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महिला पतंजलि योग समिति ने पांच कुंडीय महायज्ञ कर फूंका महिला सशक्तिकरण का शंखनाद

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर चामुंडा मंदिर में गूंजे वैदिक मंत्र और योगिनी बहनों ने आहुतियों से बढ़ाई नारी शक्ति की शान जिसमें कमला रिखाड़ी ने योग और अध्यात्म से स्वावलंबन का नया मार्ग दिखाया।

काशीपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर काशीपुर स्थित चामुंडा मंदिर परिसर में एक अत्यंत आध्यात्मिक और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां महिला पतंजलि योग समिति उधम सिंह नगर (पश्चिम) की ओर से पांच कुंडीय हवन यज्ञ संपन्न कराया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान का संचालन महिला पतंजलि योग समिति की योगिनी बहनों द्वारा पूरी श्रद्धा, वैदिक परंपरा और अनुशासन के साथ किया गया। मंदिर परिसर में सुबह से ही आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ था और बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए। यज्ञ के दौरान “स्वाहा स्वाहा” के उच्चारण के साथ गायत्री मंत्र “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गाे देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात” की गूंज पूरे वातावरण को पवित्र बना रही थी। कार्यक्रम के दौरान मंच से कहा गया कि पंच कुंडी गायत्री महायज्ञ हमारी वैदिक सनातन संस्कृति की महान परंपरा का प्रतीक है, जो मानव जीवन को शुद्ध और सकारात्मक बनाने का माध्यम है। उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए आयोजकों ने कहा कि यज्ञ केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है, जिसके माध्यम से मनुष्य के पांच प्राण शुद्ध होते हैं और पंचदेवों की कृपा प्राप्त होती है। यज्ञ की शुरुआत से पहले सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ “ॐ” की ध्वनि का उच्चारण किया और समस्त देवी शक्तियों का आह्वान करते हुए सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की भावना से इस पवित्र यज्ञ को प्रारंभ किया

पवित्र अनुष्ठान की पूरी प्रक्रिया के दौरान वैदिक परंपराओं और विधि-विधान का अत्यंत सावधानी के साथ पालन किया गया। कार्यक्रम के संचालकों ने बताया कि भारतीय वैदिक संस्कृति में यज्ञ केवल एक धार्मिक क्रिया या परंपरागत अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अत्यंत प्रभावी माध्यम माना जाता है। यज्ञ के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर मौजूद नकारात्मक भावनाओं, दुर्भावनाओं और मानसिक अशांति को समाप्त करने का प्रयास करता है और सकारात्मक ऊर्जा को अपने जीवन में स्थान देता है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार यज्ञ से वातावरण भी शुद्ध होता है और समाज में शुभता का विस्तार होता है। इसी भावना के साथ उपस्थित सभी महिलाओं और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भगवान की स्तुति और उपासना से जुड़े मंत्रों का सामूहिक उच्चारण किया। पूरे वातावरण में वैदिक मंत्रों की ध्वनि गूंजने लगी, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव हुआ। इस दौरान सभी ने हाथ जोड़कर जगत पिता जगदीश्वर से प्रार्थना की कि वे सभी को सद्गुण, सद्बुद्धि, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करें।

कार्यक्रम के दौरान वैदिक स्तुति और प्रार्थनाओं के माध्यम से ईश्वर से मानव जीवन को सही दिशा देने की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर आंखें बंद करते हुए जगत पिता जगदीश्वर का स्मरण किया और उनसे प्रार्थना की कि वे मानव समाज को सद्कर्मों की ओर प्रेरित करें। मंच से कहा गया कि भगवान ही वह शक्ति हैं जिन्होंने इस सृष्टि की रचना की है और वही समस्त जीवों के जीवन का आधार हैं। प्रार्थना के दौरान यह भी कहा गया कि प्रभु हमें दुर्गुणों से दूर रखें और हमारे भीतर सद्गुणों का विकास करें। महिलाओं ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में सदाचार, सद्भाव और सेवा की भावना को अपनाएंगी। आयोजन के दौरान यह भी बताया गया कि आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर यह यज्ञ विशेष रूप से महिला शक्ति के सम्मान और उत्थान के लिए आयोजित किया गया है। इस अवसर पर महिलाओं के लिए विशेष प्रार्थना की गई कि वे अपने भीतर छिपी अनंत शक्ति को पहचानें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

