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भाजपा नेत्री निशा चौहान का रौद्र रूप शराब की दुकान में घुसकर फोड़ी बोतलें मचा हड़कंप

काशीपुर। नगर कि हृदय स्थल चैती चौराहे के समीप हाल ही में स्थापित हुई विदेशी मदिरा की दुकान को लेकर उपजा जनाक्रोश अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो चुका है, जिसने पूरे शहर के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पिछले अड़तालीस घंटों से क्षेत्र की शांत फिजाओं में विरोध के स्वर गूंज रहे हैं और स्थानीय निवासियों का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे चुका है, जिसके कारण इलाके का वातावरण अत्यधिक संवेदनशील और तनावपूर्ण बना हुआ है। इस विरोध की मुख्य कमान क्षेत्र की महिलाओं और जागरूक युवाओं ने संभाल रखी है, जिनका स्पष्ट तर्क है कि धार्मिक आस्था के केंद्र और भीड़भाड़ वाले इस चौराहे पर शराब के ठेके का संचालन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने जनभावनाओं को दरकिनार कर इस दुकान को अनुमति दी है, जिससे न केवल क्षेत्र की पवित्रता भंग हो रही है बल्कि वहां से गुजरने वाली महिलाओं और स्कूली बच्चों के लिए भी असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, इस आंदोलन की लपटें और तेज होती जा रही हैं और लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने उस वक्त एक नाटकीय और उग्र मोड़ ले लिया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो बिजली की गति से वायरल हुआ, जिसमें भाजपा नेत्री निशा चौहान का एक बेहद आक्रामक और साहसी रूप जनता के सामने आया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जनभावनाओं के सैलाब को नेतृत्व देते हुए निशा चौहान न केवल दुकान के विरोध में नारे लगा रही हैं, बल्कि भारी आक्रोश के बीच वह सीधे शराब की दुकान के भीतर जा घुसीं। वीडियो के दृश्यों ने तब सनसनी फैला दी जब निशा चौहान ने दुकान के भीतर रखी अंग्रेजी शराब की बोतलों को एक-एक कर जमीन पर पटकना और तोड़ना शुरू कर दिया, जिसे देखकर वहां मौजूद सेल्समैन और कर्मचारी हक्के-बक्के रह गए। भाजपा नेत्री निशा चौहान के इस कड़े रुख ने जहां एक ओर आंदोलनकारियों में नए उत्साह का संचार कर दिया है, वहीं दूसरी ओर इस मामले ने अब एक गहरा राजनीतिक रंग अख्तियार कर लिया है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भी जुबानी जंग तेज होने की संभावना बढ़ गई है।

क्षेत्रीय महिलाओं का यह प्रबल तर्क है कि चैती चौराहा केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं है, बल्कि यह काशीपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण अंग है, जहां विदेशी मदिरा की दुकान का अस्तित्व ही अनैतिक है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस ठेके को अविलंब यहां से स्थानांतरित नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र रूप देंगी और चक्का जाम करने से भी पीछे नहीं हटेंगी। उनका सीधा आरोप है कि शराब की दुकान खुलने से क्षेत्र में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ना तय है, जिसका सबसे बुरा असर नई पीढ़ी और युवाओं के चरित्र पर पड़ेगा, जो भविष्य में अपराध की ओर प्रवृत्त हो सकते हैं। आंदोलनकारियों का यह भी कहना है कि प्रशासन और आबकारी विभाग ने नियमों की अनदेखी कर रिहायशी और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्र में इस दुकान का लाइसेंस आवंटित किया है, जो सीधे तौर पर जनहित के खिलाफ लिया गया एक तानाशाही पूर्ण निर्णय प्रतीत होता है।

इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और तोड़फोड़ की घटना के बाद सरकारी तंत्र भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है और विभाग की ओर से सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी निरीक्षक दिवाकर चौधरी ने स्पष्ट किया है कि कानून को अपने हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति क्यों न हो। दिवाकर चौधरी के अनुसार, विभाग ने भाजपा नेत्री निशा चौहान के खिलाफ राजकीय कार्य में बाधा डालने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के संबंध में आईटीआई कोतवाली में औपचारिक तहरीर दे दी है। इसके साथ ही, दुकान के संचालक यानी अनुज्ञापी ने भी अपनी निजी संपत्ति के नुकसान और जान-माल के खतरे का हवाला देते हुए निशा चौहान के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को शिकायत सौंपी है। आबकारी विभाग का मानना है कि यदि दुकान नियमों के तहत खुली है, तो इस तरह की हिंसक कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

कानून व्यवस्था की स्थिति को संभाल रहे पुलिस महकमे ने भी इस विवाद को सुलझाने और दोषियों पर शिकंजा कसने के लिए कमर कस ली है, ताकि शहर की शांति व्यवस्था प्रभावित न हो सके। सीओ बाजपुर विभव सैनी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस प्रशासन को इस मामले में दोनों ही पक्षों की ओर से लिखित शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं और पूरे घटनाक्रम की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है। विभव सैनी ने आश्वासन दिया है कि सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई अमल में लाई जाएगी और किसी को भी क्षेत्र का माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस बल को चैती चौराहे के आसपास तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित हिंसक झड़प को टाला जा सके और आम जनता को असुविधा न हो। फिलहाल, भाजपा नेत्री निशा चौहान के इस कदम ने पुलिस प्रशासन के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है क्योंकि मामला सीधे तौर पर जनभावनाओं और सत्ताधारी दल की नेता से जुड़ा हुआ है।

जैसे-जैसे यह खबर शहर के कोने-कोने में फैल रही है, वैसे-वैसे निशा चौहान के समर्थन और विरोध में स्वर तेज होने लगे हैं, जिससे यह विवाद अब केवल एक दुकान के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ जहां भारी संख्या में लोग भाजपा नेत्री निशा चौहान की हिम्मत की सराहना कर रहे हैं और उन्हें महिलाओं का रक्षक बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन इसे कानून का उल्लंघन मानकर सख्त रुख अपना रहा है। चैती चौराहे की सड़कों पर लगा यह जाम और लोगों की आंखों में दिख रहा गुस्सा इस बात का गवाह है कि काशीपुर की जनता अब अपनी शांति और संस्कृति के साथ किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। अब सबकी निगाहें पुलिस और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या जनभावनाओं का सम्मान करते हुए दुकान को वहां से हटाया जाएगा या फिर कानून हाथ में लेने के आरोप में निशा चौहान पर बड़ी गाज गिरेगी। आने वाले कुछ दिन काशीपुर की राजनीति और सामाजिक समरसता के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं, क्योंकि विवाद थमने के बजाय हर पल नया मोड़ ले रहा है।

इस प्रकरण ने उत्तराखंड की राजनीति में भी एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या जनहित के मुद्दों पर कानून की लक्ष्मण रेखा लांघना सही है या सरकार को शराब नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। निशा चौहान का यह कृत्य आने वाले समय में काशीपुर के राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर सिस्टम को चुनौती दी है। महिलाओं के इस समूह ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ठेके पर ताला नहीं लटकता, तब तक उनका धरना और प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा, चाहे प्रशासन कितनी ही पुलिस फोर्स तैनात क्यों न कर दे। काशीपुर का चैती चौराहा फिलहाल एक अघोषित युद्ध के मैदान में तब्दील हो चुका है, जहां एक तरफ सरकारी राजस्व का सवाल है और दूसरी तरफ समाज की नैतिकता और बहू-बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा खड़ा है। देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संकट से उबरने के लिए क्या बीच का रास्ता निकालती है या फिर यह टकराव और अधिक भीषण रूप धारण कर पूरे जिले की कानून व्यवस्था के लिए संकट पैदा कर देगा।

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