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नारी शक्ति पर सियासी घमासान में अलका पाल का मोदी के संबोधन पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार

काशीपुर। संसद की दहलीज पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के औंधे मुंह गिरने के बाद देश की राजनीति में जो उबाल आया है, उसकी तपिश अब देवभूमि के काशीपुर में साफ महसूस की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के नाम दिए गए भावुक संबोधन, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर ‘नारी शक्ति की भ्रूण हत्या’ करने का संगीन आरोप लगाया, उस पर पलटवार करते हुए काशीपुर कांग्रेस की कद्दावर नेत्री और महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने तीखे तेवरों के साथ मोर्चा खोल दिया है। अलका पाल ने प्रधानमंत्री के संबोधन को केवल एक ‘चुनावी स्टंट’ और ‘भावनात्मक छलावा’ करार देते हुए सीधे तौर पर चुनौती दी है कि जुमलों की खेती करने वाली भाजपा सरकार पहले अपनी गिरेबान में झांककर देखे। काशीपुर के सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि जिस तरह से प्रधानमंत्री ने विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया, उसका जवाब अलका पाल ने उतनी ही बेबाकी और तल्खी के साथ देकर यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस अब बैकफुट पर रहने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में जिस तरह से कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों को नारी शक्ति का अपराधी घोषित किया, उस पर पलटवार करते हुए अलका पाल ने कहा कि ‘बेटी बचाओ’ का नारा देने वाले लोग हकीकत में बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। उन्होंने बड़ी ही निर्भीकता से सवाल दागा कि जब देश में महिला अपराधों का ग्राफ आसमान छू रहा है और बेरोजगारी से आधी आबादी त्रस्त है, तब प्रधानमंत्री को सिर्फ चुनावी गणित साधने के लिए नारी शक्ति की याद क्यों आती है? अलका पाल का मानना है कि प्रधानमंत्री ने ‘भ्रूण हत्या’ जैसे संवेदनशील और पवित्र शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए किया है, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि देश की महिलाओं के साथ एक भद्दा मजाक भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो वह बिना किसी राजनीतिक प्रपंच के इस अधिनियम को सर्वसम्मति से पास कराने का ठोस प्रयास करती, न कि विफलता का ठीकरा विपक्ष के सिर फोड़ती।

काशीपुर की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाली अलका पाल ने प्रधानमंत्री के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों को परिवारवादी और महिला विरोधी बताया था। अलका पाल ने दहाड़ते हुए कहा कि असल में भाजपा सरकार खुद को बचाने के लिए नारी शक्ति का ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई सालों में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में जो गिरावट आई है, उससे सबसे ज्यादा नुकसान देश की बेटियों को हुआ है। जब अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं और सड़कों पर महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं करतीं, तो ऐसे में ‘नारी वंदन’ की बातें बेमानी लगती हैं। अलका पाल ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग आज संसद में मेजें थपथपाने की बात कर रहे हैं, वे शायद भूल गए हैं कि जब महिला पहलवान सड़कों पर न्याय के लिए गुहार लगा रही थीं, तब उनकी सरकार के रसूखदार लोग खामोश तमाशा देख रहे थे।

कांग्रेस नेत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना कि विपक्ष ने नारी के स्वाभिमान पर चोट की है, दरअसल उनकी अपनी हताशा को दर्शाता है क्योंकि उनकी सरकार 40 साल से लटके हुए इस मुद्दे पर कोई ठोस सर्वसम्मति बनाने में विफल रही। अलका पाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की महिलाएं अब इतनी जागरूक हो चुकी हैं कि वे जुमलों और हकीकत के बीच का अंतर अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और जमीनी स्तर पर कड़े कानूनों के अभाव का मुद्दा उठाते हुए सरकार को आत्ममंथन करने की सलाह दी। अलका पाल के अनुसार, कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी लड़ती रहेगी, लेकिन भाजपा की तरह केवल विज्ञापनों और भाषणों के जरिए श्रेय लेने की राजनीति नहीं करेगी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि आने वाले चुनावों में जनता इस नकारात्मक राजनीति का जवाब जरूर देगी और प्रधानमंत्री का ‘विक्टिम कार्ड’ अब और चलने वाला नहीं है।

अलका पाल ने अपने बयान के अंत में बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को विपक्ष को ‘पापी’ और ‘अपराधी’ कहने से पहले देश की उस आधी आबादी से माफी मांगनी चाहिए जो महंगाई और असुरक्षा की आग में झुलस रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पास न होना सरकार की रणनीतिक विफलता है, न कि विपक्ष का षड्यंत्र। काशीपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जोश भरते हुए अलका पाल ने ऐलान किया कि वे गांव-गांव और घर-घर जाकर भाजपा के इस झूठे मुखौटे को उतारेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज के अंतिम छोर पर बैठी महिला को आज आरक्षण से ज्यादा सुरक्षा, सम्मान और स्वरोजगार की आवश्यकता है, जिस पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। इस प्रकार, काशीपुर से शुरू हुआ यह पलटवार अब पूरे प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ लाने के लिए तैयार दिख रहा है, जहां नारी शक्ति के नाम पर सत्ता और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा डीलिमिटेशन और क्षेत्रीय दलों के भविष्य को लेकर दी गई दलीलों को अलका पाल ने एक बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जानबूझकर देश को बांटने और राज्यों के बीच अविश्वास पैदा करने वाली राजनीति कर रहे हैं। अलका पाल ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा का असली एजेंडा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि परिसीमन के बहाने विपक्ष की ताकत को कुचलना है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार की मंशा वास्तव में 2029 तक महिलाओं को उनका हक देने की थी, तो उसने आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की जटिल शर्तों के साथ क्यों बांधा? अलका पाल ने इसे महिलाओं के साथ किया गया एक ऐतिहासिक विश्वासघात बताते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और भाजपा के ‘बांटो और राज करो’ के फॉर्मूले को कभी सफल नहीं होने देगी। काशीपुर की जनता के सामने उन्होंने यह बात जोर देकर कही कि असली न्याय तब होगा जब भाषणों की जगह धरातल पर बदलाव दिखेगा।

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