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बेटियों ने थामी तकनीक की मशाल और दभौरा मुस्तकम विद्यालय में रचा भविष्य का स्वर्णिम इतिहास

पॉलिटेक्निक विशेषज्ञों के प्रेरणादायी मार्गदर्शन और श्रीमती भावना भट्ट एवं श्री पंकज कुमार के ओजस्वी व्याख्यान से छात्राओं ने करियर की नई ऊंचाइयां छूने का संकल्प लिया और अपनी अद्वितीय रचनात्मक प्रतिभा का भव्य प्रदर्शन किया।

काशीपुर। उत्तराखंड के शैक्षिक परिदृश्य में एक स्वर्णिम और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए काशीपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय दभौरा मुस्तकम की छात्राओं के लिए आज का सूर्योदय नई उम्मीदें, असीम आकांक्षाएं और भविष्य के अत्यंत सुनहरे सपने लेकर आया। विद्यालय के प्रांगण में आयोजित इस भव्य ‘करियर मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यक्रम’ ने न केवल ज्ञान की अविरल गंगा बहाई, बल्कि क्षेत्र की किशोरियों की आँखों में अपने पैरों पर खड़े होने और समाज में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने का एक नया अटूट आत्मविश्वास भी भर दिया। कार्यक्रम का आध्यात्मिक और औपचारिक आगाज अत्यंत भावपूर्ण रहा, जब मां शारदे की वंदना के बीच पारंपरिक दीप प्रज्वलन की रस्म पूरी निष्ठा के साथ अदा की गई। इस पावन ज्योति की लौ ने मानों अज्ञानता के गहरे अंधकार को जड़ से मिटाकर छात्राओं के कोमल मन में सफलता का दिव्य प्रकाश फैलाने का संकल्प दोहराया हो। इस गरिमामयी समारोह में उपस्थित हर एक चेहरे पर एक नई चमक, एक नई जिज्ञासा और जीवन में कुछ कर गुजरने का अद्भुत जज्बा साफ तौर पर दिखाई दे रहा था, जिसने पूरे विद्यालय परिसर को एक सकारात्मक ऊर्जा, नई चेतना और प्रेरणादायक स्पंदन से पूरी तरह सरोबार कर दिया। इस आयोजन की भव्यता और छात्राओं का उत्साह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण था कि आज की ग्रामीण परिवेश की बेटियां अब केवल घर की चारदीवारी और चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वे आसमान की ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह बेताब और तैयार हैं।

इस अत्यंत महत्वपूर्ण, सूचनाप्रद और प्रेरणादायी सत्र के कुशल संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विद्यालय की वरिष्ठ एवं अनुभवी शिक्षिका तथा नोडल मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रभारी श्रीमती अंजना राज द्वारा बहुत ही प्रभावशाली ढंग से संभाली गई। उनकी ओजस्वी वाणी और गंभीर शब्दों ने छात्राओं के भीतर दबी हुई जिज्ञासा की अग्नि को और अधिक प्रज्वलित करने का काम किया। उन्होंने अपने प्रारंभिक संबोधन में कार्यक्रम की अत्यंत विस्तृत और सूक्ष्म रूपरेखा को बड़ी ही सहजता और सरलता के साथ छात्राओं के सम्मुख प्रस्तुत किया। श्रीमती अंजना राज ने इस बात पर विशेष रूप से बल दिया कि किशोरावस्था में सही समय पर लिया गया सही और सटीक निर्णय ही भविष्य की दिशा और दशा को पूरी तरह बदलने में सक्षम होता है। उन्होंने छात्राओं को यह गहराई से अहसास कराया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना या परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना मात्र नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर छिपी हुई नैसर्गिक प्रतिभा को पहचानकर उसे वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम है। उनके अनुसार, करियर काउंसलिंग जैसे कार्यक्रम ही वह सेतु हैं जो छात्राओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार सही रास्ते तक पहुँचा सकते हैं। उनके द्वारा दी गई इस सारगर्भित और प्रभावी भूमिका ने पूरे आयोजन की वैचारिक नींव को इतना मजबूत बना दिया कि प्रत्येक छात्रा आने वाले समय की कठिन चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार और संकल्पित नजर आई।

इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण और आकर्षण का केंद्र बाजपुर स्थित प्रतिष्ठित पॉलिटेक्निक संस्थान से आमंत्रित किए गए विद्वान विशेषज्ञ अतिथि रहे, जिन्होंने अपने वर्षों के अनुभवों की पोटली खोलकर छात्राओं के सामने करियर की अनगिनत और अकल्पनीय संभावनाओं का एक विशाल पिटारा खोल दिया। संस्थान की विभागाध्यक्ष (साइंस एवं मानविकी) श्रीमती भावना भट्ट ने अपनी अगाध विद्वत्ता और विशेषज्ञता का भरपूर लाभ छात्राओं को देते हुए उन्हें विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र के उन गूढ़ पहलुओं से विस्तारपूर्वक अवगत कराया, जो सामान्यतः ग्रामीण परिवेश की छात्राओं की पहुँच और सोच से काफी दूर समझे जाते हैं। श्रीमती भावना भट्ट ने बड़ी ही सूक्ष्मता और तार्किक ढंग से यह समझाया कि कैसे आज की आधुनिक बेटियां विज्ञान के क्षेत्र में अपनी सूक्ष्म दृष्टि, असाधारण धैर्य और कड़ी मेहनत के बल पर वैश्विक स्तर पर नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उन्होंने छात्राओं के मन से इस रूढ़िवादी भ्रम को पूरी तरह निकाल दिया कि तकनीकी शिक्षा केवल लड़कों का कार्यक्षेत्र है। उनके इस ओजस्वी व्याख्यान ने छात्राओं को इस बात के लिए गहराई से प्रेरित किया कि वे केवल पारंपरिक विषयों और सीमित क्षेत्रों तक ही न टिके रहें, बल्कि आधुनिक विज्ञान की बारीकियों को समझें और भविष्य में शोध, नवाचार और विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अभी से कमर कस लें।

वर्तमान समय की तीव्र तकनीकी क्रांति और डिजिटलीकरण के इस दौर में कंप्यूटर साक्षरता की अपरिहार्य अनिवार्यता पर विशेष जोर देते हुए कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग के ओजस्वी प्रवक्ता श्री पंकज कुमार ने छात्राओं को डिजिटल युग की जटिल चुनौतियों और उसमें छिपे विशाल अवसरों के प्रति विशेष रूप से सचेत और जागरूक किया। उन्होंने अपने प्रभावशाली वक्तव्य में इस कड़वे सच को रेखांकित किया कि आज के आधुनिक समय में बिना तकनीकी कौशल और कंप्यूटर के ज्ञान के किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च सफलता प्राप्त करना लगभग असंभव सा हो गया है। इसलिए, उन्होंने छात्राओं को पुरजोर मशवरा दिया कि वे कोडिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डेटा मैनेजमेंट और विभिन्न डिजिटल टूल्स में महारत हासिल करने का प्रयास करें। श्री पंकज कुमार ने नई पीढ़ी की इन ऊर्जावान बालिकाओं को प्रेरित करते हुए बड़े ही सुंदर शब्दों में कहा कि वे जीवन में केवल तकनीक की उपभोक्ता न बनें, बल्कि तकनीक की रचयिता और निर्माता बनने का बड़ा सपना देखें। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य केवल उन्हीं का सुरक्षित है जो तकनीकी रूप से सक्षम, दक्ष और नवाचारी सोच के धनी होंगे। उनके इस दूरदर्शी संबोधन ने छात्राओं को यह सोचने पर विवश कर दिया कि कैसे वे अपने छोटे से गांव की गलियों से निकलकर सूचना प्रौद्योगिकी के विशाल महासागर में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बना सकती हैं और स्वयं को पूरी तरह आत्मनिर्भर बना सकती हैं।

