काशीपुर। कांग्रेस की महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने काशीपुर के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या को प्रदेश के लिए एक गहरा और पीड़ादायक झटका बताते हुए कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की कमियों को उजागर करने वाला आईना है। उन्होंने कहा कि सुखवंत सिंह की दुखद मृत्यु ने यह साफ कर दिया है कि आज भी किसान, मजदूर और आम नागरिक न्याय के लिए भटकने को मजबूर हैं। अलका पाल ने कहा कि जब कोई किसान इस हद तक टूट जाता है कि उसे अपनी जान देने का रास्ता चुनना पड़ता है, तो यह सरकार, प्रशासन और व्यवस्था सभी के लिए आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब केवल संवेदना व्यक्त करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कठोर दंड और ठोस कार्रवाई के माध्यम से न्याय की मजबूत नींव रखनी होगी, ताकि भविष्य में कोई भी किसान खुद को अकेला और असहाय महसूस न करे।
अपने बयान में अलका पाल ने कहा कि सुखवंत सिंह की मौत से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि समाज को किस दिशा में आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य, जिसे देवभूमि कहा जाता है, वहां अगर किसान खुद को सुरक्षित और न्यायसंगत महसूस नहीं कर पा रहा, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। अलका पाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक ऐसा समाज बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है, जहां किसान, मजदूर और आम नागरिक बिना डर और दबाव के अपना जीवन जी सकें। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कागजों और फाइलों में सीमित न रहे, बल्कि वह जमीन पर दिखाई दे। सुखवंत सिंह की घटना यह बताती है कि जब तक व्यवस्था आम आदमी के पक्ष में खड़ी नहीं होगी, तब तक ऐसे दर्दनाक घटनाक्रम सामने आते रहेंगे।
महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से इस घटना को केवल एक प्रकरण के रूप में न देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस घटना से प्रेरणा लेकर राज्य में एक नई व्यवस्था की नींव रखनी चाहिए, जहां पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता की सुरक्षा और सेवा हो, न कि डर और दमन। अलका पाल ने कहा कि पुलिस व्यवस्था पर जनता का भरोसा बहाल करना आज सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पुलिस को संवेदनशील, जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जाए, तो न केवल अपराध पर नियंत्रण संभव है, बल्कि आम नागरिक को न्याय मिलने की उम्मीद भी मजबूत होगी। सुखवंत सिंह की मौत इस बात की चेतावनी है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो इसके परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं।
अलका पाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि सुखवंत सिंह की आवाज आने वाले समय में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा तय कर सकती है, बशर्ते सरकार इस आवाज को सुने और उस पर अमल करे। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल शोक व्यक्त करने का विषय नहीं, बल्कि सुधार की शुरुआत का अवसर है। यदि सरकार इस मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई करती है, तो यह संदेश जाएगा कि उत्तराखंड में अन्याय और उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अलका पाल ने कहा कि न्याय में देरी केवल पीड़ित परिवार के जख्मों को और गहरा करती है, इसलिए जरूरी है कि दोषियों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कार्रवाई हो और उसे समयबद्ध तरीके से अंजाम तक पहुंचाया जाए।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सुखवंत सिंह की मृत्यु ने पूरे प्रदेश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हमारी व्यवस्था किस दिशा में जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान देश की रीढ़ है और अगर वही खुद को असुरक्षित महसूस करेगा, तो समाज की नींव कमजोर हो जाएगी। अलका पाल ने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि विकास केवल आंकड़ों और योजनाओं से नहीं होता, बल्कि तब होता है जब आम नागरिक को न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और सुखवंत सिंह को अपनी जान देने का फैसला न लेना पड़े।
अपने बयान के अंत में अलका पाल ने कहा कि इस मामले में सरकार को अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि त्वरित और सख्त कार्रवाई करके ही उत्तराखंड के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। यदि सरकार इस घटना से सबक लेकर ठोस कदम उठाती है, तो यह पूरे प्रदेश के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है। अलका पाल ने उम्मीद जताई कि सुखवंत सिंह की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी और यह घटना एक ऐसे बदलाव की नींव रखेगी, जहां हर किसान, मजदूर और आम नागरिक को न्याय मिलेगा, उसकी आवाज सुनी जाएगी और उसे सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलेगा।



