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डॉ शाहवाज़ बेग और Fight4Voiceless ने छेड़ी रेबीज के विरुद्ध महाजंग खिलाया सुरक्षा कवच

बेजुबानों की जान बचाने और इंसानों को खौफनाक वायरस से सुरक्षित रखने हेतु एमएस पेट क्लीनिक की हर पखवाड़े चलने वाली यह अनूठी स्वास्थ्य क्रांति अब ऊधम सिंह नगर की सुरक्षा का असली आधार बनेगी।

काशीपुर। देवभूमि उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में इन दिनों मानवता और संवेदनशीलता की एक नई इबारत लिखी जा रही है, जहाँ घातक रेबीज वायरस के समूल नाश के लिए एक अभूतपूर्व जंग की शुरुआत हुई है। बेजुबानों के हक और उनकी सेहत के लिए समर्पित अग्रणी संस्था ‘Fight4Voiceless’ की टीम ने समाज की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक ऐसी मुहिम को अंजाम देना शुरू किया है, जो न केवल पशुओं के लिए जीवनदान है बल्कि इंसानी बस्तियों के लिए भी सुरक्षा कवच का काम कर रही है। इस पुनीत कार्य में एमएस पेट क्लीनिक के संचालक और विख्यात पशु चिकित्सक डॉ. शाहवाज़ बेग एक मसीहा के रूप में सामने आए हैं, जिनकी चिकित्सकीय देखरेख में सैकड़ों आवारा और पालतू पशुओं को रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने का बीड़ा उठाया गया है। जिले की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ते रेबीज के मामलों को देखते हुए शुरू किया गया यह अभियान अब एक जनांदोलन का रूप लेता जा रहा है, जिसमें हर जीव की सांसों की कीमत को समझते हुए उसे सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

रेबीज के बढ़ते प्रकोप और इससे होने वाली अकाल मौतों को रोकने के लिए डॉ. शाहवाज़ बेग ने अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों का झोंकते हुए इस विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है, जो सीधे तौर पर जमीनी हकीकत को बदलने की क्षमता रखती है। डॉ. बेग का मानना है कि रेबीज कोई सामान्य बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी दहशत है जो सही जानकारी और समय पर टीकाकरण न मिलने के कारण समाज में फैलती है। हाल के दिनों में ऊधम सिंह नगर के विभिन्न इलाकों से ऐसी खबरें आईं जहाँ श्वान और अन्य पशु इस वायरस की चपेट में आकर तड़पते देखे गए, जिसके बाद एमएस पेट क्लीनिक ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। इस मुहिम के तहत तत्काल प्रभाव से संक्रमित और जोखिम वाले क्षेत्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की डोज पहुंचाई जा रही है, ताकि संक्रमण की कड़ी को शुरुआत में ही तोड़ा जा सके। डॉ. बेग के अनुसार, एक टीका केवल एक जानवर को नहीं बचाता, बल्कि वह उन अनगिनत इंसानों को भी सुरक्षा देता है जो उस जानवर के संपर्क में आते हैं।

इस महाभियान की सबसे विशिष्ट बात इसकी निरंतरता है, जिसे लेकर डॉ. शाहवाज़ बेग ने एक ऐतिहासिक घोषणा की है कि यह जागरूकता और उपचार कार्यक्रम अब केवल एक बार की घटना नहीं रहेगा, बल्कि हर 15 दिन में इसे नियमित रूप से दोहराया जाएगा। ऊधम सिंह नगर के कोने-कोने तक पहुंचने के संकल्प के साथ इस कार्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जिले का कोई भी गांव या कस्बा इस सुरक्षा चक्र से बाहर न रह जाए। ‘Fight4Voiceless’ की टीम और डॉ. बेग की विशेषज्ञ टोली हर पखवाड़े अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा करेगी, जहाँ न केवल पशुओं का मुफ्त या रियायती दरों पर टीकाकरण किया जाएगा, बल्कि मौके पर ही बीमार जानवरों का प्राथमिक उपचार भी सुनिश्चित किया जाएगा। इस तरह की व्यवस्थित योजना उत्तराखंड के किसी जिले में पशु कल्याण के क्षेत्र में अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ इंसान और जानवर दोनों बिना किसी खौफ के सह-अस्तित्व के साथ रह सकें।

अभियान की सफलता केवल सुई लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में जन-जागरूकता का वह वृहद संदेश है जिसे ‘Fight4Voiceless’ की टीम घर-घर तक पहुँचाने का प्रयास कर रही है। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव में लोग रेबीज के लक्षणों को पहचान नहीं पाते और अनजाने में अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए टीम द्वारा लोगों को विस्तार से समझाया जा रहा है कि यदि कोई पशु असामान्य व्यवहार करे, अत्यधिक आक्रामक हो जाए या उसके मुंह से झाग निकले, तो उसे अनदेखा न करें। इस पहल के माध्यम से समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बोध विकसित किया जा रहा है, ताकि लोग अपने आसपास रहने वाले बेजुबानों के प्रति न केवल दया भाव रखें, बल्कि उनकी सेहत के प्रति भी सजग रहें। डॉ. बेग और उनकी टीम ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण के साथ-साथ बचाव के उपायों को अपनाना ही इस घातक वायरस के खिलाफ हमारी सबसे बड़ी जीत होगी।

ऊधम सिंह नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुहिम की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे समाज के प्रति एक बड़ी सेवा करार दिया है, क्योंकि यह अभियान बेजुबानों को दर्द से निजात दिलाने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य की भी रक्षा कर रहा है। डॉ. शाहवाज़ बेग ने आम जनता से पुरजोर अपील की है कि वे इस मिशन में केवल मूकदर्शक बनकर न रहें, बल्कि सक्रिय भागीदार बनें और अपने आसपास मौजूद हर गली-मोहल्ले के पशुओं के टीकाकरण में सहयोग करें। यदि किसी को भी अपने क्षेत्र में कोई संदिग्ध स्थिति वाला जानवर दिखाई देता है, तो उसे तत्काल विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संज्ञान में लाएं ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें। यह अभियान एक ऐसी संवेदनशील सोच को सींच रहा है जहाँ समाज का हर वर्ग पशुओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझेगा और उन्हें केवल ‘समस्या’ न मानकर ‘सजीव’ प्राणी के रूप में सम्मान देगा। आने वाले समय में यह 15-दिवसीय कार्यक्रम ऊधम सिंह नगर को प्रदेश का पहला रेबीज मुक्त जिला बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

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