spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडचैती मेला 2026 टेंडर प्रक्रिया संपन्न राजस्व में 49 लाख की भारी...

चैती मेला 2026 टेंडर प्रक्रिया संपन्न राजस्व में 49 लाख की भारी बढ़ोतरी से टूटे पुराने रिकॉर्ड

मां बाल सुंदरी चैती मेले की टेंडर प्रक्रिया पूरी कई व्यवस्थाओं की निविदा राशि बढ़ी दुकानों, झूला तमाशा और पार्किंग में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा प्रशासन को इस वर्ष पिछले साल से अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद।

काशीपुर। उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शुमार मां बाल सुंदरी देवी मंदिर परिसर में लगने वाले चैती मेले को लेकर इस वर्ष की टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु, व्यापारी और पर्यटक इस ऐतिहासिक मेले में पहुंचते हैं, जिसके कारण मेले से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन द्वारा अलग-अलग मदों में टेंडर जारी किए जाते हैं। इस बार भी काशीपुर प्रशासन ने पूरी पारदर्शिता के साथ टेंडर प्रक्रिया को संपन्न कराया है और इसके बाद सामने आए आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि वर्ष 2026 में मेले से होने वाली आय पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ने जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 और वर्ष 2026 के टेंडरों की तुलना करने पर यह स्पष्ट हुआ है कि अधिकांश व्यवस्थाओं में निविदा राशि में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि एक मद में कमी दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद कुल मिलाकर प्रशासन को मिलने वाले राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यही कारण है कि इस वर्ष के चैती मेले को आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। काशीपुर का यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि स्थानीय व्यापार और प्रशासनिक आय के लिहाज से भी बेहद अहम भूमिका निभाता है।

मेले की व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न टेंडरों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कई महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देते हैं। वर्ष 2025 में विद्युत एवं साउंड व्यवस्था का टेंडर 21 लाख रुपये प्लस जीएसटी में हुआ था, जबकि वर्ष 2026 में यह राशि घटकर 16 लाख 11 हजार 777 रुपये प्लस जीएसटी रह गई है। इस मद में लगभग 4 लाख 88 हजार रुपये की कमी दर्ज की गई है। हालांकि इसके अलावा लगभग सभी प्रमुख मदों में वृद्धि देखने को मिली है। मेले की सबसे बड़ी आय का स्रोत मानी जाने वाली दुकान एवं तहबाजारी की निविदा में इस बार सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में यह टेंडर 2 करोड़ 21 लाख रुपये प्लस जीएसटी में दिया गया था, जबकि वर्ष 2026 में यह बढ़कर 2 करोड़ 63 लाख 55 हजार 932 रुपये प्लस जीएसटी तक पहुंच गया है। इसी प्रकार झूला तमाशा का टेंडर भी इस वर्ष अधिक राशि में गया है। पिछले वर्ष यह टेंडर 1 करोड़ 64 लाख 51 हजार 786 रुपये प्लस जीएसटी में हुआ था, जबकि इस बार यह बढ़कर 1 करोड़ 72 लाख 51 हजार 111 रुपये प्लस जीएसटी हो गया है। पार्किंग व्यवस्था का टेंडर भी बढ़कर 18 लाख 21 हजार 786 रुपये प्लस जीएसटी हो गया है, जो वर्ष 2025 में 14 लाख 80 हजार रुपये प्लस जीएसटी था। टेंट एवं बैरिकेटिंग का टेंडर भी 9 लाख 85 हजार रुपये प्लस जीएसटी से बढ़कर 10 लाख 95 हजार रुपये प्लस जीएसटी हो गया है।

वर्ष 2025 और 2026 के टेंडरों की तुलना करने पर यह साफ दिखाई देता है कि मेले से जुड़े अधिकांश कार्यों में इस बार निविदा राशि में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार दुकान एवं तहबाजारी के टेंडर में करीब 42 लाख 55 हजार रुपये की वृद्धि हुई है, जो इस वर्ष की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से यह मद हमेशा से सबसे महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि चैती मेले के दौरान मंदिर परिसर और उसके आसपास बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें लगाई जाती हैं। इन दुकानों में धार्मिक सामग्री, खिलौने, कपड़े, खानपान की वस्तुएं और अन्य घरेलू सामानों की बिक्री होती है, जिसके कारण व्यापारी इस टेंडर में अधिक रुचि दिखाते हैं। यही वजह है कि इस वर्ष इस मद में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिली और टेंडर राशि में भी बड़ा इजाफा हुआ। झूला तमाशा का टेंडर भी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 8 लाख रुपये से अधिक बढ़ गया है। मेले में आने वाले बच्चों और परिवारों के लिए झूले, सर्कस और अन्य मनोरंजन साधन प्रमुख आकर्षण होते हैं। यही कारण है कि इस मद में भी हर साल अच्छी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है।

