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अपने दौरे पर गरजे सुरेंद्र सिंह कुकरेती उत्तराखंड के हक अधिकार और 2027 की सत्ता पर बड़ा ऐलान

सैनिक कॉलोनी में कार्यकर्ताओं के जोशीले स्वागत के बीच केंद्रीय अध्यक्ष ने सीबीआई जांच, भू-कानून, युवाओं की भागीदारी और राज्य आंदोलन की विरासत को लेकर सरकार को घेरते हुए जनता के बीच उतरने का बड़ा संदेश दिया।

काशीपुर। अपने दौरे के दौरान काशीपुर पहुँचे उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कुकरेती सैनिक कॉलोनी पहुंचे। यहां पहुंचते ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया और पूरे क्षेत्र में उत्तराखंड क्रांति दल के समर्थन के नारे गूंज उठे। इस अवसर पर केंद्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया और राज्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। मीडिया से बातचीत में सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने कहा कि उत्तराखंड में चल रहे तमाम आंदोलनों और जनभावनाओं को अब सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीबीआई जांच की मांग कोई अचानक उठी हुई आवाज नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों की पीड़ा, संघर्ष और जनता का दबाव है, जिसे उत्तराखंड क्रांति दल लगातार सड़कों पर उतरकर उठाता रहा है।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने कहा कि इस मांग को सरकार तक पहुंचाने में लगभग तीन साल का लंबा समय लगा है। उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ता लगातार सड़कों पर संघर्ष करते रहे, तब जाकर कहीं सरकार पर दबाव बना। उन्होंने कहा कि जब पूरे उत्तराखंड का जनमानस उत्तराखंड क्रांति दल के झंडे के नीचे एकत्रित हुआ, तब जाकर यह मांग मजबूती से सामने आई। केंद्रीय अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अब देखना यह है कि सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई एक संगठन या दल की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड की आवाज है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार जनता की भावनाओं को समझे और सही दिशा में ठोस फैसला ले।

कार्यक्रम के दौरान सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने यह भी कहा कि यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि कार्यकर्ताओं और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल का उद्देश्य हमेशा से जनता के बीच जाकर राज्य के अंदर हो रही हर गतिविधि को सामने रखना रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता अनभिज्ञ नहीं है, बल्कि उसे भली-भांति पता है कि राज्य के भीतर क्या कुछ चल रहा है। उन्होंने कहा कि हम एक संदेश लेकर जनता के बीच जा रहे हैं कि अगर आपने इस राज्य का निर्माण किया है, तो अब इस राज्य को बचाने और संवारने की जिम्मेदारी भी आपकी ही है। उत्तराखंड क्रांति दल एक राजनीतिक दल होने के साथ-साथ उस आंदोलन की विरासत है, जिसने राज्य को जन्म दिया।

अपने वक्तव्य में सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल का नाम आज हर बच्चे की जुबान पर है। उन्होंने दावा किया कि आज उत्तराखंड का बच्चा-बच्चा यह कह रहा है कि वर्ष 2027 में उत्तराखंड क्रांति दल को सत्ता तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक बयान नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत है, जो गांव-गांव और शहर-शहर में दिखाई दे रही है। केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक दलों में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, जैसे किसी परिवार में होते हैं, लेकिन उत्तराखंड क्रांति दल आज इतना बड़ा और मजबूत हो चुका है कि ऐसे मतभेद उसे कमजोर नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब-जब उत्तराखंड क्रांति दल आगे बढ़ता है, तब-तब राष्ट्रीय पार्टियां डर के कारण उसे कमजोर करने की कोशिश करती हैं।

मुख्यमंत्री से चल रही बातचीत पर भी सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से लगातार संवाद चल रहा है और हाल ही में उनसे बातचीत भी हुई है। केंद्रीय अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री सीबीआई जांच की मांग को लेकर सकारात्मक निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की तुलना बेरोजगार संघ के किसी आंदोलन से नहीं की जा सकती, क्योंकि यह मामला महिला और बच्चे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा विषय है, जिसने पूरे उत्तराखंड की मातृशक्ति, बच्चों और बुजुर्गों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि जब कोचिंग सेंटर और कॉलेजों के नाम अंकिता भंडारी के नाम पर रखे जा रहे हैं, तो आने वाली पीढ़ी यह जरूर पूछेगी कि अंकिता भंडारी कौन थी।

इस संदर्भ में सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके इतिहास और भविष्य के प्रभाव को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे द्वाराहाट में विभिन्न महापुरुषों के नाम पर इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, वैसे ही किसी नाम को स्थापित करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आने वाली पीढ़ी को हम क्या संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में बच्चों को यह बताने में संकोच होगा कि किसी संस्थान का नाम क्यों और किसके नाम पर रखा गया, तो यह समाज के लिए उचित नहीं होगा। इसलिए हर फैसले को सोच-समझकर लेना चाहिए, ताकि इतिहास पर कोई सवाल न उठे।

वर्ष 2027 को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संगठन के भीतर मनमुटाव की बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल एक बड़ा परिवार है और इसमें वैचारिक मतभेद नहीं के बराबर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संगठन में गंभीर मतभेद होते, तो आज उत्तराखंड क्रांति दल इस मुकाम पर नहीं होता। युवाओं से दूरी के आरोपों को खारिज करते हुए सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने कहा कि आज का युवा ही उत्तराखंड क्रांति दल को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं और पार्टी के बीच कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। पार्टी ने स्पष्ट नारा दिया है कि अबकी बार युवाओं को कमान और बुजुर्गों को सम्मान।

अपने संबोधन में सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने यह भी कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल इस राज्य के हर कोने में जनता के साथ खड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बाहरी लोगों का कब्जा बढ़ता जा रहा है और खनन माफिया, भू-माफिया और वन माफिया ने उत्तराखंड को जकड़ लिया है। उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और मातृशक्ति से जुड़े मुद्दे आज भी उतने ही गंभीर हैं, जितने राज्य आंदोलन के समय थे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ये केवल मुद्दे नहीं, बल्कि उनकी चिंताएं हैं, जिनके समाधान के लिए उत्तराखंड क्रांति दल लगातार संघर्ष कर रहा है।

भू-कानून के सवाल पर सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने कहा कि भारतीय संविधान हर राज्य को मूल निवास तय करने का अधिकार देता है। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद भारत के संविधान में यह प्रावधान रखा गया था कि कोई भी राज्य मूल निवास 1950 के आधार पर तय कर सकता है। उन्होंने दुर्भाग्य जताया कि उत्तराखंड जब उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, तब मूल निवास लागू था, लेकिन राज्य बनने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में धारा 371 लागू है और उत्तराखंड में भी इसी तरह का प्रावधान किया जाना चाहिए।

अंत में केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कुकरेती ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल कोई असंवैधानिक मांग नहीं कर रहा है, बल्कि भारत के संविधान के दायरे में रहते हुए अपने अधिकारों की बात कर रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड राज्य ने 1924 को आधार बनाया है, जबकि उत्तराखंड केवल 1950 की बात कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि यह मांग किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की है। काशीपुर दौरे के दौरान दिए गए उनके बयानों ने यह साफ कर दिया कि उत्तराखंड क्रांति दल आने वाले समय में राज्य के मुद्दों को और अधिक आक्रामकता के साथ उठाने की तैयारी में है और जनता के बीच जाकर हर सवाल का जवाब मांगने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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