काशीपुर। शुक्रवार को राजनीतिक और धार्मिक सम्मान से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा उस समय सार्वजनिक बहस का केंद्र बन गया, जब महानगर कांग्रेस कमेटी ने प्रयागराज के माघ मेले में जगद्गुरु शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज और उनके शिष्यों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में मौन व्रत उपवास का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता के संरक्षण में साधु-संतों का अपमान किया गया है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार, बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता काशीपुर के प्रसिद्ध मोटेश्वर महादेव चौती मंदिर परिसर मैदान में एकत्र हुए। सभी कार्यकर्ताओं ने काली पट्टियां बांधकर मौन धारण किया और अहिंसात्मक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल गंभीर और अनुशासित बना रहा, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक सम्मान से जुड़ा विषय मानती है।
इस मौन व्रत उपवास का नेतृत्व काशीपुर कांग्रेस कमेटी की महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने किया। उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व पदाधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे। मैदान में जुटे लोगों ने बिना किसी नारेबाजी या उग्र प्रदर्शन के शांतिपूर्वक विरोध कर यह दिखाने का प्रयास किया कि लोकतंत्र में असहमति जताने के कई तरीके हो सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि प्रयागराज जैसे पवित्र धार्मिक आयोजन में एक प्रतिष्ठित शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह न केवल एक व्यक्ति विशेष का अपमान है बल्कि पूरे सनातन परंपरा और साधु-संत समाज के सम्मान पर आघात है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एक ओर धार्मिक भावनाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उसके इशारे पर ऐसे कृत्य सामने आ रहे हैं, जो उसकी कथनी और करनी के अंतर को उजागर करते हैं।
उपवास कार्यक्रम के समापन के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। पूर्व महानगर अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके नेता लगातार धर्माचार्यों और साधु-संतों के सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी खुद को धर्म की सबसे बड़ी संरक्षक बताती है, वही आज धार्मिक गुरुओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं पर मौन क्यों है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश कुमार सिंह ने कहा कि यह घटनाक्रम भाजपा की उस मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें सत्ता के आगे किसी भी परंपरा या सम्मान की कोई कीमत नहीं रह जाती। उनके अनुसार, साधु-संतों के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा आज उन्हीं साधु-संतों के अपमान पर उतारू दिखाई दे रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
इसी क्रम में मनोज जोशी, विमल गुड़िया, इंदर सिंह एडवोकेट, जितेंद्र सरस्वती और मंसूर मंसूरी ने भी अपने विचार रखे। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी धर्म या परंपरा के खिलाफ नहीं है, बल्कि हर उस ताकत के खिलाफ खड़ी है जो सम्मान और संवैधानिक मूल्यों को कुचलने का प्रयास करती है। वक्ताओं का कहना था कि प्रयागराज की घटना केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में साधु-संतों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े सवाल खड़े करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आज इस तरह की घटनाओं पर चुप्पी साध ली गई, तो भविष्य में हालात और गंभीर हो सकते हैं। कांग्रेस नेताओं ने साफ किया कि पार्टी अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीकों से अपना संघर्ष जारी रखेगी।
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने अपने बयान में भाजपा सरकार पर सीधे-सीधे तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस भाजपा ने साधु-संतों के आशीर्वाद और समर्थन के सहारे सत्ता का रास्ता तय किया, वही आज सत्ता में आने के बाद उन्हीं साधु-संतों का अनादर कर रही है। अलका पाल ने आरोप लगाया कि सनातन संस्कृति का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार आज लाठियों के जरिए साधु-संतों को डराने का काम कर रही है। उनके अनुसार, यह भाजपा की दोहरी राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जनता अब भाजपा के झूठे सनातन प्रेम को समझ चुकी है और उसका पिटारा खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस पार्टी साधु-संतों के सम्मान के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी कीमत पर उनके अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगी।
मौन व्रत उपवास कार्यक्रम में कांग्रेस संगठन की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। सुभाष पाल, रियासत अली, सुशील भटनागर, डॉ. करण सिंह पाल, गौरव रस्तोगी, जगदीश पनेरु, एडवोकेट सौरभ शर्मा, डॉ. शुभ्रा शर्मा, पंडित रामदेव शर्मा, मोहम्मद अकरम, दीपक पाल, हनीफ अंसारी, सरिम सैफी, सुजाता शर्मा, रंजना गुप्ता, रोशनी बेगम, जगदीश सिंह, संजीव शर्मा, मनोज जोशी और महेंद्र बेदी जैसे कई कार्यकर्ता पूरे समय कार्यक्रम में मौजूद रहे। इनके अलावा इदरीस अंसारी, अनीस अंसारी, परम सिद्धू, एडवोकेट अनिल शर्मा, मीणा आर्य, एडवोकेट संदीप चतुर्वेदी, एडवोकेट सुरेंद्र वाटला, राकेश यादव, फिरोज हुसैन, पार्षद सादिक हुसैन, शाह आलम, पंकज शर्मा, डॉ. रमेश कश्यप, एडवोकेट राजेश शर्मा, सेवादल अध्यक्ष अनीस अंसारी और दीपक कुमार सहित अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ताओं का साफ कहना था कि यह आयोजन किसी दलगत राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आस्था, सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि साधु-संत समाज ने सदियों से भारतीय समाज को नैतिकता, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। ऐसे में उनके साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार केवल किसी एक व्यक्ति या वर्ग का अपमान नहीं, बल्कि पूरे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी एक धर्म या पंथ के समर्थन में नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति और समुदाय के सम्मान के लिए है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के लिए हिंसा या उग्रता ही एकमात्र रास्ता नहीं होती। मौन व्रत के जरिए उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि शांतिपूर्ण, अनुशासित और अहिंसक विरोध भी उतना ही प्रभावशाली और मजबूत हो सकता है, जितना कोई आक्रामक आंदोलन।
समग्र रूप से देखा जाए तो काशीपुर में आयोजित यह मौन व्रत उपवास केवल एक सीमित क्षेत्रीय गतिविधि बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसने स्थानीय राजनीति से आगे बढ़ते हुए व्यापक स्तर पर बहस को जन्म दिया। इस आयोजन के माध्यम से साधु-संतों के सम्मान, धार्मिक आस्थाओं की सुरक्षा और सत्ता की नैतिक जिम्मेदारियों जैसे विषय एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में आ गए। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यह कार्यक्रम भाजपा सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं के संरक्षण की बात की जाती है। पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह धर्म के नाम पर किसी भी तरह के कथित दुरुपयोग या दोहरे रवैये के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। कार्यक्रम के समापन अवसर पर नेताओं ने संकेत दिए कि यदि भविष्य में भी साधु-संतों या धार्मिक व्यक्तित्वों के सम्मान से जुड़ी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहते हुए और अहिंसक तरीकों से अपने विरोध को और अधिक संगठित तथा प्रभावी रूप में सामने लाएगी।