पार्किंग व्यवस्था का टेंडर भी इस वर्ष बढ़कर 18 लाख 21 हजार 786 रुपये प्लस जीएसटी हो गया है। पिछले वर्ष यह 14 लाख 80 हजार रुपये प्लस जीएसटी था, जिससे स्पष्ट होता है कि इस बार लगभग 3 लाख 41 हजार रुपये की वृद्धि हुई है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण पार्किंग व्यवस्था की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है। प्रशासन को हर वर्ष बड़ी संख्या में वाहनों की व्यवस्था करनी पड़ती है, जिससे पार्किंग का टेंडर भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी तरह टेंट और बैरिकेटिंग का टेंडर भी इस वर्ष बढ़कर 10 लाख 95 हजार रुपये प्लस जीएसटी तक पहुंच गया है। वर्ष 2025 में यह 9 लाख 85 हजार रुपये प्लस जीएसटी था। टेंट और बैरिकेटिंग मेले की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, इसलिए प्रशासन इन व्यवस्थाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरतता है। कुल मिलाकर इन सभी मदों को मिलाकर वर्ष 2026 में मेले के टेंडरों में लगभग 50 लाख रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

काशीपुर में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक चैती मेले की टेंडर प्रक्रिया इस वर्ष काशीपुर उपजिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित की गई। पूरी प्रक्रिया उप जिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह की मौजूदगी में संपन्न कराई गई, जहां विभिन्न ठेकेदारों और कंपनियों ने अपनी-अपनी बोलियां प्रस्तुत कीं। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सभी टेंडरों को निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत खोला गया, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या विवाद की स्थिति न बने। टेंडर खुलने के बाद जो परिणाम सामने आए, उनके अनुसार अलग-अलग मदों के ठेके विभिन्न ठेकेदारों के नाम गए हैं। जानकारी के अनुसार दुकान एवं तहबाजारी का टेंडर देव इंटरप्राइजेज के नाम खुला है। यह मेले की सबसे बड़ी आय का स्रोत माना जाता है और इस बार भी इस मद में सबसे अधिक बोली लगाई गई। वाहन पार्किंग व्यवस्था का टेंडर सादिक हुसैन ठेकेदार को मिला है। विद्युत एवं साउंड व्यवस्था की जिम्मेदारी भी देव इंटरप्राइजेज को दी गई है।

मनोरंजन से जुड़े प्रमुख आकर्षण झूला तमाशा और सर्कस की व्यवस्था का टेंडर आबिद इलेक्ट्रिक वर्क्स एंड कंपनी रामपुर के नाम खुला है। वहीं मेले में टेंट और बेरीकेटिंग की व्यवस्था का ठेका हनुमन्ता ट्रेडर्स को मिला है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष के आंकड़ों के अनुसार मेले से प्रशासन को मिलने वाला कुल राजस्व पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रहेगा। पिछले वर्ष मेले से कुल 4 करोड़ 21 लाख 31 हजार 786 रुपये प्लस जीएसटी का राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 4 करोड़ 70 लाख 40 हजार 606 रुपये प्लस जीएसटी तक पहुंच गया है। इस प्रकार इस वर्ष प्रशासन को पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 49 लाख 8 हजार 820 रुपये अधिक राजस्व प्राप्त होगा। यह वृद्धि मेले की बढ़ती लोकप्रियता और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि काशीपुर का चैती मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मां बाल सुंदरी देवी के प्रति लोगों की गहरी आस्था के कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस मेले में पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले में लगने वाली दुकानों, झूलों और अन्य गतिविधियों के कारण यह आयोजन एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लेता है। यही कारण है कि प्रशासन हर वर्ष मेले की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास करता है। इस बार भी टेंडर प्रक्रिया समय से पहले पूरी कर ली गई है ताकि मेले की तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पार्किंग, बैरिकेटिंग और विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन यह भी सुनिश्चित करेगा कि मेले के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। टेंडर प्रक्रिया से सामने आए आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि मेले की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और व्यापारियों की भागीदारी भी पहले से अधिक हो गई है। यही कारण है कि इस वर्ष टेंडर राशि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। लगभग 49 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्रशासन के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि काशीपुर का यह ऐतिहासिक चैती मेला आने वाले वर्षों में और अधिक भव्य रूप ले सकता है। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और आर्थिक गतिविधियों का अनूठा संगम बने इस आयोजन को लेकर लोगों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है और प्रशासन भी इसे सफल बनाने के लिए पूरी तैयारी में जुटा हुआ है।

संबंधित ख़बरें
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!