने जिस जोश और जुनून के साथ हिस्सा लिया, वह देखते ही बनता था। सुबह से ही कॉलेज परिसर में एक अलग ही रौनक छाई रही और हर प्रतिभागी के चेहरे पर जीत की चमक और कुछ नया सीखने की ललक साफ दिखाई दे रही थी। इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक युग में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि नेतृत्व क्षमता और सामान्य ज्ञान की गहरी समझ ही युवाओं को सफलता के शिखर पर पहुँचा सकती है।

शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ शुरू हुई इस “मंथन 2026” प्रतियोगिता को पूर्णतः पारदर्शी और चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए ऑफलाइन एवं पेपर आधारित मोड में आयोजित किया गया। संस्थान की मैनेजमेंट टीम ने प्रश्नों का चयन इस प्रकार किया था कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण ज्ञान की परीक्षा हो सके, जिसमें सामान्य गणित की पेचीदगियों से लेकर तार्किक रीजनिंग की गुत्थियों और कंप्यूटर फंडामेंटल्स की बारीकियों तक को शामिल किया गया। इतना ही नहीं, सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी भाषा पर पकड़ को भी इस कसौटी का हिस्सा बनाया गया, ताकि छात्र अपनी कमियों को पहचान सकें और भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए खुद को तैयार कर सकें। स्नातक के अंतिम सेमेस्टर और स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के युवाओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर था, जहाँ वे अपनी वर्षों की मेहनत को परिणाम में बदलते देख रहे थे। राधे हरि महाविद्यालय, पी. एन. जी. पी. जी महाविद्यालय, ज्ञानार्थी, आई. एम. टी और स्वयं श्रीराम कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने इस बौद्धिक युद्ध में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर कार्यक्रम की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।

प्रतियोगिता का सबसे रोमांचक क्षण वह रहा जब कड़े मुकाबले के बाद शीर्ष पांच विजेताओं के नामों की घोषणा की गई और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। अपनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय देते हुए श्रीराम इंस्टिट्यूट के निशांत त्यागी और निशा कुमारी ने सफलता का परचम लहराया, वहीं पी. एन. जी. रामनगर के उत्तम चंद्र नैलवाल ने भी अपनी मेधा शक्ति से सभी को चकित कर दिया। ज्ञानार्थी कॉलेज की तनीषा बिष्ट और आशीष कुमार सिंह ने भी शीर्ष पायदान पर जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इन सभी पांचों विजेताओं को संस्थान की ओर से 5,000 रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जो उनके अथक परिश्रम और लगन का उचित प्रतिफल था। पुरस्कार वितरण के समय इन युवाओं के चेहरों पर जो गर्व और संतोष का भाव था, उसने अन्य प्रतिभागियों को भी भविष्य में और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। यह नकद पुरस्कार मात्र एक राशि नहीं, बल्कि उन सपनों को उड़ान देने वाला एक प्रोत्साहन था जो ये युवा अपनी आँखों में सजाए हुए हैं।

पुरस्कारों की बौछार यहीं नहीं थमी, बल्कि संस्थान प्रबंधन ने शिक्षा को सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में बड़ी घोषणाएं करते हुए आकर्षक छात्रवृत्ति लाभों का पिटारा खोल दिया। प्रतिभा का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया गया कि जो विद्यार्थी 6वीं से 10वीं रैंक के बीच आए हैं, उन्हें 20,000 रुपये की भारी-भरकम छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी, जबकि 11वीं से 30वीं रैंक प्राप्त करने वाले मेधावियों को 16,000 रुपये का लाभ मिलेगा। इसी क्रम में 31वीं से 50वीं रैंक तक के छात्रों के लिए 12,000 रुपये और 51वीं रैंक से ऊपर आने वाले सभी प्रतिभागियों के लिए 5,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति सुनिश्चित की गई है। संस्थान की इस पहल की शिक्षाविदों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है, क्योंकि यह कदम आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों के करियर निर्माण में संजीवनी का काम करेगा। छात्रवृत्ति की इस पारदर्शी व्यवस्था ने विद्यार्थियों के बीच यह संदेश पहुँचाया कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और प्रतिभा को हमेशा उचित सम्मान मिलता है।

संस्थान के अध्यक्ष रवींद्र कुमार ने इस अवसर पर अपने संबोधन में युवाओं के भीतर छिपी असीम संभावनाओं को उजागर करते हुए कहा कि “मंथन 2026” केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आत्म-अवलोकन और आत्मविश्वास बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का युवा वर्ग ही कल के भारत की नींव रखेगा और ऐसे आयोजनों के माध्यम से उनमें छिपी प्रतिस्पर्धा की भावना और नेतृत्व क्षमता को निखारा जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विश्वास दिलाया कि संस्थान भविष्य में भी इस प्रकार के बौद्धिक आयोजनों को जारी रखेगा ताकि क्षेत्र की प्रतिभाओं को अपनी पहचान बनाने के लिए शहर से बाहर न जाना पड़े। अध्यक्ष के ओजस्वी भाषण ने विद्यार्थियों में एक नई ऊर्जा भर दी और उन्हें जीवन की हर चुनौती को एक अवसर के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. योगराज सिंह ने इसे करियर निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रतियोगिता मात्र पुरस्कार जीतने का जरिया नहीं थी, बल्कि इसने विद्यार्थियों को यह समझने में मदद की कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में वे कहाँ खड़े हैं और उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। वहीं, संस्थान के प्राचार्य ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि हमारा निरंतर प्रयास रहता है कि विद्यार्थियों को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर व्यावहारिक और प्रतिस्पर्धात्मक मंच उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे पेशेवर जगत की कठोर सच्चाइयों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें। प्राचार्य ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ ऐसे सह-पाठयक्रम गतिविधियों को छात्र जीवन का अनिवार्य हिस्सा बताया और सफल आयोजन के लिए पूरी टीम को बधाई दी।

समापन सत्र के दौरान सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जो उनके अनुभव और कौशल के साक्ष्य के रूप में उनके करियर प्रोफाइल को मजबूती प्रदान करेंगे। विद्यार्थियों की सुविधा और उत्साह का ध्यान रखते हुए संस्थान द्वारा जलपान और रिफ्रेशमेंट की भी उत्तम व्यवस्था की गई थी, जिससे छात्रों को आपसी संवाद और विचार-विमर्श करने का भी भरपूर मौका मिला। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के समस्त प्रवक्तागण, स्टाफ और स्वयंसेवकों ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया, जिनकी मेहनत के बिना इस स्तर का आयोजन संभव नहीं था। “मंथन 2026” ने काशीपुर के शैक्षणिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है और यह आयोजन लंबे समय तक उन छात्र-छात्राओं के जेहन में जीवित रहेगा जिन्होंने इसमें हिस्सा लेकर अपनी बौद्धिक क्षमता का परीक्षण किया। इस सफलता के बाद अब क्षेत्र के विद्यार्थियों को संस्थान के अगले बड़े आयोजन का बेसब्री से इंतजार है।

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