काशीपुर। उत्तरभारत के सुप्रसिद्ध चैती मेले की आध्यात्मिक आभा उस समय कलंकित हो गई जब आस्था के इस केंद्र पर दबंगई और हिंसा का नंगा नाच देखने को मिला। मेले की सुरक्षा और व्यवस्था के नाम पर तैनात किए गए बाउंसरों और पार्किंग कर्मियों ने मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघते हुए भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय मंत्री (एससी मोर्चा) धर्मवीर पासी के साथ जानवरों जैसी क्रूरता दिखाई। प्राप्त विवरण के अनुसार, पार्किंग शुल्क और रसीद को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया, जहाँ एक दर्जन से अधिक बाउंसरों और असामाजिक तत्वों ने भाजपा नेता को घेरकर लात-घूंसों और डंडों से लहूलुहान कर दिया। इस घटना ने न केवल मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सत्ताधारी दल के पदाधिकारी पर हुए इस हमले ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया है। पीड़ित नेता के शरीर पर आई सूजन और चोट के निशान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हमलावरों के मन में कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं था।
अन्याय की इस पराकाष्ठा के खिलाफ घटना स्थल पर मौजूद और सूचना पाकर पहुंचे भाजपा और बजरंगदल के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, जिसके बाद वहां भारी नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। आक्रोशित लोगों ने पार्किंग स्थल को घेर लिया और “गुंडागर्दी नहीं चलेगी” के गगनभेदी नारों के साथ धरने पर बैठ गए, जिससे मेला परिसर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह केवल एक छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि इस मेले में आए दिन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के साथ मारपीट करना इन पार्किंग संचालकों की आदत बन चुकी है। धरने पर बैठे लोगों ने आरोप लगाया कि शराब के नशे में धुत ये कथित रक्षक अब भक्षक बन चुके हैं और महिलाओं तक को निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं। लोगों का गुस्सा इस बात पर भी अधिक था कि प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह की अवैध वसूली और शारीरिक प्रताड़ना का खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़ित भाजपा नेता, जो एससी मोर्चे के जिला कार्यालय मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे रात के समय अपनी गाड़ी खड़ी करने पार्किंग में आए थे, लेकिन जब वे मेला घूमकर वापस लौटे तो उनसे जबरन दोबारा रसीद मांगी गई। विरोध करने पर करीब 20 अज्ञात लड़कों और 10-12 खूंखार बाउंसरों ने उन्हें अंधेरे की तरफ खींच लिया और फिर शुरू हुआ बेरहमी का वह सिलसिला जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। पीड़ित ने बताया कि उन्हें जानवरों की तरह जमीन पर पटककर उनके पेट, सिर और कमर पर प्रहार किए गए, जिससे उनके शरीर के कई हिस्से बुरी तरह सूज गए हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि हमलावरों ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि वहां मौजूद अन्य लोगों और यहां तक कि एक महिला को भी नहीं बख्शा। यह मेला जो करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, आज इन गुंडों की वजह से भय के साये में है, जहां एक सामान्य नागरिक का सुरक्षित बाहर निकलना भी अब दूभर होता जा रहा है।
प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ा तो था, लेकिन उसे भी बिना किसी कड़ी कार्रवाई के छोड़ दिया गया, जिससे हमलावरों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। छोड़े गए व्यक्ति के अहंकार का आलम यह था कि उसने खुलेआम चुनौती दी कि “हमारा मारने से कुछ नहीं होता, यह तो हमारा रोज का काम है।” ऐसे बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त है और वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे भी कानून हाथ में ले सकते हैं और शांति भंग करने की क्षमता रखते हैं, परंतु वे मेले की गरिमा और अपनी संस्कृति का सम्मान करते हुए संयम बरत रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इन सभी दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, क्योंकि ऐसी गुंडागर्दी भविष्य में मेले के अस्तित्व को ही खतरे में डाल देगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने विधिवत तहरीर पुलिस को सौंप दी है और अपना सरकारी मेडिकल परीक्षण भी करवा लिया है, जिसमें गंभीर चोटों की पुष्टि होने की बात कही जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट और लिखित शिकायत के आधार पर अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह उन 10 से 20 अज्ञात हमलावरों की पहचान कर उन्हें तत्काल गिरफ्तार करे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि पार्किंग का ठेका रद्द किया जाए और उन बाउंसरों को जेल भेजा जाए जिन्होंने डंडे और लातों से भाजपा नेता को मरणासन्न स्थिति में पहुंचा दिया था। समाचार लिखे जाने तक पार्किंग स्थल पर तनाव बरकरार है और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जा रही है ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके। स्थानीय जनता का स्पष्ट संदेश है कि आस्था के इस पावन पर्व पर गुंडागर्दी का वर्चस्व किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और जब तक न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।