कार्यक्रम के दौरान केवल व्याख्यान ही नहीं हुए, बल्कि छात्राओं की छिपी हुई बहुमुखी प्रतिभा को निखारने और उसे प्रदर्शित करने के लिए एक भव्य पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपनी जादुई कूचियों और जीवंत रंगों के माध्यम से विज्ञान, पर्यावरण, भविष्य के सपने और सामाजिक सरोकारों जैसे विभिन्न जटिल विषयों पर अपनी मौलिक रचनात्मकता को कैनवास पर उतारकर उपस्थित सभी अतिथियों और शिक्षकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। इन पोस्टरों में न केवल छात्राओं की कलात्मक सुंदरता झलक रही थी, बल्कि उनमें भविष्य के प्रति उनकी प्रगतिशील सोच और ज्वलंत सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी संवेदनशीलता भी साफ तौर पर पढ़ी जा सकती थी। इस प्रतियोगिता के अंत में जब उत्कृष्ट और प्रेरणादायक प्रदर्शन करने वाली मेधावी छात्राओं को मंच पर बुलाकर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, तो उनकी खुशी और गर्व का ठिकाना नहीं रहा। विद्यालय का पूरा प्रांगण काफी देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजता रहा, जिसने वातावरण को और भी अधिक उत्साहजनक बना दिया। इस सम्मान समारोह ने न केवल विजेता छात्राओं के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुँचाया, बल्कि वहां उपस्थित अन्य छात्राओं के भीतर भी एक स्वस्थ और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना का संचार किया। इससे समाज में यह कड़ा और स्पष्ट संदेश गया कि जब भी मेहनत, लगन और रचनात्मकता को उचित मंच और सम्मान मिलता है, तो वह सर्वांगीण विकास के नए रास्ते खोल देता है।

जैसे-जैसे यह ज्ञानवर्धक समारोह अपने समापन की ओर बढ़ा, विद्यालय की आदरणीय प्रधानाचार्या श्रीमती आशा पुरोहित ने मंच संभालते हुए अपने संक्षिप्त, सारगर्भित किंतु अत्यंत प्रभावशाली संबोधन में सभी आगंतुक विशेषज्ञों, अतिथियों और सहयोगियों का हृदय की गहराइयों से आभार प्रकट किया। उन्होंने इस बात की विशेष रूप से सराहना की कि अपनी व्यस्ततम दिनचर्या और महत्वपूर्ण कार्यों के बावजूद विशेषज्ञों ने इस दूरस्थ विद्यालय में आकर छात्राओं का मार्ग प्रशस्त करने के लिए अपना बहुमूल्य समय निकाला, जो कि वास्तव में शिक्षा के प्रति उनके समर्पण की एक सराहनीय मिसाल है। श्रीमती आशा पुरोहित ने सभी अतिथियों को विद्यालय परिवार की ओर से सम्मान के प्रतीक के रूप में स्मृति चिन्ह भेंट किए, जो इस बात का द्योतक थे कि विद्यालय उनके द्वारा साझा किए गए अमूल्य ज्ञान और मार्गदर्शन को सदैव अपनी सुखद स्मृतियों में संजोकर रखेगा। कार्यक्रम का विधिवत समापन अत्यंत स्वादिष्ट सूक्ष्म जलपान के साथ हुआ, जहाँ अनौपचारिक चर्चाओं के दौर के बीच छात्राओं ने विशेषज्ञों से मिलकर अपनी व्यक्तिगत शंकाओं और करियर संबंधी दुविधाओं का बड़ी ही आत्मीयता के साथ समाधान प्राप्त किया। निष्कर्षतः, यह भव्य आयोजन न केवल छात्राओं के ज्ञान की वृद्धि में मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि इसने दभौरा मुस्तकम जैसी जगह की साधारण छात्राओं को अपने करियर के अनंत आकाश में बहुत ऊंची उड़ान भरने के लिए पर्याप्त साहस, दिशा और वैचारिक पंख प्रदान करने का ऐतिहासिक कार्य किया।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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