यज्ञ के दौरान कपूर जलाकर अग्नि देव की स्थापना की गई और वैदिक विधि के अनुसार अग्नि देव का स्वागत किया गया। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने क्रमवार आहुतियां अर्पित कीं। “ॐ सूर्य ज्योति स्वाहा”, “ॐ अग्नि ज्योति स्वाहा” जैसे मंत्रों के साथ आहुति देते हुए वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। आयोजकों ने बताया कि यज्ञ में दी गई प्रत्येक आहुति केवल धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि मानव समाज के कल्याण की कामना का प्रतीक होती है। यज्ञ के दौरान यह भी कहा गया कि भगवान से धन, यश, कीर्ति और ज्ञान की कामना इसलिए की जाती है ताकि मनुष्य स्वयं सुखी रहने के साथ-साथ समाज के अन्य लोगों के सुख को भी बढ़ा सके। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने इस विचार को स्वीकार करते हुए संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में प्राप्त संसाधनों का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि समाज के कल्याण के लिए भी करेंगी। इस प्रकार यज्ञ की प्रत्येक आहुति के साथ सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की भावना को सुदृढ़ किया गया।

महिला पतंजलि योग समिति उधम सिंह नगर (पश्चिम) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बताते हुये कमला खिखाडी ने बताया कि ये यज्ञ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना भी था। उन्होने कहा कि संगठन वर्ष भर महिलाओं के स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और मानसिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य करता है। योग के माध्यम से महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जाता है ताकि वे जीवन की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें। कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी भी दी गई कि समिति द्वारा वर्ष भर कई महिलाओं को योग प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे न केवल स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करती हैं बल्कि आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनती हैं। कई महिलाएं योग प्रशिक्षक बनकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं और समाज में सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं। आयोजकों ने बताया कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है, जो व्यक्ति को मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच प्रदान करती है।

महिला सशक्तिकरण के विषय पर चर्चा करते हुए कमला रिखाडीें ने कहा कि पिछले डेढ़ से दो दशकों में भारत में महिलाओं की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। आज महिलाओं को शिक्षा, विज्ञान, सेना, विमानन, प्रशासन और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों के समान अवसर प्राप्त हो रहे हैं। महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इस अवसर पर रानी लक्ष्मी बाई, बछेंद्री पाल और कल्पना चावला जैसी महान महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया कि भारतीय नारी ने हमेशा साहस, प्रतिभा और आत्मविश्वास का परिचय दिया है। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि महिलाओं को केवल बाहरी अवसर ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाना आवश्यक है। कई बार महिलाएं भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे उनके जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए योग के माध्यम से उन्हें मानसिक संतुलन और आत्मबल प्रदान करना भी जरूरी है।

कमला रिखाडी ने कहा कि महिला पतंजलि योग समिति का मुख्य लक्ष्य समाज में महिला शक्ति को जागृत करना है। उनका मानना है कि परिवार और समाज की आधारशिला महिला ही होती है। यदि महिला मजबूत और आत्मनिर्भर होगी तो पूरा समाज मजबूत बनेगा। कार्यक्रम में कहा गया कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी स्वरूप माना गया है। ज्ञान के लिए मां सरस्वती की पूजा की जाती है, धन के लिए मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है और शक्ति के लिए मां गौरा की उपासना की जाती है। ऐसे देश में महिलाओं को कमजोर या असशक्त नहीं माना जा सकता। जरूरत केवल इस बात की है कि उनकी आंतरिक शक्ति को पहचानने और उसे विकसित करने के लिए उचित मार्गदर्शन दिया जाए।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गई कि रविवार के दिन एक विशेष मंच का आयोजन किया जाएगा, जहां वर्ष भर सशक्त बनी महिलाओं को अपनी कहानी और अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा। इस मंच पर महिलाएं बताएंगी कि किस प्रकार योग, प्रशिक्षण और सामूहिक सहयोग के माध्यम से उन्होंने अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन किया। कई महिलाएं जो पहले शारीरिक या मानसिक समस्याओं से जूझ रही थीं, आज स्वस्थ और आत्मविश्वासी जीवन जी रही हैं। कमला रिखाडी का कहना है कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से महिलाओं को प्रेरणा मिलती है और वे अपने भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानने लगती हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित महिलाओं और श्रद्धालुओं ने मां जगदंबा के चरणों में प्रार्थना की कि हर महिला स्वस्थ, सुखी और आत्मनिर्भर बने तथा अपने जीवन में सकारात्मकता और शक्ति के साथ आगे बढ़े। इस प्रकार आध्यात्मिकता, योग और सामाजिक जागरूकता के संदेश के साथ यह आयोजन संपन्न हुआ, जिसने महिला शक्ति के महत्व और उसके उत्थान की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया।

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